Environment

Hindon River Pollution: शून्य घुलित ऑक्सीजन, यमुना की सहायक नदी और अपशिष्ट

Hindon River Pollution: शून्य घुलित ऑक्सीजन, यमुना की सहायक नदी और अपशिष्ट

चर्चा में क्यों?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंडन नदी (Hindon River) के हालिया सर्वेक्षण में कई स्थलों पर घुलित ऑक्सीजन (dissolved oxygen) शून्य बताई गई है, जो यह दर्शाता है कि पानी अधिकांश जलीय जीवन (aquatic life) का समर्थन करने में असमर्थ है। ये निष्कर्ष नदी में गंभीर प्रदूषण को उजागर करते हैं, जो अंततः यमुना (Yamuna) में मिल जाती है।

पृष्ठभूमि

हिंडन नदी यमुना की एक वर्षा-पोषित सहायक नदी (rain‑fed tributary) है। यह सहारनपुर जिले की शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik hills) से निकलती है और नोएडा के पास यमुना में विलीन होने से पहले उत्तर प्रदेश और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों (industrial belts) से होकर लगभग 400 किमी की यात्रा करती है। ऐतिहासिक रूप से नदी ने कृषि और वन्यजीवों का समर्थन किया था और यहां हड़प्पा सभ्यता के पुरातात्विक स्थल भी मौजूद हैं। हालांकि, तीव्र शहरीकरण और औद्योगीकरण ने इसे गंगा बेसिन में सबसे प्रदूषित नदियों में से एक बना दिया है।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष

  • शून्य घुलित ऑक्सीजन (Zero dissolved oxygen - DO): सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के औद्योगिक क्षेत्रों के पास एकत्र किए गए नमूनों में pH स्तर 7.5 के आसपास और कुल घुलित ठोस पदार्थ अधिक दर्ज किए गए, लेकिन कोई घुलित ऑक्सीजन नहीं थी। एक स्वस्थ नदी में जलीय जीवन को बनाए रखने के लिए आमतौर पर कम से कम 5 mg/L DO स्तर होता है।
  • स्रोत से तुलना: शिवालिक पहाड़ियों में नदी के उद्गम के पास एकत्र किए गए पानी में DO लगभग 8 mg/L के साथ स्वच्छ स्थिति दिखाई गई, जो दर्शाता है कि प्रदूषण नीचे की ओर (downstream) जमा होता है।
  • प्रदूषण के कारण: चीनी मिलों, पेपर कारखानों और चर्मशोधन कारखानों (tanneries) से अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट मुख्य योगदानकर्ता हैं। शुष्क मौसम के दौरान हिंडन में ज्यादातर अपशिष्ट जल (wastewater) होता है क्योंकि प्राकृतिक प्रवाह कम होता है।
  • सामुदायिक चिंताएं: निवासियों ने त्वचा की बीमारियों और कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की सूचना दी। जहरीले पानी ने सिंचाई और पीने के लिए उपयोग किए जाने वाले भूजल (groundwater) को भी दूषित कर दिया है, जिससे फसलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा है।

महत्व

  • पर्यावरण अलार्म: शून्य DO एक "मृत नदी" (dead river) को इंगित करता है जहां मछली और अन्य जीव जीवित नहीं रह सकते हैं। यह सर्वेक्षण प्रदूषण नियंत्रण उपायों की विफलता की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
  • प्रवर्तन की आवश्यकता (Need for enforcement): हालांकि नियामक निकायों (regulatory bodies) और अदालतों ने उद्योगों को निर्वहन (discharge) से पहले अपशिष्ट का उपचार करने का आदेश दिया है, कार्यान्वयन कमजोर बना हुआ है। नागरिक समाज समूह नदी सफाई प्रयासों में सख्त प्रवर्तन और जनभागीदारी का आह्वान करते हैं।
  • सतत जल प्रबंधन (Sustainable water management): हिंडन को पुनर्जीवित करने के लिए औद्योगिक निर्वहन को कम करने, सीवेज उपचार (sewage treatment) में सुधार करने और नदी में न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह (minimum ecological flow) सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष

हिंडन नदी का क्षरण अनियंत्रित प्रदूषण के बारे में एक वेक-अप कॉल है। नदी को पुनर्जीवित करने और इसके पानी पर निर्भर लोगों की रक्षा करने के लिए सरकार, उद्योगों और समुदायों की तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

स्रोत: The Times of India

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