अंतर्राष्ट्रीय संबंध

Chagos Islands: मॉरीशस संप्रभुता, डिएगो गार्सिया और विउपनिवेशीकरण विवाद

Chagos Islands: मॉरीशस संप्रभुता, डिएगो गार्सिया और विउपनिवेशीकरण विवाद

चर्चा में क्यों?

यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) ने चागोस द्वीप समूह (Chagos Islands) पर मॉरीशस (Mauritius) को संप्रभुता हस्तांतरित करने वाले कानून को रोक दिया है। यह रोक संयुक्त राज्य अमेरिका की आपत्तियों के बाद आई है, जो डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) पर एक प्रमुख सैन्य अड्डा संचालित करता है और उसे यूके के साथ अपने 1966 के रक्षा समझौते में किसी भी बदलाव को मंजूरी देनी चाहिए। यह विकास विस्थापित चागोसियन समुदाय (Chagossian community) के पुनर्वास (resettlement) की उम्मीदों में देरी करता है और एक लंबे समय से चल रहे विउपनिवेशीकरण विवाद (decolonisation dispute) को लंबा खींचता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical background)

चागोस द्वीपसमूह हिंद महासागर में 50 से अधिक छोटे द्वीपों से बना है। इसे 1965 में ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (British Indian Ocean Territory - BIOT) बनाने के लिए अंग्रेजों द्वारा मॉरीशस से अलग कर दिया गया था। 1967 और 1973 के बीच ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी नौसैनिक और हवाई अड्डे के लिए रास्ता बनाने के लिए 1,500 से अधिक चागोसियनों को उनकी मातृभूमि से बलपूर्वक हटा दिया। द्वीपवासियों को मॉरीशस, सेशेल्स (Seychelles) और यूके में स्थानांतरित कर दिया गया था और उन्होंने तब से वापसी और मुआवजे के लिए अभियान चलाया है।

हालिया वार्ता (Recent negotiations)

2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) ने एक सलाहकार राय जारी की जिसमें कहा गया कि द्वीपसमूह का ब्रिटेन का निरंतर प्रशासन गैरकानूनी था और द्वीपों को मॉरीशस को लौटा दिया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने अनुपालन की मांग करते हुए एक प्रस्ताव अपनाया। 2025 में यूके और मॉरीशस ने एक मसौदा संधि पर बातचीत की जिसमें अमेरिका को डिएगो गार्सिया के दीर्घकालिक पट्टे (long-term lease) के साथ मॉरीशस की संप्रभुता की परिकल्पना की गई थी। हालांकि, 1966 के यूके-यूएस समझौते में संशोधन के लिए अमेरिकी कांग्रेस को सहमति देनी होगी।

वर्तमान घटनाक्रम (Current developments)

  • अमेरिकी विरोध (US opposition): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह किसी भी ऐसे सौदे का समर्थन नहीं करेगा जो डिएगो गार्सिया बेस के रणनीतिक मूल्य को खतरे में डाल सकता है। वाशिंगटन का मानना है कि यह बेस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यूके की प्रतिक्रिया (UK response): ब्रिटिश सरकार ने संप्रभुता विधेयक को रोक दिया है और कहा है कि वह केवल अपने सुरक्षा भागीदारों (security partners) के परामर्श से ही आगे बढ़ेगी। इसका तर्क है कि दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है।
  • मॉरीशस का रुख (Mauritius’ stance): मॉरीशस के नेता विउपनिवेशीकरण और विस्थापित द्वीपवासियों के पुनर्वास के लिए दबाव डालना जारी रखे हुए हैं। वे इस ठहराव को एक झटका बताते हैं लेकिन कूटनीतिक और कानूनी चैनलों के माध्यम से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।

महत्व

  • विउपनिवेशीकरण और मानवाधिकार (Decolonisation and human rights): चागोस का मामला अनसुलझी औपनिवेशिक विरासतों और स्वदेशी लोगों (indigenous peoples) के अपनी पैतृक भूमि पर लौटने के अधिकारों पर प्रकाश डालता है।
  • रणनीतिक चिंताएं (Strategic concerns): डिएगो गार्सिया अमेरिका और यूके बलों के लिए एक प्रमुख रसद और निगरानी केंद्र (logistics and surveillance hub) है। संप्रभुता में किसी भी बदलाव का हिंद महासागर में शक्ति प्रक्षेपण (power projection) पर प्रभाव पड़ता है।
  • कूटनीतिक संबंध (Diplomatic relations): इस विवाद में तीन देश शामिल हैं- मॉरीशस, यूके और अमेरिका। कानूनी दायित्वों और सुरक्षा हितों को संतुलित करने के लिए नाजुक बातचीत की आवश्यकता होती है।

स्रोत: The Hindu

Continue reading on the App

Save this article, highlight key points, and take quizzes.

App Store Google Play
Home Current Affairs 📰 Daily News 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Web App