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Jnanpith Award 2025: आर. वैरामुथु, तमिल साहित्य और साहित्यिक सम्मान

Jnanpith Award 2025: आर. वैरामुथु, तमिल साहित्य और साहित्यिक सम्मान

चर्चा में क्यों?

प्रसिद्ध तमिल गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु (R. Vairamuthu) को 2025 के ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है, जिससे वह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल लेखक बन गए हैं।

पृष्ठभूमि

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय लेखकों के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए 1961 में भारतीय ज्ञानपीठ (Bharatiya Jnanpith) ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया था। यह प्रतिवर्ष संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में सूचीबद्ध किसी भी भाषा या अंग्रेजी में लिखे गए कार्यों के लिए प्रस्तुत किया जाता है। इस पुरस्कार में एक नकद पुरस्कार, देवी सरस्वती (वाग्देवी) की एक कांस्य प्रतिमा (bronze statue) और एक प्रशस्ति पत्र (citation) शामिल है। इससे पहले के तमिल प्राप्तकर्ताओं में अकिलन (Akilan) (1975) और जयकांथन (Jayakanthan) (2001) शामिल हैं।

आर. वैरामुथु के बारे में

  • 1953 में जन्मे वैरामुथु एक प्रसिद्ध तमिल कवि, उपन्यासकार (novelist) और फिल्म गीतकार (film lyricist) हैं। उनका करियर चार दशकों (four decades) से अधिक का है और इसमें सर्वश्रेष्ठ गीतों (best lyrics) के लिए सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) शामिल हैं।
  • उन्होंने कविता के कई खंड प्रकाशित किए हैं, जिनमें महाकाव्य (epic) "कल्लीकट्टू इथिगासम (Kallikattu Ithigaasam)" शामिल है, और उन्होंने निबंध और कवि सुब्रमण्य भारती (Subramania Bharati) की जीवनी भी लिखी है। उनकी छंदें (verses) अक्सर समकालीन विषयों (contemporary themes) के साथ शास्त्रीय तमिल मुहावरों (classical Tamil idioms) को मिलाती हैं।
  • ज्ञानपीठ चयन बोर्ड (Jnanpith Selection Board) ने तमिल भाषा और संस्कृति की समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए उनके काम की प्रशंसा की। वह पूरे भारत के लेखकों के एक चुनिंदा समूह में शामिल हो गए हैं जिनकी रचनाओं ने आधुनिक भारतीय साहित्य को आकार दिया है।

महत्व

  • यह पुरस्कार भारत की सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) में तमिल साहित्य के योगदान को स्वीकार करता है और क्षेत्रीय भाषाओं (regional languages) में लेखकों को प्रोत्साहित करता है।
  • वैरामुथु की मान्यता युवा कवियों और गीतकारों को समकालीन मुद्दों (contemporary issues) को संबोधित करते हुए पारंपरिक रूपों का पता लगाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

निष्कर्ष

ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए आर. वैरामुथु का चयन तमिल कविता की स्थायी अपील को उजागर करता है। यह भारत के विविध भाषाई परिदृश्य (linguistic landscape) में साहित्यिक उत्कृष्टता का जश्न मनाने के महत्व की भी पुष्टि करता है।

स्रोत: The Hindu

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