विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Jamun Tree Origins: सिज़ीगियम इवोल्यूशन, पेलियोबॉटनी और गोंडवाना

Jamun Tree Origins: सिज़ीगियम इवोल्यूशन, पेलियोबॉटनी और गोंडवाना

समाचार में क्यों?

एक नए अध्ययन से पता चलता है कि जामुन का पेड़ (Syzygium) पहले की तुलना में बहुत पहले उत्पन्न हुआ था और भारत इसके प्रारंभिक विविधीकरण (diversification) के लिए एक प्रमुख केंद्र था। ये निष्कर्ष इस महत्वपूर्ण फलदार पेड़ के विकासवादी इतिहास के बारे में हमारी समझ को नया आकार देते हैं।

पृष्ठभूमि

जामुन, जिसे ब्लैक प्लम (black plum) या इंडियन ब्लैक चेरी (Indian black cherry) के रूप में भी जाना जाता है, एक व्यावसायिक महत्व का फल है जिसे भारत में व्यापक रूप से उगाया जाता है। यह पेड़ उष्णकटिबंधीय (tropical) और उपोष्णकटिबंधीय (subtropical) जलवायु में पनपता है, लवणता (salinity) और जल-भराव वाली मिट्टी को सहन करता है और अच्छी तरह से जल निकासी वाली दोमट (loamy) मिट्टी पर बढ़ता है। यह पूरे भारत और पड़ोसी देशों में पाया जाता है और हिमालय में 1,300 मीटर तक और कुमाऊं (Kumaon) की पहाड़ियों में 1,600 मीटर तक की ऊंचाई पर पाया जा सकता है।

इसके विकास पर नया शोध

  • अध्ययन के निष्कर्ष: बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences - BSIP) और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने जीवाश्म साक्ष्यों की फिर से जांच की और पाया कि Syzygium की उत्पत्ति लगभग 80 मिलियन वर्ष पहले पूर्वी गोंडवाना (East Gondwana) में हुई थी। जीनस (genus) के प्रारंभिक विविधीकरण में भारत ने केंद्रीय भूमिका निभाई। पहले, वनस्पति विज्ञानियों (botanists) ने ऑस्ट्रेलियाई या दक्षिण पूर्व एशियाई मूल का प्रस्ताव दिया था।
  • जीवाश्म साक्ष्य: शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश के कसौली फॉर्मेशन (Kasauli Formation) में प्रारंभिक मियोसीन (Early Miocene) निक्षेपों (~ 20 मिलियन वर्ष पुराने) से 11 अच्छी तरह से संरक्षित जीवाश्म पत्तियों को एकत्र किया। Syzygium paleosalicifolium नामक जीवाश्मों का माइक्रोस्कोपी (microscopy) का उपयोग करके विश्लेषण किया गया और आधुनिक हर्बेरियम (herbarium) नमूनों के साथ तुलना की गई। उन्होंने दिखाया कि इस जीनस के सदस्य कम से कम प्रारंभिक इओसीन (Early Eocene - ~55 मिलियन वर्ष पूर्व) के बाद से भारत में मौजूद थे।
  • निहितार्थ: अध्ययन से संकेत मिलता है कि Syzygium भारत से दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में फैल गया होगा। यह पौधों के विकास में भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) के महत्व को रेखांकित करता है और इस बात पर प्रकाश डालता है कि जीवाश्म रिकॉर्ड को आधुनिक आनुवंशिक डेटा (genetic data) के साथ एकीकृत करने से बायोगियोग्राफिक आख्यान (biogeographic narratives) कैसे बदल सकते हैं।

खेती के तथ्य

  • मिट्टी और जलवायु: जामुन गहरी, अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी (loam) में सबसे अच्छा बढ़ता है, लेकिन खारी या जलभराव वाली स्थितियों को सहन कर सकता है। यह फूल आने और फल लगने के दौरान शुष्क मौसम के साथ उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय जलवायु पसंद करता है; मानसून की शुरुआती बारिश फल के विकास में सहायता करती है और आकार, रंग और स्वाद में सुधार करती है।
  • वितरण: भारत के अलावा जामुन थाईलैंड, फिलीपींस, मेडागास्कर और अन्य देशों में पाया जाता है। इसके बीजों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है, और एंथोसायनिन (anthocyanins) नामक यौगिक फल को इसका गहरा बैंगनी रंग देते हैं।

महत्व

जामुन की प्राचीन उत्पत्ति को समझना वैज्ञानिकों को अतीत की जलवायु और वनस्पति पैटर्न के पुनर्निर्माण में मदद करता है। यह पौधों के विकास के एक पालने के रूप में भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है। किसानों और उपभोक्ताओं के लिए, यह अध्ययन स्वदेशी फलदार पेड़ों में आनुवंशिक विविधता के संरक्षण के मूल्य को रेखांकित करता है।

स्रोत: Press Information Bureau

Continue reading on the App

Save this article, highlight key points, and take quizzes.

App Store Google Play
Home Current Affairs 📰 Daily News 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Web App