अर्थव्यवस्था

JCIS: जूट की निगरानी, ISRO, BHUVAN JUMP और PATSAN

JCIS: जूट की निगरानी, ISRO, BHUVAN JUMP और PATSAN

चर्चा में क्यों?

कपड़ा मंत्रालय ने 11 मई 2026 को घोषणा की कि जूट की खेती की निगरानी के लिए एक उन्नत प्लेटफॉर्म, जूट फसल सूचना प्रणाली (JCIS) को तैनात करने में राष्ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Jute Corporation of India) के साथ संयुक्त रूप से विकसित यह प्रणाली, फसल क्षेत्र और उपज का निकट रीयल-टाइम (near real‑time) अनुमान लगाने के लिए उपग्रह डेटा, मौसम विश्लेषिकी और क्षेत्र अवलोकन (field observations) का उपयोग करती है। यह लंबे समय से खंडित सूचनाओं से बाधित क्षेत्र में डेटा-संचालित निर्णय लेने (data‑driven decision‑making) की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक है。

पृष्ठभूमि

भारत कच्चे जूट का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, फिर भी ऐतिहासिक रूप से फसल क्षेत्र और उत्पादकता के बारे में सटीक जानकारी की कमी रही है। अनुमान अक्सर मैन्युअल सर्वेक्षण और विशेषज्ञ निर्णय पर आधारित होते थे, जिसके परिणामस्वरूप देरी और विसंगतियां होती थीं। 2023 में राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने इन कमियों को दूर करने के लिए JCIS को लागू करना शुरू किया। यह प्रणाली दूरस्थ-संवेदन (remote‑sensing) इमेजरी, मौसम डेटा और जमीनी स्तर के अवलोकनों (ground‑level observations) को जोड़ती है ताकि जूट कहाँ उगाया जाता है और यह कैसा प्रदर्शन कर रहा है, इस पर अधिक विश्वसनीय जानकारी मिल सके。

मुख्य विशेषताएं और प्रभाव

  • भुवन जंप (BHUVAN JUMP) मोबाइल ऐप: फील्ड अधिकारी इस ऐप का उपयोग रोपण तिथियों, फसल की स्थिति और किस्मों पर जियो-टैग (geo‑tagged) डेटा एकत्र करने के लिए करते हैं। यह जानकारी सीधे JCIS प्लेटफॉर्म में फीड होती है।
  • पट्सन (PATSAN) वेब प्लेटफॉर्म: “Prospective Assessment of Jute using Mobile App‑Based Field Observations” (PATSAN) का संक्षिप्त रूप, यह इंटरफ़ेस उपग्रह छवियों, वनस्पति सूचकांकों (vegetation indices), मौसम विश्लेषिकी और ऐतिहासिक डेटासेट को एकीकृत करके निकट रीयल-टाइम फसल निगरानी प्रदान करता है।
  • बेहतर अनुमान: कई डेटा स्ट्रीम के संयोजन से, JCIS फसल क्षेत्र और उत्पादन का अधिक सटीक अनुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली स्मार्ट सैंपलिंग तकनीकों का उपयोग करके फसल काटने के प्रयोगों (crop‑cutting experiments) का भी समर्थन करती है, जिससे उपज आकलन में वृद्धि होती है।
  • जोखिम मूल्यांकन (Risk assessment): रिमोट सेंसिंग बाढ़ की क्षति, सूखे के तनाव या कीटों के प्रकोप का पता लगाने की अनुमति देता है। प्रारंभिक चेतावनी (Early warnings) समय पर हस्तक्षेप और प्रभावित किसानों को लक्षित सहायता (targeted support) प्रदान करने में सक्षम बनाती है।
  • नीति एकीकरण (Policy integration): सुसंगत, भू-संदर्भित (geo‑referenced) डेटा राज्य और राष्ट्रीय अनुमानों को संरेखित करने और संसाधनों के आवंटन को सूचित करने में मदद करता है। भविष्य की योजनाओं में इस प्रणाली को अधिक जिलों में विस्तारित करना, मोबाइल फोन के माध्यम से किसानों को अलर्ट भेजना और पानी के उपयोग और कार्बन-फुटप्रिंट (carbon‑footprint) अध्ययन के लिए एनालिटिक्स का उपयोग करना शामिल है।

स्रोत

PIB

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