पर्यावरण

Katarniaghat Sanctuary: दुधवा टाइगर रिजर्व और जैव विविधता

Katarniaghat Sanctuary: दुधवा टाइगर रिजर्व और जैव विविधता

खबरों में क्यों?

25 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (Katarniaghat Wildlife Sanctuary) में अमृतपुर (Amritpur) गांव के पास जलाऊ लकड़ी (firewood) इकट्ठा कर रही एक महिला को बाघ ने मार डाला। इस घटना ने अधिकारियों को गश्त (patrols) बढ़ाने और ग्रामीणों को सुरक्षा प्रोटोकॉल (safety protocols) की याद दिलाने के लिए प्रेरित किया। इसने अभयारण्य की अनूठी पारिस्थितिकी (unique ecology) और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व (human–wildlife coexistence) की चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

पृष्ठभूमि

कतरनियाघाट उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र (Terai region) में दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) का हिस्सा है। यह नेपाल सीमा के पास बहराइच जिले (Bahraich district) में स्थित है और घाघरा नदी (Ghaghra river) की गिरवा (Girwa) और कौड़ियाला (Kaudiyala) धाराओं के साथ साल (sal) और सागौन (teak) के जंगलों, लंबी घास के मैदानों, दलदलों और आर्द्रभूमियों (wetlands) के लगभग 400 वर्ग किमी को कवर करता है। लगभग 150 वर्ग किमी का एक बफर जोन (buffer zone) संरक्षित क्षेत्र का विस्तार करता है। अभयारण्य को 1987 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) में शामिल किया गया था और, 2000 के दशक की शुरुआत में, किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य (Kishanpur Wildlife Sanctuary) के साथ, यह दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा बन गया।

पारिस्थितिक विशेषताएं (Ecological features)

  • लैंडस्केप कनेक्टिविटी (Landscape connectivity): कतरनियाघाट भारत में दुधवा और किशनपुर के बाघ आवासों (tiger habitats) को नेपाल में बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान (Bardia National Park) से जोड़ता है। यह गलियारा (corridor) आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को बनाए रखते हुए बाघों और अन्य जानवरों को स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित होने की अनुमति देता है।
  • विविध आवास (Diverse habitats): साल के जंगलों, मिश्रित पर्णपाती पेड़ों (mixed deciduous trees) और आर्द्रभूमियों का अभयारण्य का मोज़ेक (mosaic) प्रजातियों की एक विस्तृत श्रृंखला का समर्थन करता है। गिरवा नदी (Girwa River) और इसकी सहायक नदियाँ घड़ियाल (gharials) और मगरमच्छों (mugger crocodiles) के लिए जानी जाती हैं, जबकि दलदलों में बारहसिंगा (swamp deer) और हिस्पिड खरगोश (hispid hares) रहते हैं।
  • वन्यजीव (Wildlife): बाघों के अलावा, कतरनियाघाट एक सींग वाले गैंडे (one‑horned rhinoceros), गंगा डॉल्फिन (Gangetic dolphin), बंगाल फ्लोरिकन (Bengal florican), सफेद पीठ वाले गिद्ध (white‑backed vulture) और लंबी चोंच वाले गिद्ध (long‑billed vulture) जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों (endangered species) का घर है। इसके नदी पारिस्थितिक तंत्र में दुर्लभ कछुए और मछलियां रहती हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human–wildlife conflict)

  • जंगलों पर निर्भरता (Dependence on forests): कई गांव अभयारण्य की सीमा से लगे हैं। निवासी जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करते हैं, मवेशी चराते हैं और घास इकट्ठा करते हैं। जैसे-जैसे मानवीय गतिविधियाँ बढ़ती हैं, जंगली जानवरों के साथ मुठभेड़ (encounters) अधिक बार होती जाती है।
  • रोकथाम के उपाय (Prevention measures): वन अधिकारी नियमित रूप से संघर्ष के हॉटस्पॉट (conflict hotspots) पर गश्त करते हैं, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (early‑warning systems) स्थापित करते हैं और नुकसान के लिए मुआवजा (compensation) प्रदान करते हैं। जागरूकता अभियान (Awareness campaigns) ग्रामीणों को गहरे वन क्षेत्रों (deep forest areas) से बचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, विशेष रूप से सुबह और शाम के समय जब बाघ सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
  • दीर्घकालिक समाधान (Long‑term solutions): जंगल के बाहर आजीविका का विस्तार करना, जैसे कि इको-टूरिज्म (eco‑tourism) और हस्तशिल्प (handicrafts) को बढ़ावा देना, लकड़ी और चारे पर निर्भरता को कम कर सकता है। नेपाल के साथ गलियारे को मजबूत करने से यह सुनिश्चित होता है कि जानवरों को गांवों में प्रवेश किए बिना स्थानांतरित होने के लिए जगह मिले।

निष्कर्ष

कतरनियाघाट में दुखद बाघ का हमला उन तनावों को दर्शाता है जो लोगों और वन्यजीवों द्वारा स्थान साझा करने पर उत्पन्न होते हैं। स्थानीय समुदायों की रक्षा करते हुए अभयारण्य की जैव विविधता (biodiversity) को संरक्षित करने के लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता है: गलियारों को बनाए रखना, वैकल्पिक आजीविका (alternative livelihoods) में निवेश करना और शिक्षा और उचित मुआवजे (fair compensation) के माध्यम से सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना।

स्रोत

Devdiscourse

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