समाचार में क्यों?
छत्तीसगढ़ के Udanti Sitanadi Tiger Reserve में वन रक्षकों (Forest guards) ने हाल ही में एक Himalayan Tricarinate Hill Turtle की तस्वीर खींची, जो हिमालय की तलहटी (Himalayan foothills) के बाहर शायद ही कभी प्रलेखित प्रजाति (rarely documented species) है। यह नज़ारा बताता है कि संरक्षण के प्रयास (conservation efforts) और स्वस्थ सूक्ष्म-आवास (healthy microhabitats) मध्य भारत में असामान्य वन्यजीवों को बनाए रखने की अनुमति दे रहे हैं。
पृष्ठभूमि
Himalayan Tricarinate Hill Turtle (Melanochelys tricarinata) एक छोटा मीठे पानी का कछुआ है जिसका नाम इसके कारपेस (carapace - ऊपरी खोल) पर तीन उभरी हुई लकीरों (ridges - carinae) के लिए रखा गया है। यह भारत (जिसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्से शामिल हैं), बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में हिमालय की तलहटी के किनारे नम पर्णपाती और सदाबहार जंगलों (moist deciduous and evergreen forests) में पाया जाता है। यह प्रजाति शर्मीली है, जो अक्सर नदियों और दलदलों (marshes) के पास पत्तियों के कचरे (leaf litter) के नीचे छिप जाती है। इसकी सीमित सीमा और आवास विनाश तथा अवैध पालतू व्यापार (illegal pet trade) से खतरों के कारण, इसे IUCN Red List में "Endangered" (संकटग्रस्त) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है。
मुख्य विशेषताएं
- स्वरूप (Appearance): तीन अलग-अलग अनुदैर्ध्य लकीरों (longitudinal ridges) के साथ एक भूरा या जैतून (olive) कारपेस (carapace); प्लास्ट्रॉन (plastron - पेट का खोल) गहरे रंग के निशानों के साथ पीलापन लिए हुए होता है।
- आकार (Size): वयस्क आमतौर पर 16–25 centimetres लंबे होते हैं।
- आवास (Habitat): वनाच्छादित क्षेत्रों में धीमी गति से बहने वाली धाराओं, धान के खेतों और दलदलों को पसंद करते हैं। मानसून के दौरान जब खेतों में बाढ़ आ जाती है तो यह ज़मीन पर ही रहता है।
- व्यवहार (Behaviour): निशाचर (Nocturnal) और गुप्त (secretive); कीड़ों, मोलस्क (molluscs), छोटे मेंढकों और पौधों की सामग्री को खाता है।
- खतरे (Threats): कृषि के लिए आर्द्रभूमि (wetlands) का नुकसान, नदियों का प्रदूषण और पालतू व्यापार के लिए संग्रह।
देखे जाने का महत्व (Significance of the sighting)
Udanti Sitanadi Tiger Reserve से यह रिकॉर्ड इस कछुए के ज्ञात वितरण (known distribution) का विस्तार करता है और इंगित करता है कि मध्य भारत में संरक्षित क्षेत्रों में अभी भी उपयुक्त आवास मौजूद हैं। ऐसे अवलोकन कम ज्ञात प्रजातियों (lesser‑known species) की सुरक्षा में अवैध शिकार विरोधी गश्त (anti‑poaching patrols), आवास बहाली (habitat restoration) और जागरूकता अभियानों (awareness campaigns) के महत्व को रेखांकित करते हैं。