चर्चा में क्यों?
असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) के अधिकारियों ने ग्रेटर हॉग बेजर का अपना पहला वैज्ञानिक मूल्यांकन (scientific assessment) जारी किया। कैमरा ट्रैप (camera traps) का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि काजीरंगा में कम से कम पचपन हॉग बेजर निवास करते हैं। सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध प्रजातियों के लिए यह एक उत्साहजनक संकेत है।
पृष्ठभूमि
ग्रेटर हॉग बेजर (Arctonyx collaris) नेवला (weasel) परिवार के सबसे बड़े सदस्यों में से एक है। इसकी बनावट गठीली, बाल भूरे रंग के, गला सफेद और सफेद चेहरे पर दो काली धारियां होती हैं। सुअर जैसा गुलाबी थूथन (snout) और मजबूत पंजे इसे भोजन के लिए मिट्टी खोदने में मदद करते हैं। वयस्क लगभग 55-70 सेंटीमीटर मापते हैं और इनका वजन 7-14 किलोग्राम होता है।
हॉग बेजर पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, इंडोचीन और दक्षिणी चीन के जंगलों और घास के मैदानों में पाए जाते हैं। ये सर्वाहारी (omnivores) हैं जो केंचुए (earthworms), कीड़े, फल और छोटे कशेरुकियों (vertebrates) को खाते हैं। वे दिन और रात दोनों समय सक्रिय रहते हैं और अपना अधिकांश समय खुदाई में बिताते हैं। शिकार और आवास के नुकसान के कारण इनकी आबादी में गिरावट आई है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature - IUCN) ने प्रजातियों को सुभेद्य (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया है। भारत में यह प्रजाति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम [Wildlife (Protection) Act] की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
मुख्य बिंदु
- कैमरा-ट्रैप अध्ययन ने काजीरंगा में कम से कम पचपन हॉग बेजर को रिकॉर्ड किया, जो एक व्यवहार्य आबादी (viable population) का सुझाव देता है।
- हॉग बेजर मिट्टी को पलटकर और चारा खोजने के माध्यम से बीजों को फैलाकर पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं।
- वे एकान्त जानवर (solitary animals) हैं और जमीन में बिलों (burrows) पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे उन्हें देखना मुश्किल हो जाता है।
- अवैध शिकार और निवास स्थान विखंडन (habitat fragmentation) खतरे बने हुए हैं, इसलिए निरंतर निगरानी और संरक्षण महत्वपूर्ण हैं।
- काजीरंगा की रिपोर्ट गुप्त वन्यजीवों (secretive wildlife) के अध्ययन के लिए कैमरा-ट्रैप सर्वेक्षणों के महत्व को रेखांकित करती है।
निष्कर्ष
काजीरंगा में हॉग बेजर की स्वस्थ आबादी की खोज एक सकारात्मक संरक्षण कहानी है। उनके वन आवासों की रक्षा करने और शिकार पर अंकुश लगाने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि यह कम ज्ञात प्रजाति फलती-फूलती रहे।