चर्चा में क्यों?
28 फरवरी 2026 को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में, India Meteorological Department (IMD) ने चेतावनी दी कि मार्च और मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक लू (heatwave) के दिनों की संभावना है। जिन क्षेत्रों में भीषण गर्मी का सामना करने की उम्मीद है उनमें पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिण और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं। एजेंसी ने उल्लेख किया कि फरवरी में बारिश 2001 के बाद से सबसे कम थी और उस महीने कोई शीत लहर (cold waves) दर्ज नहीं की गई थी।
पृष्ठभूमि
India Meteorological Department, जिसकी स्थापना 1875 में हुई थी, मौसम की भविष्यवाणी, मौसम संबंधी अवलोकन और चक्रवात, बाढ़ और हीटवेव जैसे प्राकृतिक खतरों के लिए चेतावनी जारी करने के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय एजेंसी है। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के अधीन कार्य करता है और भारत और अंटार्कटिका में अवलोकन स्टेशनों (observation stations) का एक नेटवर्क संचालित करता है। IMD उत्तरी हिंद महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (tropical cyclones) की निगरानी और नामकरण के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) के क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Specialised Meteorological Centre) के रूप में भी कार्य करता है।
पूर्वानुमान के मुख्य बिंदु
- हीटवेव आउटलुक: मार्च और मई के बीच भारत के बड़े हिस्से में अधिक हीटवेव दिनों की उम्मीद है। मार्च में, कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य या सामान्य से कम हो सकता है, लेकिन मौसम के अंत में अत्यधिक गर्मी की संभावना है।
- वर्षा की कमी: फरवरी 2026 में 2001 के बाद से सबसे कम वर्षा हुई, जो गर्म स्थितियों में योगदान दे रही है। पूर्वानुमान से पता चलता है कि मार्च में औसत वर्षा कुछ क्षेत्रों में तापमान को मध्यम करने में मदद कर सकती है।
- शीत लहरों की कमी: IMD ने बताया कि फरवरी में देश भर में कोई शीत लहर नहीं आई, जो सर्दियों के मौसम के गर्म अंत का संकेत है।
निहितार्थ (Implications)
- सार्वजनिक स्वास्थ्य: हीटवेव हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन का कारण बन सकती है और मौजूदा बीमारियों को बढ़ा सकती है, विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बाहरी श्रमिकों जैसे संवेदनशील समूहों के बीच। राज्यों को हीट-एक्शन प्लान (heat-action plans) लागू करने, पीने के पानी की पहुंच सुनिश्चित करने और जहां आवश्यक हो वहां कूलिंग सेंटर खोलने की सलाह दी जाती है।
- कृषि: रबी की कटाई और शुरुआती खरीफ की बुवाई के दौरान उच्च तापमान फसलों और पशुओं पर दबाव डाल सकता है। किसानों को सिंचाई कार्यक्रम को समायोजित करने और सूखा-सहिष्णु (drought-tolerant) किस्मों को अपनाने की आवश्यकता हो सकती है।
- शहरी नियोजन: शहरों को हरित आवरण (green cover) बढ़ाकर, इमारतों में वेंटिलेशन में सुधार करके और सार्वजनिक स्थानों पर छायांकन प्रदान करके गर्मी की आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
निष्कर्ष
IMD का पूर्वानुमान भारत की गर्म होती जलवायु में हीटवेव के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है। सक्रिय उपाय - जिसमें सामुदायिक जागरूकता, स्वास्थ्य हस्तक्षेप और जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा (climate-resilient infrastructure) शामिल है - अत्यधिक गर्मी से उत्पन्न जोखिमों को कम कर सकते हैं। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तनशीलता तेज होती है, जीवन और आजीविका की सुरक्षा के लिए समय पर पूर्वानुमान और तैयारी महत्वपूर्ण होगी।
स्रोत: The Hindu