कला एवं संस्कृति

Daishō-in Temple: मियाजिमा द्वीप बौद्ध मंदिर में आग

Daishō-in Temple: मियाजिमा द्वीप बौद्ध मंदिर में आग

खबरों में क्यों?

21 मई 2026 को हिरोशिमा (Hiroshima) के पास मियाजिमा द्वीप (Miyajima Island) पर एक बौद्ध मंदिर, दाइशो-इन (Daishō-in) में रेकाडो हॉल (Reikado Hall) आग से नष्ट हो गया। लकड़ी के इस हॉल में एक शाश्वत ज्वाला (eternal flame) थी जो नौवीं शताब्दी की शुरुआत में मंदिर की स्थापना के बाद से जल रही थी। सौभाग्य से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन यह आग जापानी मंदिरों और तीर्थस्थलों को प्रभावित करने वाली आग की एक श्रृंखला (series of fires) में नवीनतम थी।

दाइशो-इन की पृष्ठभूमि (Background on Daishō-in)

दाइशो-इन हिरोशिमा प्रान्त में मियाजिमा (जिसे इत्सुकुशिमा - Itsukushima भी कहा जाता है) पर माउंट मिसेन (Mount Misen) के कुछ हिस्से में स्थित एक ऐतिहासिक शिंगोन बौद्ध मंदिर (Shingon Buddhist temple) है। मंदिर की स्थापना 806 ईस्वी में भिक्षु कुकाई (Kūkai) द्वारा की गई थी, जिन्हें कोबो डाइशी (Kōbō Daishi) के नाम से भी जाना जाता है, जिन्होंने जापान में शिंगोन बौद्ध धर्म (Shingon Buddhism) की शुरुआत की थी। सदियों तक दाइशो-इन ने पास के इत्सुकुशिमा श्राइन (Itsukushima Shrine) के लिए प्रशासनिक मंदिर के रूप में कार्य किया और सम्राटों और समुराई (samurai) द्वारा संरक्षित किया गया था। इसके मैदान में विभिन्न बोधिसत्वों (bodhisattvas) और गूढ़ अनुष्ठानों (esoteric rituals) को समर्पित कई हॉल, मूर्तियाँ और गुफाएँ हैं।

रेकाडो हॉल और शाश्वत ज्वाला

  • ऐतिहासिक ज्वाला (Historical flame): रेकाडो ("आध्यात्मिक ज्वाला का हॉल" - "Hall of Spiritual Flame") ने एक ऐसी आग की रक्षा की जिसे 806 में स्वयं कुकाई (Kūkai) द्वारा जलाया गया था। किंवदंती है कि यह लौ बारह सदियों से लगातार जल रही है और इसका उपयोग हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क (Peace Memorial Park) में शांति ज्वाला (Peace Flame) को प्रज्वलित करने के लिए किया गया था।
  • पिछली आग (Previous fire): ज्वाला को रखने वाला एक पुराना हॉल 2005 में आग से नष्ट हो गया था। इसे आधुनिक सामग्री और आग से बचाव के उपायों (fire prevention measures) को शामिल करने के लिए फिर से बनाया गया था, फिर भी 2026 की आग ने एक बार फिर संरचना को नष्ट कर दिया।
  • नुकसान और प्रतिक्रिया (Loss and response): अधिकारियों ने हाल की आग के दौरान पवित्र ज्वाला (sacred flame) को सुरक्षित निकाल लिया और हॉल के पुनर्निर्माण (reconstruct) की कसम खाई। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच (Investigations) चल रही है। संरक्षणवादी (Preservationists) लकड़ी के विरासत स्थलों (wooden heritage sites) पर बेहतर अग्नि सुरक्षा (fire safety) की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

इत्सुकुशिमा तीर्थ और मियाजिमा (Itsukushima Shrine and Miyajima)

दाइशो-इन प्रसिद्ध इत्सुकुशिमा श्राइन (Itsukushima Shrine) के पास स्थित है, जो समुद्र की देवी (sea goddesses) को समर्पित एक शिंतो (Shinto) परिसर है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे नाविकों की रक्षा करती हैं। तीर्थस्थल का प्रतिष्ठित सिंदूर तोरी गेट (vermilion torii gate) उच्च ज्वार (high tide) पर समुद्र पर तैरता हुआ दिखाई देता है। वर्तमान गेट 1875 का है, लेकिन कम से कम 1168 से साइट पर तोरी (torii) खड़ा है, जब योद्धा तायरा नो कियोमोरी (Taira no Kiyomori) ने ज्वारीय फ्लैटों (tidal flats) पर एक सुरुचिपूर्ण महल शैली (shinden-zukuri) में मंदिर का पुनर्निर्माण किया था। चूंकि द्वीप अपने आप में पवित्र (sacred) है, इसलिए पानी के ऊपर खंभों (stilts) पर संरचनाएं बनाई जाती हैं, जिससे तीर्थयात्रियों को पवित्र भूमि पर कदम रखे बिना नाव से आने की अनुमति मिलती है।

महत्व

  • रेकाडो हॉल (Reikado Hall) में लगी आग बौद्ध धर्म (Buddhism) और जापानी विरासत (Japanese heritage) दोनों के लिए एक सांस्कृतिक नुकसान का प्रतिनिधित्व करती है। शाश्वत ज्वाला (eternal flame) दृढ़ता (perseverance) और शांति (peace) का प्रतीक है, जो मियाजिमा (Miyajima) को हिरोशिमा (Hiroshima) के पीस मेमोरियल (Peace Memorial) से जोड़ती है।
  • लकड़ी के धार्मिक स्थलों पर बार-बार लगने वाली आग पारंपरिक वास्तुकला की भेद्यता (vulnerability) और उन्नत संरक्षण उपायों (conservation measures) की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
  • दाइशो-इन (Daishō-in) और इत्सुकुशिमा श्राइन (Itsukushima Shrine) के इतिहास को समझना क्षेत्र के धार्मिक समकालिकता (religious syncretism) के लिए संदर्भ प्रदान करता है, जहां बौद्ध और शिंतो परंपराएं (Shinto traditions) सह-अस्तित्व में हैं।

निष्कर्ष

यद्यपि रेकाडो हॉल का नुकसान दुखद है, स्थानीय अधिकारियों ने पवित्र ज्वाला के पुनर्निर्माण और संरक्षण का संकल्प लिया है। यह घटना सदियों पुरानी लकड़ी की संरचनाओं को बनाए रखने और उन्हें आग जैसे आधुनिक खतरों (modern hazards) से बचाने के बीच नाजुक संतुलन (delicate balance) की ओर ध्यान आकर्षित करती है। मियाजिमा आने वाले आगंतुक द्वीप की आध्यात्मिक विरासत के लचीलेपन और सांस्कृतिक संरक्षण में इसके द्वारा दिए गए सबक दोनों की सराहना कर सकते हैं।

स्रोत

The Guardian

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources How to prepare for UPSC Prepare with a job Free downloads Books & NCERTs Previous year papers Video notes YouTube channel