विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

CCDB: भारत ने कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड की अध्यक्षता की

CCDB: भारत ने कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड की अध्यक्षता की

चर्चा में क्यों?

टोक्यो में कॉमन क्राइटेरिया रिकग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) की अप्रैल 2026 की बैठक में, सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से भारत को 2026-2028 के कार्यकाल के लिए कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CCDB) की अध्यक्षता के लिए नामित किया। यह पहली बार है जब भारत वैश्विक आईटी सुरक्षा मूल्यांकन मानकों (global IT security evaluation standards) के लिए जिम्मेदार तकनीकी निकाय का नेतृत्व करेगा।

पृष्ठभूमि

कॉमन क्राइटेरिया रिकग्निशन अरेंजमेंट (Common Criteria Recognition Arrangement) सुरक्षित डिजिटल उत्पादों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाता है, जिससे एक सदस्य देश में जारी आईटी सुरक्षा प्रमाणपत्रों को अन्य लोगों द्वारा मान्यता प्राप्त करने की अनुमति मिलती है। CCDB व्यवस्था की तकनीकी रीढ़ है। यह सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों और प्रणालियों की सुरक्षा के मूल्यांकन के लिए कॉमन क्राइटेरिया (CC) मानकों के विकास का प्रबंधन करता है और कॉमन इवैल्यूएशन मेथोडोलॉजी (CEM) की देखरेख करता है। बोर्ड CC पोर्टल का भी रखरखाव करता है, तकनीकी कार्य कार्यक्रमों का समन्वय करता है और राष्ट्रीय प्रमाणन निकायों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।

CCDB की भूमिका

  • CC मानकों और CEM को विकसित और अद्यतन करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट-ऑफ़-थिंग्स उपकरणों (Internet‑of‑Things devices) जैसी उभरती तकनीकों को संबोधित करते हैं।
  • पारस्परिक मान्यता (mutual recognition) बनाए रखने और मूल्यांकन के दोहराव से बचने के लिए प्रमाण पत्र जारी करने वाले राष्ट्रों के बीच तकनीकी सामंजस्य का समन्वय करता है।
  • CC पोर्टल की देखरेख करता है, जो प्रमाणित उत्पादों और तकनीकी दस्तावेजों तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है।
  • प्रमाणपत्र-उपभोग करने वाले देशों (certificate-consuming nations) में क्षमता-निर्माण का समर्थन करता है ताकि उनकी खरीद एजेंसियां प्रमाणित उत्पादों का आकलन कर सकें और उन पर भरोसा कर सकें।

भारत के नामांकन का महत्व

  • साइबर सुरक्षा में नेतृत्व (Leadership in cybersecurity) - CCDB की अध्यक्षता करना भारत को वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों को आकार देने की अनुमति देता है, जो इसकी बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाता है।
  • प्रतिनिधित्व (Representation) - भारत 2013 से CCRA प्रमाणपत्र-अधिकृत सदस्य रहा है। यह नामांकन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन (STQC) निदेशालय के तहत राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रयोगशालाओं को चलाने में इसके अनुभव को मान्यता देता है।
  • अवसर (Opportunities) - बोर्ड का नेतृत्व करने से भारत समावेशी मानकों की वकालत करने में सक्षम होगा जो विकासशील देशों की जरूरतों पर विचार करते हैं और उभरती प्रौद्योगिकियों के सुरक्षा मूल्यांकन में विशेषज्ञता का निर्माण करते हैं।

निष्कर्ष

कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड की भारत की अध्यक्षता साइबर और सूचना सुरक्षा के लिए वैश्विक केंद्र बनने की उसकी खोज में एक मील का पत्थर है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास का मार्गदर्शन करके, भारत सुरक्षित डिजिटल उत्पादों को बढ़ावा दे सकता है और सीमा पार व्यापार में विश्वास बढ़ा सकता है। यह देश को डेटा संप्रभुता (data sovereignty), आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा (supply-chain security) और ग्लोबल साउथ के लिए प्रौद्योगिकी पहुंच (technology access) जैसे मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण योगदान करने के लिए भी स्थान देता है।

स्रोत:
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