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Energy Transition Index 2026: भारत का 70वां स्थान और WEF रिपोर्ट

Energy Transition Index 2026: भारत का 70वां स्थान और WEF रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के ऊर्जा संक्रमण सूचकांक (Energy Transition Index - ETI) 2026 ने 120 देशों में से भारत को 70वां स्थान दिया। भारत पिछले वर्ष से दो स्थान ऊपर आ गया और ऊर्जा संक्रमण तत्परता (energy transition readiness) में सबसे मजबूत सुधार करने वालों में से था।

पृष्ठभूमि

विश्व आर्थिक मंच और एक्सेंचर (Accenture) द्वारा निर्मित ETI, देशों को उनकी ऊर्जा प्रणालियों के प्रदर्शन और स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती ऊर्जा (affordable energy) में परिवर्तन के लिए उनकी तत्परता पर आंकता है। यह ऊर्जा की पहुंच (energy access) और सुरक्षा (security), पर्यावरणीय स्थिरता (environmental sustainability), पूंजी और निवेश (capital and investment), विनियमन (regulation), मानव पूंजी (human capital) और नवाचार (innovation) की जांच करता है। सूचकांक 2018 से प्रतिवर्ष प्रकाशित किया गया है और नीति निर्माताओं के लिए एक बेंचमार्किंग टूल (benchmarking tool) के रूप में कार्य करता है।

ETI 2026 के वैश्विक मुख्य आकर्षण

  • धीमी प्रगति: 2026 की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और आर्थिक अनिश्चितता (economic uncertainty) ने ऊर्जा संक्रमण की गति को धीमा कर दिया है। क्षेत्रों (regions) में प्रगति खंडित (fragmenting) हो रही है।
  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले: स्वीडन (Sweden), फिनलैंड (Finland) और डेनमार्क (Denmark) ने नवीकरणीय ऊर्जा (renewables) के उच्च शेयरों, कुशल ग्रिड (efficient grids) और मजबूत नीति समर्थन (policy support) के कारण शीर्ष तीन स्थान बरकरार रखे।
  • उभरती अर्थव्यवस्थाएँ: भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए। भारत बुनियादी ढांचे, ऊर्जा पहुंच और स्थिरता में लाभ को दर्शाते हुए 70वें स्थान पर पहुंच गया। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा नौकरियों (renewable energy jobs) की संख्या 24% बढ़कर 1.3 मिलियन हो गई और एक राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (national green hydrogen mission) शुरू किया गया।
  • सुरक्षा और लचीलापन (Security and resilience): रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे चोकपॉइंट्स (chokepoints) के माध्यम से आपूर्ति व्यवधान (supply disruptions) ने ऊर्जा सुरक्षा के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह देशों से अपनी ऊर्जा प्रणालियों में लचीलापन (resilience) लाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) में विविधता लाने और ग्रिड आधुनिकीकरण (grid modernisation) में निवेश करने का आग्रह करता है।
  • सिफारिशें: संक्रमण (transition) में तेजी लाने के लिए, रिपोर्ट में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (clean technologies) में अधिक निवेश, ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) और कार्बन कैप्चर (carbon capture) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए सहायक नीतियों (supportive policies), और ऊर्जा पहुंच में सामाजिक इक्विटी (social equity) को संबोधित करने के उपायों का आह्वान किया गया है।

निष्कर्ष

ऊर्जा संक्रमण सूचकांक (Energy Transition Index) में भारत की वृद्धि इसकी बढ़ती नवीकरणीय क्षमता (renewable capacity) और नीतिगत पहल (policy initiatives) को दर्शाती है। हालांकि, एक त्वरित और न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण (just energy transition) के लिए निरंतर निवेश (sustained investment), लचीले ग्रिड और समावेशी नीतियों (inclusive policies) की आवश्यकता है।

स्रोत

TI

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