रक्षा

ड्रोन के लिए जर्मेनियम मुक्त थर्मल इमेजिंग पेलोड: रक्षा

ड्रोन के लिए जर्मेनियम मुक्त थर्मल इमेजिंग पेलोड: रक्षा

समाचार में क्यों?

एक भारतीय स्टार्ट-अप, इयोन स्पेसलाब्स (Eon Spacelabs) ने ड्रोन के लिए एक हल्के वजन वाले थर्मल इमेजिंग पेलोड Lumira_E40I50 का अनावरण किया। यह प्रणाली महंगे और दुर्लभ जर्मेनियम लेंस (germanium lenses) को चाल्कोजेनाइड ग्लास (chalcogenide glass) से बदल देती है और लंबी दूरी पर लोगों और वाहनों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence - AI) का उपयोग करती है। इसे रक्षा और आपदा प्रबंधन अनुप्रयोगों के लिए भारत की पहली स्वदेशी जर्मेनियम-मुक्त थर्मल इमेजिंग प्रणाली के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

जर्मेनियम एक भंगुर, भूरे रंग की धातु है जो प्रकृति में स्वतंत्र रूप से नहीं पाई जाती है। इसे मुख्य रूप से जस्ता (zinc) और कोयला (coal) प्रसंस्करण के उप-उत्पाद (by-product) के रूप में निकाला जाता है। जर्मेनियम और इसके ऑक्साइड दोनों ऊष्मा विकिरण (heat radiation) को प्रसारित करते हैं और नाइट-विज़न उपकरणों, थर्मल कैमरों और फाइबर ऑप्टिक्स के लिए इन्फ्रारेड ऑप्टिक्स में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। दुनिया की अधिकांश आपूर्ति चीन से आती है। हाल के वर्षों में वैश्विक कीमतें बढ़ी हैं और निर्यात प्रतिबंधों ने आपूर्ति को अनिश्चित बना दिया है। चाल्कोजेनाइड ग्लास, सल्फर या सेलेनियम युक्त ग्लास का एक वर्ग, लंबी-तरंग इन्फ्रारेड विकिरण (long-wave infrared radiation) को भी प्रसारित कर सकता है और निर्माण में सस्ता है।

मुख्य बिंदु

  • स्वदेशी तकनीक: Lumira का ऑप्टिकल सिस्टम जर्मेनियम के बजाय चाल्कोजेनाइड ग्लास से बना है। यह बदलाव आयातित जर्मेनियम पर निर्भरता को कम करता है और लागत कम करता है।
  • ए-थर्मल डिजाइन (A-thermal design): पेलोड में एक ए-थर्मलाइज्ड (a-thermalised) लेंस असेंबली होती है जो तापमान भिन्न होने पर भी फोकस में रहती है। यह मैनुअल रीफोकसिंग के बिना स्पष्ट छवियों की अनुमति देता है।
  • AI-आधारित पहचान: डिवाइस एक उच्च-ज़ूम (high-zoom) दृश्यमान कैमरे और लंबी-तरंग इन्फ्रारेड सेंसर (long-wave infrared sensors) को जोड़ती है। एज-आधारित एआई एल्गोरिदम (Edge-based AI algorithms) स्थानिक (spatial) और लौकिक (temporal) पैटर्न का विश्लेषण करते हैं, इसलिए सिस्टम एक मानव शरीर को गर्म चट्टानों से अलग कर सकता है और लोगों को लगभग दो किलोमीटर दूर और वाहनों को आठ किलोमीटर तक देख सकता है।
  • हल्का वजन: विभिन्न मॉडलों का वजन 800 ग्राम और 2.2 किलोग्राम के बीच होता है और इन्हें छोटे ड्रोन पर लगाया जा सकता है। यह प्रणाली निगरानी (surveillance), खोज-और-बचाव (search-and-rescue), सीमा गश्त और औद्योगिक निरीक्षण के लिए उपयुक्त बनाती है।
  • रणनीतिक महत्व: वैश्विक जर्मेनियम उत्पादन पर चीन के हावी होने के साथ, एक जर्मेनियम-मुक्त ऑप्टिकल पेलोड विकसित करने से भारत को आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों को कम करने में मदद मिलती है और रक्षा आत्मनिर्भरता (defence self-reliance) के लिए सरकार के जोर का समर्थन करता है।

महत्व

नया पेलोड दर्शाता है कि भारत का निजी क्षेत्र उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीक (electro-optical technologies) विकसित कर सकता है। चाल्कोजेनाइड ग्लास और परिष्कृत AI का उपयोग करके, सिस्टम महत्वपूर्ण आयातों पर निर्भरता कम करते हुए सैन्य-ग्रेड क्षमताएं प्रदान करता है। नवाचार को अग्निशमन (firefighting), आपदा राहत (disaster relief), वन्यजीव निगरानी (wildlife monitoring) और औद्योगिक सुरक्षा (industrial safety) जैसे नागरिक उपयोगों के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है, जो पारंपरिक जर्मेनियम-आधारित प्रकाशिकी का एक स्थायी विकल्प प्रदान करता है।

स्रोत: BT

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