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Koraga Tribe: PVTG, आवास असमानता और मानवाधिकार

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खबरों में क्यों?

19 मई 2026 को जारी संयुक्त राष्ट्र-पर्यावास विश्व शहर रिपोर्ट 2026 (UN‑Habitat World Cities Report 2026) ने भारत में आवास असमानता (housing inequality) को दर्शाने के लिए कर्नाटक के कोरागा (Koraga) समुदाय की दुर्दशा का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि सकारात्मक नीतियों (affirmative policies) के बावजूद जातिगत बाधाएं (caste barriers) और नीतिगत अंतराल कई आदिवासी (tribal) परिवारों को सुरक्षित आवास (secure housing) तक पहुंचने से रोकते हैं।

पृष्ठभूमि

कोरागा एक छोटा आदिवासी समुदाय है जो मुख्य रूप से कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ (Dakshina Kannada) और उडुपी (Udupi) जिलों में और केरल के कासरगोड (Kasaragod) जिले में रहता है। केरल के आदिवासी विकास संस्थान के शोध के अनुसार, 2011 की जनगणना में केरल में उनकी आबादी 1,582 थी। कोरागाओं को एक समय कृषक दासों (agrestic slaves) के रूप में माना जाता था और जमीन के साथ बेच दिया जाता था। उनका पारंपरिक पेशा (traditional occupation) टोकरी बुनाई है, और वे तुलु (Tulu) से संबंधित भाषा बोलते हैं। ऐतिहासिक रूप से, उच्च-जाति के हिंदुओं ने उन्हें अपमानजनक अजालु (Ajalu) अनुष्ठान करने के लिए मजबूर किया, जहां वे दुर्भाग्य को "दूर करने" के लिए बालों और नाखूनों के साथ मिश्रित बचा हुआ भोजन खाते थे। दशकों की सक्रियता (activism) के बाद, कर्नाटक कोरागा (अजालु प्रथाओं का निषेध) अधिनियम, 2000 (Karnataka Koraga (Prohibition of Ajalu Practices) Act, 2000) ने इस प्रथा को गैरकानूनी (outlawed) घोषित कर दिया।

आवास और भेदभाव (Housing and discrimination)

  • विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG): कोरागाओं को एक पीवीटीजी (PVTG) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि उनकी आबादी कम है, भौगोलिक रूप से अलग-थलग (geographically isolated) हैं और साक्षरता कम (low literacy) है। PVTG में अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच का अभाव होता है।
  • आवास के लिए बाधाएं (Barriers to housing): संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई दलित (Dalit) और मुस्लिम परिवारों को घर किराए पर लेते या खरीदते समय भेदभाव (discrimination) का सामना करना पड़ता है। कोरागाओं के लिए, कम साक्षरता, गरीबी और जातिगत पूर्वाग्रह (caste prejudice) सरकारी आवास योजनाओं तक पहुंच को कठिन बनाते हैं।
  • सफलता की कहानियां (Success stories): एक्शनएड इंडिया (ActionAid India), कोरागा फेडरेशन (Koraga Federation) और समग्र ग्रामीण आश्रम (Samagra Grameena Ashram) द्वारा चलाए जा रहे "कर्नाटक में स्वदेशी जनजातीय समुदाय के सम्मान और मानवाधिकारों की बहाली (Restoration of Dignity and Human Rights of Indigenous Tribal Community in Karnataka)" नामक समुदाय के नेतृत्व वाले कार्यक्रम ने हजारों कोरागा परिवारों के लिए भूमि और आवास अनुदान (housing grants) हासिल करने में मदद की है। इसने समुदाय के भीतर पोषण, शिक्षा और महिलाओं के नेतृत्व (women’s leadership) में सुधार किया है।

महत्व

  • असमानता को उजागर करना (Highlighting inequality): UN-Habitat रिपोर्ट ने कोरागा उदाहरण का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि कानून जातिगत भेदभाव को प्रतिबंधित करने के बावजूद आवास असमानता बनी हुई है। इस तरह के अंतरालों को संबोधित करने के लिए लक्षित आउटरीच (targeted outreach) और जागरूकता की आवश्यकता है।
  • मानवाधिकार (Human rights): कोरागा जैसे PVTG को सुरक्षित घर (secure homes) सुनिश्चित करना उनकी गरिमा (dignity), स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए आवश्यक है। सामाजिक सशक्तिकरण (social empowerment) के साथ भूमि अधिकारों को जोड़ने वाले कार्यक्रम बहिष्करण के चक्र (cycles of exclusion) को तोड़ सकते हैं।
  • नीतिगत सुधार (Policy reform): पैरोकार (Advocates) आदिवासी समुदायों के लिए आवास योजनाओं तक पहुंचने के लिए सरल प्रक्रियाओं, धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए बेहतर निगरानी (better monitoring) और भेदभाव-विरोधी कानूनों (anti‑discrimination laws) को सख्ती से लागू करने (stronger enforcement) का आह्वान करते हैं।

निष्कर्ष

कोरागा जनजाति के सामने आने वाली चुनौतियाँ हमें याद दिलाती हैं कि अकेले कानून (legislation) जाति-आधारित बहिष्करण (caste‑based exclusion) को समाप्त नहीं कर सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कमजोर समुदाय (vulnerable communities) सभ्य आवास (decent housing) सुरक्षित कर सकें और सम्मान के साथ रह सकें, जमीनी स्तर के संगठनों (Grassroots organisations), सहायक नीतिगत ढांचे और सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है।

स्रोत

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