भूगोल

Kirthai-II Hydroelectric Project: Chenab River, Indus Water Treaty और J&K

Kirthai-II Hydroelectric Project: Chenab River, Indus Water Treaty और J&K

चर्चा में क्यों?

2025 में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा Indus Water Treaty को निलंबित करने के बाद, केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी (Chenab river) पर 930 मेगावाट की Kirthai-II रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत परियोजना (hydroelectric project) को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान द्वारा इसकी शर्तों पर आपत्ति जताने के कारण यह परियोजना दशकों से निष्क्रिय पड़ी थी। मई 2026 में, विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) ने संयुक्त उद्यम कंपनी (joint venture company) Chenab Valley Power Projects Ltd. के लिए संशोधित विचारार्थ विषयों (terms of reference) को मंजूरी दे दी, जिससे विस्तृत जाँच और भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है。

पृष्ठभूमि

1960 की Indus Water Treaty ने भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली (Indus river system) का बँटवारा किया था। इस समझौते के तहत, भारत पूर्वी नदियों के पानी का उपयोग कर सकता था लेकिन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर उसके अधिकार सीमित थे। 1984 में परिकल्पित Kirthai योजना में चिनाब नदी पर एक कंक्रीट ग्रेविटी बाँध (gravity dam) और भूमिगत बिजलीघर (underground powerhouse) का प्रस्ताव है। इसके दो चरण मिलकर 1,200 मेगावाट बिजली उत्पन्न करेंगे; अकेले चरण-II से 930 मेगावाट उत्पादन की उम्मीद है। 1990 के दशक में पाकिस्तान ने Permanent Indus Commission में आपत्तियाँ उठाईं, और इस परियोजना को रोक दिया गया। संयुक्त उद्यम कंपनी - Chenab Valley Power Projects Ltd. - का स्वामित्व NHPC (51%), जम्मू और कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (39%) और PTC India (10%) के पास है。

पुनरुद्धार के प्रमुख विवरण

  • तत्काल कार्रवाई का कारण: 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने Indus Water Treaty में भागीदारी निलंबित कर दी। इससे चिनाब पर रुकी हुई परियोजनाओं को आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई। केंद्र सरकार ने Kirthai-II के लिए विचारार्थ विषयों (terms of reference) को NHPC से Chenab Valley Power Projects Ltd. को हस्तांतरित कर दिया, जिससे प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गईं।
  • परियोजना की विशेषताएँ: चरण-II में एक 135-मीटर कंक्रीट ग्रेविटी बाँध और चार 232.5 मेगावाट टरबाइन वाला एक भूमिगत बिजलीघर (underground powerhouse) शामिल है। एक रन-ऑफ-रिवर (run-of-river) योजना के रूप में, यह एक बड़ा जलाशय बनाए बिना चिनाब के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करेगा, जिससे भूमि का डूबना (submergence) और विस्थापन (displacement) कम होगा।
  • नदी और मौजूदा बाँध: चिनाब हिमाचल प्रदेश से निकलती है और पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले जम्मू और कश्मीर से होकर बहती है। नदी पर प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में सलाल (Salal), दुलहस्ती (Dulhasti), बगलिहार (Baglihar) और निर्माणाधीन पाकल दुल (Pakal Dul) शामिल हैं। Kirthai-II कीरतई गाँव (Kirthai) के पास Kirthai-I बाँध स्थल के नीचे की ओर (downstream) स्थित होगा।
  • आर्थिक और रणनीतिक मूल्य: उत्तरी राज्यों के लिए सस्ती बिजली पैदा करने के अलावा, यह परियोजना भारत को चिनाब के प्रवाह पर अधिक नियंत्रण स्थापित करने और भविष्य के विवादों को कम करने में मदद कर सकती है। इसके पूरा होने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और जम्मू-कश्मीर में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

निष्कर्ष

Kirthai-II परियोजना का पुनरुद्धार दर्शाता है कि किस प्रकार भू-राजनीति बुनियादी ढाँचे (infrastructure) की बाधाओं को दूर कर सकती है। सावधानीपूर्वक पर्यावरण प्रबंधन के साथ, यह परियोजना रन-ऑफ-रिवर सिद्धांतों का सम्मान करते हुए भारत के लिए स्वच्छ बिजली और अधिक जल सुरक्षा (water security) का वादा करती है। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए प्रभावित समुदायों के पारदर्शी पुनर्वास (rehabilitation) और पर्यावरण एवं वन संबंधी मंज़ूरियों को समय पर प्राप्त करने की आवश्यकता होगी。

स्रोत

Swarajya

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