Defence

CISF ने हवाई अड्डों पर काउंटर-ड्रोन और आपातकालीन तैयारियों को बढ़ाया

CISF ने हवाई अड्डों पर काउंटर-ड्रोन और आपातकालीन तैयारियों को बढ़ाया

खबरों में क्यों?

29 मई 2026 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Industrial Security Force - CISF) ने हवाई अड्डों और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों (sensitive installations) पर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा (review) करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। बल ने भारतीय सेना (Indian Army) के सहयोग से शत्रुतापूर्ण मानव रहित हवाई प्रणालियों (unmanned aerial systems - UAVs) का पता लगाने, ट्रैक करने और बेअसर करने (neutralise) के लिए कर्मियों को लैस करने के लिए एक चरणबद्ध काउंटर-ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम (phased counter-drone training programme) की घोषणा की। यह कदम भारत की उत्तरी सीमाओं (northern borders) पर ड्रोन घुसपैठ (drone incursions) की घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिससे उड़ान संचालन बाधित हुआ।

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले औद्योगिक उपक्रमों (industrial undertakings) को सुरक्षा प्रदान करने के लिए संसद के एक अधिनियम (act of Parliament) द्वारा 10 मार्च 1969 को CISF की स्थापना की गई थी। समय के साथ इसके जनादेश (mandate) का विस्तार हवाई अड्डों, बंदरगाहों, मेट्रो रेल नेटवर्क, परमाणु और अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों, ताजमहल (Taj Mahal) जैसे विरासत स्मारकों और प्रमुख सरकारी भवनों को कवर करने के लिए हुआ। बल वीआईपी सुरक्षा (VIP protection), आपदा प्रबंधन (disaster management) और चुनाव ड्यूटी (election duties) भी करता है। 2009 के संशोधनों (amendments) ने CISF को लागत-प्लस आधार (cost-plus basis) पर निजी क्षेत्र के उद्यमों (private sector enterprises) को सुरक्षा प्रदान करने की अनुमति दी। आज इसमें 190,000 से अधिक कर्मी हैं और यह गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के अधीन काम करता है।

हाल की पहल (Recent initiatives)

  • काउंटर-ड्रोन प्रशिक्षण (Counter-drone training): CISF कम ऊंचाई वाले ड्रोन (low-altitude drones) का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के लिए विशिष्ट स्थानों पर एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप (Aviation Security Group) के कर्मियों को प्रशिक्षित कर रहा है। यह कार्यक्रम भारतीय सेना की विशेषज्ञता (Indian Army expertise) पर आधारित है और इसे 2026 के अंत तक CISF कवर के तहत सभी 72 हवाई अड्डों पर लागू किया जाएगा।
  • तकनीकी उन्नयन (Technological upgrades): यात्री स्क्रीनिंग (passenger screening) और खतरे का पता लगाने को बढ़ाने के लिए बल फुल-बॉडी स्कैनर (full-body scanners), उन्नत सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स (advanced CCTV video analytics) और स्वचालित ट्रे रिटर्न सिस्टम (automated tray return systems) अपना रहा है। इन तकनीकों का उद्देश्य अनुचित देरी किए बिना सुरक्षा में सुधार करना है।
  • त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Reaction Teams): आपातकालीन प्रतिक्रिया (emergency response) को मजबूत करने के लिए 49 एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप के लगभग 659 कर्मियों ने कठोर युद्ध टीकाकरण प्रशिक्षण (battle inoculation training) प्राप्त किया है। CISF की सभी हवाईअड्डा इकाइयों को समान प्रशिक्षण मॉड्यूल (training modules) के साथ कवर करने की योजना है।
  • विस्तारित तैनाती (Expanded deployments): गृह मंत्रालय ने हाल ही में बेंगलुरु में राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (National Intelligence Grid - NATGRID) परिसर को सुरक्षित करने के लिए CISF के लिए 76 पदों को मंजूरी दी है। बल ने दिल्ली के राजनयिक एन्क्लेव (diplomatic enclave) में सुषमा स्वराज भवन (Sushma Swaraj Bhawan) की सुरक्षा भी अपने हाथ में ले ली है।

महत्व

बढ़ते ड्रोन घुसपैठ और विकसित होते सुरक्षा खतरों (security threats) के साथ, पारंपरिक निगरानी के तरीके (surveillance methods) अब पर्याप्त नहीं हैं। विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक में निवेश करने से CISF को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (critical infrastructure) की सुरक्षा करने और जनता को आश्वस्त करने में मदद मिलेगी। अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग आपात स्थिति (emergencies) के लिए समन्वित प्रतिक्रियाएं (coordinated responses) सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष

CISF के सक्रिय कदम एक पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा बल से भारत के सबसे संवेदनशील स्थलों की रक्षा करने वाली एक बहुआयामी एजेंसी (multifaceted agency) में इसके परिवर्तन को दर्शाते हैं। काउंटर-ड्रोन रणनीति (counter-drone tactics) और अत्याधुनिक तकनीक (state-of-the-art technology) को अपनाकर, बल नई चुनौतियों को स्वीकार कर रहा है और संभावित खतरों (potential threats) से एक कदम आगे रहने का प्रयास कर रहा है।

स्रोत

The Hindu

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