खबरों में क्यों?
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 से 27 मई 2026 तक कनाडा का दौरा किया। वे कनाडा गया अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल लेकर गए थे, जिसमें 100 से अधिक कंपनियों के उद्योग नेता शामिल थे। यात्रा में 25 मई को ओटावा और 26 से 27 मई तक टोरंटो शामिल था, और इसका केंद्र भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों को फिर से मजबूत करना तथा व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाना था।
पृष्ठभूमि
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, CEPA वार्ता मार्च 2025 में Terms of Reference पर हस्ताक्षर के बाद आगे बढ़ी। पहला वर्चुअल दौर मार्च 2026 में हुआ, दूसरा दौर 8 मई 2026 को पूरा हुआ, और मंत्री की यात्रा के साथ-साथ 25 से 29 मई 2026 तक ओटावा में तकनीकी स्तर की वार्ताएं हुईं। द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग USD 8.5 बिलियन है और दोनों सरकारों ने इसे 2030 तक USD 50 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
यात्रा की मुख्य बातें
- सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल: प्रतिनिधिमंडल में ऊर्जा, खनन, ऑटोमोटिव वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चमड़ा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों के उद्योग नेता शामिल थे।
- उच्च-स्तरीय बैठकें: श्री गोयल ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू, कृषि मंत्री हीथ मैकडोनाल्ड और विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की।
- CEPA वार्ता: भारत और कनाडा ने 2026 के अंत तक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी CEPA पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि 25 से 29 मई 2026 तक तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहीं।
- क्षेत्रीय सहयोग: चर्चा में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कृषि, खाद्य सुरक्षा, कृषि-प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और उपभोक्ता क्षेत्र शामिल रहे।
महत्व
- व्यापार विविधीकरण: कनाडा के साथ मजबूत संबंध भारत को प्राकृतिक संसाधनों, उन्नत तकनीकों और नए व्यावसायिक साझेदारी अवसरों तक पहुंच दे सकते हैं।
- निवेश और रोजगार: द्विपक्षीय निवेश दोनों देशों में रोजगार और व्यापारिक अवसरों को बढ़ा सकता है, खासकर स्वच्छ ऊर्जा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और कृषि-खाद्य क्षेत्रों में।
- राजनयिक पुनर्संतुलन: यह उच्च-स्तरीय यात्रा तनावपूर्ण दौर के बाद आर्थिक संवाद को फिर से आगे बढ़ाने की इच्छा दिखाती है।
निष्कर्ष
मई 2026 का व्यापार मिशन भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों में नए momentum को दिखाता है। इसकी सफलता निरंतर वार्ता, व्यापारिक प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन और 2026 की घोषित समयसीमा में संतुलित CEPA पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।