पर्यावरण

Himalayan Pangolin: अलग प्रजाति, DNA पुष्टि और खतरे

Himalayan Pangolin: अलग प्रजाति, DNA पुष्टि और खतरे
Study next

Convert reading into recall

Read once, then use one quick app action while the topic is fresh. Links open in a new tab.

1 Start True/False practice 2-min recall check Open
Read for
Exam hook Prelims fact Mains angle
Other useful actions
N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs

समाचार में क्यों?

वैज्ञानिकों ने हाल ही में ऐतिहासिक DNA और आधुनिक जीनोमिक उपकरणों का उपयोग करके पुष्टि की है कि Himalayan pangolin (Manis aurita) एक अलग प्रजाति है, न कि Chinese pangolin की एक उप-प्रजाति। ये निष्कर्ष जुलाई 2026 की शुरुआत में प्रकाशित हुए थे, जिसके बाद इस दुर्लभ स्तनपायी जीव के लिए कानूनी सुरक्षा मजबूत करने की मांग की गई है।

पृष्ठभूमि

Pangolin शर्मीले, शल्क वाले स्तनपायी जीव हैं जिनका उनके मांस और शल्कों के लिए शिकार किया जाता है। दशकों तक, शोधकर्ताओं का मानना था कि Himalayan pangolin केवल Chinese pangolin का एक उच्च ऊंचाई वाला रूप है। 2023 में, वैज्ञानिकों ने नेपाल में एकत्र किए गए 19वीं सदी के एक नमूने से DNA निकाला और आधुनिक जानवरों के नमूनों से इसकी तुलना की। उनके विश्लेषण से पता चला कि Himalayan pangolin लगभग 1.8 मिलियन वर्ष पहले Pleistocene जलवायु उतार-चढ़ाव के दौरान Chinese pangolin से अलग हुआ था। 14वीं शताब्दी के Little Ice Age के दौरान इस प्रजाति ने जनसंख्या की भारी कमी का सामना किया, जिससे वर्तमान जनसंख्या छोटी और खंडित हो गई है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • रूपात्मक अंतर: Himalayan pangolin का शरीर और पूंछ लंबी होती है (औसतन लगभग 95 cm), जबकि Chinese pangolin 71 cm का होता है। इसकी खोपड़ी भी बड़ी, कान छोटे और नाक की हड्डियां चौड़ी होती हैं।
  • सीमित दायरा: इसका प्राकृतिक आवास नेपाल, दक्षिण-पूर्वी तिब्बत और पूर्वोत्तर भारत में दक्षिणी हिमालय की तलहटी है। इसका क्षेत्र Chinese pangolin के क्षेत्र से ओवरलैप नहीं करता है।
  • जीनोमिक विशिष्टता: DNA मार्कर बताते हैं कि दोनों प्रजातियां लगभग 1.8 मिलियन वर्ष पहले अलग हुई थीं। जलवायु में उतार-चढ़ाव ने उन्हें प्रजनन करने से रोक दिया।
  • संरक्षण स्थिति: अवैध वन्यजीव व्यापार सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। छोटी आबादी के भीतर इनब्रीडिंग (inbreeding) से प्रजाति को और खतरा है, जिससे वैज्ञानिक इसे Convention on International Trade in Endangered Species (CITES) के Appendix I के तहत सूचीबद्ध करने का आग्रह कर रहे हैं।

महत्व

यह पुनर्मूल्यांकन संरक्षणवादियों को pangolin शल्कों की तस्करी की उचित निगरानी करने में मदद करता है, क्योंकि फोरेंसिक DNA अब यह पहचान कर सकता है कि जब्त की गई सामग्री Himalayan या Chinese प्रजाति की है। Himalayan pangolin को एक अलग प्रजाति के रूप में मान्यता देने से संवेदनशील हिमालयी तलहटी में आवास सुरक्षा के लिए लक्षित धन भी आकर्षित हो सकता है।

निष्कर्ष

यह खोज इस बात को रेखांकित करती है कि आधुनिक जीनोमिक्स लंबे समय से चली आ रही टैक्सोनोमिक पहेलियों को कैसे सुलझा सकता है। Himalayan pangolin की रक्षा के लिए शिकार, आवास संरक्षण और अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्यान्वयन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी।

स्रोत

Down To Earth

Finished reading?

Do one recall action now

Practice first while the topic is fresh. Save the key points or use Shorts when you want a quick recap.

1 Start True/False practice 2-min recall check N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs
Home Current Affairs 📰 Daily News 🎬 Watch Shorts 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Sign In / Open Web App