चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) की बेलरायां रेंज (Belrayan range) में कॉमन ब्रॉन्ज़बैक ट्री स्नेक (Dendrelaphis tristis) को दुर्लभ रूप से देखा गया। रेंजर्स और हर्पेटोलॉजिस्ट (herpetologists) ने गैर-विषैले (non-venomous) पेड़ के सांप का दस्तावेजीकरण किया, जिसने रिजर्व की जैव विविधता पर प्रकाश डाला और कम ज्ञात सरीसृपों (reptiles) के बारे में जागरूकता बढ़ाई।
पृष्ठभूमि
कॉमन ब्रॉन्ज़बैक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक पतला, तेजी से चलने वाला सांप है। सिर बड़ी आंखों के साथ लम्बा और चपटा होता है, और शरीर पीठ के साथ कांस्य रंग की धारी (bronze-coloured stripe) प्रदर्शित करता है। इसका अंडरबॉडी पीला-सफेद (yellowish-white) या हल्का क्रीम (pale cream) रंग का होता है। यह प्रजाति दैनिक (diurnal) और वृक्षीय (arboreal) है, जो अपना अधिकांश समय पेड़ों और झाड़ियों में बिताती है। यह जेकॉस (geckos), छोटे पक्षियों और मेंढकों को खाती है, और पेड़ के खोखले में अंडे देकर प्रजनन करती है।
आकारिकी और पारिस्थितिकी (Morphology and Ecology)
- दिखावट (Appearance) - वयस्क लंबाई में 1.5 मीटर तक पहुंच सकते हैं। पृष्ठीय सतह (dorsal surface) एक धातु कांस्य बैंड के साथ भूरे-भूरे रंग (grey-brown) की होती है; पतली पूंछ तेजी से पतली हो जाती है।
- वितरण (Distribution) - यह सांप श्रीलंका से लेकर भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और पाकिस्तान में पाया जाता है, जिसके रिकॉर्ड दक्षिण पूर्व एशिया तक फैले हुए हैं। यह शुष्क और नम जंगलों, बगीचों और वृक्षारोपणों में रहता है, और मानव-परिवर्तित परिदृश्यों (human-altered landscapes) के अनुकूल है।
- व्यवहार (Behaviour) - यह प्रजाति गैर-विषैली है और मनुष्यों के लिए बहुत कम खतरा पैदा करती है। यह दिन के दौरान सक्रिय होता है, शिकारियों से बचने के लिए अपनी चपलता का उपयोग करता है। मादाएं सितंबर और फरवरी के बीच 6-7 अंडे देती हैं।
- संरक्षण की स्थिति (Conservation status) - इसके व्यापक वितरण और स्थिर आबादी के कारण IUCN द्वारा "सबसे कम चिंता (Least Concern)" के रूप में वर्गीकृत किया गया है। हालांकि, आवास की हानि और गलत पहचान के कारण हत्याएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के संदर्भ में
उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य और कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। भारत-नेपाल सीमा पर 1,284 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में फैले इस रिजर्व में साल के जंगलों (sal forests), घास के मैदानों और आर्द्रभूमियों (wetlands) का एक मोज़ेक है। बाघों के अलावा, रिजर्व तेंदुए, एशियाई काले भालू, दलदली हिरण, एक सींग वाले गैंडे और समृद्ध पक्षी विविधता का समर्थन करता है। ब्रॉन्ज़बैक को देखा जाना रिजर्व के भीतर जंगली गलियारों की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।
निष्कर्ष
दुधवा में कॉमन ब्रॉन्ज़बैक का दुर्लभ दस्तावेजीकरण भारत के संरक्षित क्षेत्रों की छिपी हुई जैव विविधता पर प्रकाश डालता है। कृंतक (rodent) और कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में गैर-विषैले सांप महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सार्वजनिक जागरूकता अभियानों से स्थानीय समुदायों को हानिरहित सांपों को मारने से बचने के लिए शिक्षित करना चाहिए। वन कनेक्टिविटी बनाए रखना और आवास क्षरण (habitat degradation) को कम करना यह सुनिश्चित करेगा कि ब्रॉन्ज़बैक जैसे वृक्षीय सरीसृप (arboreal reptiles) पनपते रहें।