विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

GPS Spoofing: विमानन जोखिम, झूठे संकेत और नेविगेशन

GPS Spoofing: विमानन जोखिम, झूठे संकेत और नेविगेशन

चर्चा में क्यों?

संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के पास उड़ान भरने वाले विमानों को झूठे जीपीएस (GPS) संकेत मिलने की खबरें सामने आई हैं, जिससे भ्रम और संभावित सुरक्षा खतरे पैदा हो गए हैं। विमानन अधिकारियों का कहना है कि ये घटनाएं जीपीएस स्पूफिंग (GPS spoofing) - उपग्रह नेविगेशन डेटा (satellite navigation data) में जानबूझकर हेरफेर - के एक व्यापक रुझान का हिस्सा हैं जो संघर्ष क्षेत्रों में अधिक आम हो गया है।

पृष्ठभूमि

जीपीएस स्पूफिंग, जिसे कभी-कभी जीपीएस सिमुलेशन (GPS simulation) कहा जाता है, में नकली उपग्रह संकेतों का प्रसारण (broadcasting) शामिल होता है जो वैध जीपीएस संकेतों को ओवरराइड करते हैं। जबकि जीपीएस जैमिंग (GPS jamming) बस संकेतों को अवरुद्ध करता है, स्पूफिंग रिसीवर को झूठे स्थान, ऊंचाई, समय और गति डेटा फीड करता है। क्योंकि वास्तविक उपग्रह संकेत पृथ्वी तक पहुंचने तक कमजोर होते हैं, मजबूत नकली संकेत नेविगेशन सिस्टम को एक गलत स्थिति की गणना करने में धोखा दे सकते हैं। इसका उद्देश्य लक्ष्य को गुमराह करना है, जिससे वह यह महसूस किए बिना गलत जानकारी पर कार्य कर सके कि स्पूफिंग हमला चल रहा है।

हाल की घटनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और अन्य विवादित हवाई क्षेत्रों के पास हुई हैं। विमान नेविगेशन कंप्यूटरों ने झूठे वेपॉइंट (waypoints) और ऊंचाई (altitudes) प्रदर्शित किए, जिससे पायलटों को बैकअप सिस्टम और हवाई यातायात नियंत्रण (air traffic control) मार्गदर्शन पर भरोसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। काला सागर (Black Sea) क्षेत्र और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी जीपीएस स्पूफिंग की सूचना मिली है।

स्पूफिंग कैसे काम करती है

  • सिग्नल जेनरेशन: हमलावर नकली जीपीएस सिग्नल उत्पन्न करने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग करते हैं जो प्रामाणिक (authentic) संकेतों की नकल करते हैं लेकिन जानबूझकर परिवर्तित स्थान और समय डेटा ले जाते हैं।
  • रिसीवर टेकओवर: स्पूफ किए गए सिग्नल वास्तविक सिग्नल की तुलना में अधिक शक्ति पर प्रेषित होते हैं, जिससे रिसीवर नकली प्रसारण पर लॉक हो जाता है।
  • झूठा नेविगेशन: एक बार जब रिसीवर स्पूफ किए गए संकेतों को स्वीकार कर लेता है, तो यह नकली डेटा के आधार पर अपनी स्थिति की गणना करता है, जिससे गलत नेविगेशन संकेत मिलते हैं।
  • लक्ष्य: उपग्रह नेविगेशन का उपयोग करने वाले विमान, जहाज और यहां तक ​​कि जमीनी वाहन भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे स्पूफिंग परिवहन और सैन्य अभियानों को बाधित करने का एक उपकरण बन जाता है।

विमानन विशेषज्ञ मजबूत एंटी-स्पूफिंग उपायों (anti-spoofing measures) की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जिसमें उपग्रह संकेतों का एन्क्रिप्शन (encryption), सिग्नल शक्ति विसंगतियों की निगरानी करना और पायलटों को स्पूफिंग घटनाओं को पहचानने और उनका जवाब देने के लिए प्रशिक्षित करना शामिल है। इस उभरते खतरे से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (electronic warfare) और नेविगेशन सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते भी आवश्यक हो सकते हैं।

स्रोत: India Today

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