चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री (Union Health Minister) जे.पी. नड्डा ने जनवरी 2026 में Indian Pharmacopoeia (IP 2026) का 10वां संस्करण जारी किया। यह अद्यतन खंड 121 नए मोनोग्राफ (monographs) पेश करता है और ग्लोबल साउथ (global south) के 19 देशों में मान्यता प्राप्त है। यह रिलीज दवा गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और फार्माकोविजिलेंस (pharmacovigilance) को बढ़ाने के भारत के प्रयासों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के तहत एक स्वायत्त संस्थान (autonomous institution) है। यह 1 जनवरी 2009 को एक स्वतंत्र निकाय के रूप में पूरी तरह से चालू हो गया, हालांकि दवा मानकों को संकलित करने वाली समितियां औपनिवेशिक युग (colonial era) से चली आ रही हैं। IPC का मिशन सक्रिय दवा सामग्री (active pharmaceutical ingredients), एक्सीसिएंट्स (excipients) और खुराक के रूपों (dosage forms) सहित दवाओं की गुणवत्ता के लिए आधिकारिक मानकों को प्रकाशित करके सार्वजनिक और पशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
आयोग Indian Pharmacopoeia विकसित और संशोधित करता है — जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 (Drugs and Cosmetics Act 1940) के तहत लागू मानकों की आधिकारिक पुस्तक है। यह National Formulary of India भी प्रकाशित करता है, Indian Pharmacopoeia Reference Substances (IPRS) की आपूर्ति करता है और Pharmacovigilance Programme of India (PvPI) के लिए राष्ट्रीय समन्वय केंद्र (National Coordination Centre) के रूप में कार्य करता है। फार्माकोपिया में मोनोग्राफ आधुनिक दवाओं, पारंपरिक हर्बल दवाओं (traditional herbal drugs) और जैविक उत्पादों (biological products) सहित दवाओं की पहचान, शुद्धता और शक्ति (strength) का वर्णन करते हैं।
Indian Pharmacopoeia 2026 की विशेषताएं
- 10वां संस्करण 121 नए मोनोग्राफ जोड़ता है, जिससे कुल संख्या 3,340 हो जाती है। नई प्रविष्टियों (entries) में एंटी-ट्यूबरकुलोसिस (anti-tuberculosis), एंटी-डायबिटिक (anti-diabetic) और एंटी-कैंसर (anti-cancer) दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट शामिल हैं।
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स (Drugs and Cosmetics Rules) में संशोधन के बाद पहली बार ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (transfusion medicine) से संबंधित 20 रक्त घटक (blood component) मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं।
- यह फार्माकोपिया International Council for Harmonisation द्वारा निर्धारित अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के साथ संरेखित है और यूरोपीय, जापानी और संयुक्त राज्य फार्माकोपिया के साथ मोनोग्राफ का सामंजस्य (harmonises) स्थापित करता है।
- स्वास्थ्य मंत्री ने उल्लेख किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में भारत का योगदान 123वें स्थान (2009-2014) से सुधर कर 2025 तक 8वें स्थान पर पहुंच गया, जो दवा सुरक्षा निगरानी (drug safety monitoring) में IPC के प्रयासों को दर्शाता है।
- Indian Pharmacopoeia मानकों ने ग्लोबल साउथ के 19 देशों में स्वीकृति प्राप्त की है, जिससे विदेशों में भारतीय दवाओं की विश्वसनीयता (credibility) बढ़ी है।
IPC के उद्देश्य और गतिविधियाँ
- IPC दवा निर्माण और विश्लेषण में तकनीकी प्रगति को प्रतिबिंबित करने के लिए फार्माकोपिया और फॉर्मुलरी (formulary) को नियमित रूप से संशोधित करता है।
- यह IPRS सामग्री तैयार और वितरित करता है जो प्रयोगशाला परीक्षण के लिए बेंचमार्क के रूप में कार्य करती है।
- आयोग राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (National List of Essential Medicines) में सूचीबद्ध दवाओं के लिए मोनोग्राफ को प्राथमिकता देता है और मानकों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए दुनिया भर के फार्माकोपिया के साथ सहयोग करता है।
- शैक्षिक कार्यक्रम (Educational programmes) और अनुसंधान गतिविधियाँ स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और जनता के बीच गुणवत्ता मानकों और फार्माकोविजिलेंस के बारे में जागरूकता बढ़ाती हैं।
- PvPI के माध्यम से, IPC प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (adverse drug reactions) की रिपोर्ट एकत्र और विश्लेषण करता है, जिससे दवा सुरक्षा में सुधार करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
Indian Pharmacopoeia 2026 का विमोचन भारत के फार्मास्युटिकल विनियमन (pharmaceutical regulation) में एक मील का पत्थर है। मोनोग्राफ का विस्तार करके और वैश्विक सामंजस्य (global harmonisation) को अपनाकर, IPC दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता (efficacy) का समर्थन करता है। सतत शिक्षा, संदर्भ मानक और फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास को मजबूत करेंगे।