विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Cassava Brown Streak Disease: अफ्रीका खाद्य सुरक्षा और वायरस

Cassava Brown Streak Disease: अफ्रीका खाद्य सुरक्षा और वायरस

चर्चा में क्यों?

एक हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अफ्रीका की एक तिहाई से अधिक भूमि Cassava Brown Streak Disease (कसावा ब्राउन स्ट्रीक रोग - CBSD) से खतरे में हो सकती है, जो एक वायरल ब्लाइट (viral blight) है जो कसावा की जड़ों को नष्ट कर देता है। चेतावनी ने खाद्य सुरक्षा (food security) के लिए चिंता पैदा कर दी है क्योंकि उप-सहारा अफ्रीका (sub-Saharan Africa) भर में लाखों लोगों के लिए कसावा एक प्रमुख मुख्य भोजन (staple) है।

पृष्ठभूमि

कसावा अफ्रीका में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली एक सूखा-सहिष्णु कंद फसल (drought-tolerant tuber crop) है। CBSD की पहली बार पहचान 20वीं सदी के मध्य में पूर्वी अफ्रीका के तट के साथ की गई थी। यह दो संबंधित वायरस - कसावा ब्राउन स्ट्रीक वायरस (CBSV) और युगांडा कसावा ब्राउन स्ट्रीक वायरस (UCBSV) के कारण होता है। वायरस पौधे के तने और भंडारण जड़ों (storage roots) को संक्रमित करते हैं, जिससे तनों में भूरी धारियां (brown streaks) और कंदों में नेक्रोटिक सड़ांध (necrotic rot) होती है जो अक्सर कटाई तक छिपी रहती है।

लक्षण और प्रसार

  • दृश्यमान संकेत: पत्तियां क्लोरोसिस (पीलापन) और मोटलिंग (mottling) दिखाती हैं; तनों में गहरे भूरे रंग की धारियां विकसित होती हैं; कंद भूरे, सूखे सड़ांध को प्रदर्शित करते हैं जो उपज और गुणवत्ता को गंभीर रूप से कम कर देता है।
  • वैक्टर (Vectors): वायरस मुख्य रूप से व्हाइटफ्लाई (whitefly) बेमिसिया तबासी (Bemisia tabaci) द्वारा प्रेषित होते हैं, विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका 1 और 2 आनुवंशिक समूह जो पूर्वी और मध्य अफ्रीका में पनपते हैं। किसान अनजाने में संक्रमित पौधों से ली गई कटिंग लगाकर भी बीमारी फैलाते हैं।
  • जलवायु और कृषि पद्धतियां: गर्म तापमान और वर्षा के बदलते पैटर्न व्हाइटफ्लाई आबादी का पक्ष ले सकते हैं। कमजोर औपचारिक बीज प्रणालियां और दूषित कटिंग का पुन: उपयोग वायरस को नए क्षेत्रों में बने रहने और फैलने की अनुमति देता है।

प्रभाव और प्रबंधन

  • खाद्य सुरक्षा खतरा: कसावा करोड़ों अफ्रीकियों के लिए कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है। गंभीर CBSD प्रकोपों के कारण फसल का कुल नुकसान हो सकता है, जिससे घरेलू खाद्य आपूर्ति और आय कम हो सकती है।
  • भौगोलिक प्रसार: ऐतिहासिक रूप से तटीय तंजानिया और मोजाम्बिक तक सीमित, CBSD युगांडा, केन्या, रवांडा, बुरुंडी और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में अंतर्देशीय (inland) चला गया है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हस्तक्षेप के बिना यह पश्चिम अफ्रीका में प्रमुख कसावा उत्पादक देशों तक पहुंच सकता है।
  • नियंत्रण उपाय: वैज्ञानिक स्वच्छ-बीज योजनाओं के माध्यम से वायरस मुक्त रोपण सामग्री वितरित करने, CBSD और कसावा मोज़ेक रोग (cassava mosaic disease) दोनों के लिए प्रतिरोधी कसावा किस्मों के विकास और तैनाती, व्हाइटफ्लाई आबादी को कम करने के लिए फसल रोटेशन और इंटरक्रॉपिंग (intercropping) का अभ्यास करने और शीघ्र पता लगाने के लिए किसान निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने की सलाह देते हैं।

निष्कर्ष

CBSD पौधों की बीमारियों और कीटों के प्रति अफ्रीका की खाद्य प्रणालियों की भेद्यता (vulnerability) पर प्रकाश डालता है। समय पर निगरानी, बेहतर बीज प्रणाली और प्रतिरोधी किस्मों में निवेश बीमारी को पश्चिम की ओर फैलने से रोकने के लिए आवश्यक है। किसान जागरूकता पैदा करना और कीट प्रबंधन को एकीकृत करना इस महत्वपूर्ण फसल को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

स्रोत: Down To Earth

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