भूगोल

Euphrates River: टाइग्रिस बेसिन, पानी की कमी और मेसोपोटामिया

Euphrates River: टाइग्रिस बेसिन, पानी की कमी और मेसोपोटामिया

चर्चा में क्यों?

पर्यावरण रिपोर्टों से चेतावनी मिली है कि यूफ्रेट्स नदी (Euphrates River), जो कभी मेसोपोटामिया की सभ्यता (Mesopotamian civilisation) की जीवन रेखा थी, तेजी से सिकुड़ रही है। सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि 2000 के दशक की शुरुआत से टाइग्रिस-यूफ्रेट्स बेसिन (Tigris–Euphrates basin) ने एक सौ क्यूबिक किलोमीटर से अधिक मीठा पानी (freshwater) खो दिया है, और प्रवाह दरें (flow rates) आधे से अधिक गिर गई हैं। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो 2040 तक नदी के हिस्से सूख सकते हैं। इस गिरावट ने पश्चिम एशिया में पानी की कमी (water scarcity) और क्षेत्रीय स्थिरता (regional stability) के बारे में चिंताओं को जन्म दिया है।

पृष्ठभूमि

यूफ्रेट्स मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक, सीरिया और तुर्की) की दो महान नदियों में से एक है। पूर्वी तुर्की के पहाड़ों से निकलकर, यह टाइग्रिस (Tigris) में शामिल होने और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में खाली होने से पहले सीरिया और इराक के माध्यम से लगभग 2,800 किलोमीटर बहती है। इसके उपजाऊ बाढ़ के मैदानों (fertile floodplains) ने दुनिया के कुछ शुरुआती शहरों और साम्राज्यों का पोषण किया। पिछले कुछ दशकों में कई कारकों के संयोजन के कारण नदी का प्रवाह कम हो गया है: जलवायु परिवर्तन से वर्षा और बर्फ पिघलने (snowmelt) में कमी, भूजल का अत्यधिक निष्कर्षण (over-extraction of groundwater), और तुर्की में अपस्ट्रीम (upstream) बड़े बांधों का निर्माण जो अनुप्रवाह (downstream) देशों तक पहुंचने वाले पानी को नियंत्रित करते हैं।

प्रमुख चिंताएं

  • जलवायु परिवर्तन (Climate change): बढ़ते तापमान ने वाष्पीकरण (evaporation) बढ़ा दिया है और वृषभ पर्वत (Taurus Mountains) में बर्फबारी कम कर दी है, जिससे नदी में प्रवेश करने वाले पानी की मात्रा कम हो गई है।
  • बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (Infrastructure projects): अतातुर्क (Atatürk) और इलिसु (Ilısu) बांधों सहित तुर्की की बड़ी बांध परियोजनाओं ने जलाशय (reservoirs) बनाए हैं, लेकिन सीरिया और इराक में डाउनस्ट्रीम प्रवाह को कम करते हैं। ये देश कृषि और पीने के लिए अपर्याप्त पानी की शिकायत करते हैं।
  • भूजल की कमी (Groundwater depletion): यूफ्रेट्स बेसिन के किनारे किसान कम नदी प्रवाह की भरपाई के लिए भूजल निकालते हैं, जो जल स्तर (water table) को और कम करता है और सूखे (drought) को बढ़ाता है।
  • संभावित सामाजिक अशांति (Potential social unrest): कम पानी तटवर्ती राज्यों (riparian states) के बीच तनाव बढ़ा सकता है और पहले से ही नाजुक क्षेत्रों में प्रवासन (migration) और मानवीय संकटों (humanitarian crises) में योगदान दे सकता है।

निष्कर्ष

यूफ्रेट्स की रक्षा के लिए तुर्की, सीरिया और इराक के बीच सहकारी जल प्रबंधन (cooperative water management) और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन (adaptation) की आवश्यकता है। क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) के लिए इस ऐतिहासिक नदी का संरक्षण आवश्यक है।

स्रोत

India Today

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