पर्यावरण

Indrayani River Pollution: आलंदी में आक्रोश और पारिस्थितिक प्रभाव

Indrayani River Pollution: आलंदी में आक्रोश और पारिस्थितिक प्रभाव

चर्चा में क्यों?

पुणे (Pune) के पास आलंदी (Alandi) के निवासियों ने इंद्रायणी नदी में गाढ़ा झाग (thick foam) और मरी हुई मछलियों (dead fish) की सूचना दी है। प्रदूषण की तस्वीरें वायरल हो गई हैं, जिससे सरकारी अधिकारियों और पर्यावरणविदों से तत्काल कार्रवाई की मांग उठ रही है।

पृष्ठभूमि

इंद्रायणी नदी महाराष्ट्र के लोनावाला (Lonavala) के पास कुरवंडे (Kurvande) गांव से निकलती है और पूर्व की ओर बहती हुई तुलापुर (Tulapur - शिरूर के पास, पुणे के उत्तर-पूर्व में लगभग 40 किमी) में भीमा नदी (Bhima River) में मिल जाती है। यह नदी संत तुकाराम (Sant Tukaram) और संत ज्ञानेश्वर (Sant Dnyaneshwar) के अनुयायियों के लिए धार्मिक महत्व रखती है, जो इसके तट पर रहते थे। यह कृषि, मत्स्य पालन का समर्थन करती है और कई शहरों को पीने का पानी प्रदान करती है।

वर्षों से इंद्रायणी नदी अनुपचारित घरेलू सीवेज (untreated domestic sewage), औद्योगिक अपशिष्ट (industrial effluents) और धार्मिक गतिविधियों के कचरे से पीड़ित है। लोनावाला, तालेगांव और पिंपरी-चिंचवाड़ (Pimpri-Chinchwad) जैसे शहर बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल (wastewater) नदी में छोड़ते हैं। कार्यकर्ता सीवेज उपचार संयंत्रों (sewage treatment plants) की विफलता और प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के ढीले प्रवर्तन (lax enforcement) को दोष देते हैं। 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने ₹526 करोड़ की इंद्रायणी नदी कायाकल्प (rejuvenation) परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रगति धीमी रही है। 2026 की गर्मियों के दौरान, कम जल स्तर और उच्च जैविक कचरे (organic waste) के कारण आलंदी के पास गाढ़ा झाग और मछलियों की मृत्यु दर देखी गई।

मुख्य बिंदु

  • अनुपचारित सीवेज (Untreated sewage) और औद्योगिक अपशिष्ट इंद्रायणी में प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
  • झाग (Foam) तब बनता है जब डिटर्जेंट और कार्बनिक पदार्थ (organic matter) मिलते हैं और ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है, जिससे मछलियों की मौत हो जाती है।
  • सीवेज उपचार संयंत्रों को चालू करने में देरी ने समस्या को और बढ़ा दिया है।
  • यह नदी भीमा नदी (Bhima River) की एक सहायक नदी और कृष्णा बेसिन (Krishna basin) का हिस्सा है, इसलिए प्रदूषण निचले इलाकों (downstream communities) को प्रभावित करता है।
  • नागरिक समूह और धार्मिक नेता अधिकारियों से सफाई के प्रयासों को तेज करने और जन जागरूकता को बढ़ावा देने का आग्रह कर रहे हैं।

निष्कर्ष

इंद्रायणी नदी पर संकट बुनियादी स्वच्छता (basic sanitation) और प्रदूषण नियंत्रण (pollution control) की उपेक्षा के परिणामों को रेखांकित करता है। सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण इस नदी को बहाल करने के लिए उपचार संयंत्रों (treatment plants) को तेजी से पूरा करना, अपशिष्टों की सख्त निगरानी और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है।

स्रोत: TOI
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