चर्चा में क्यों?
ओडिशा (Odisha) के लांजिया सौरा (Lanjia Saora) समुदाय को हाल ही में इसकी संस्कृति को संरक्षित करने के प्रयासों को उजागर करने वाले समाचारों और वृत्तचित्रों (documentaries) में दिखाया गया है। इस छोटे, पृथक समूह को एक विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है और आधुनिकीकरण और विकास के दबावों का सामना करना पड़ता है।
लांजिया सौरा कौन हैं? (Who are the Lanjia Saora?)
लांजिया सौरा सौरा या सोरा लोगों (Saora or Sora people) का एक उपसमूह है, जो ओडिशा की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक है। वे पूर्वी घाटों (Eastern Ghats) में गजपति (Gajapati) और रायगड़ा (Rayagada) जिलों की जंगली पहाड़ियों में रहते हैं। सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार उनकी जनसंख्या लगभग 11,820 है। वे एक ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा) भाषा (Austro-Asiatic (Munda) language) बोलते हैं और स्थानांतरित खेती (shifting cultivation) और सीढ़ीदार धान की खेती (terraced paddy farming) की मिश्रित अर्थव्यवस्था का अभ्यास करते हैं।
विशिष्ट जीवन शैली (Distinctive lifestyle)
- दूरस्थ बस्तियां (Remote settlements): गांव खड़ी पहाड़ियों पर छिपे हुए हैं, जो केवल संकरे रास्तों से ही सुलभ हैं। घर मिट्टी की दीवारों और फूस की छतों के साथ पंक्तियों के बजाय बिखरे हुए पैटर्न में बनाए जाते हैं।
- कपड़े और श्रंगार (Clothing and adornment): पुरुष पीठ पर एक लंबा फ्लैप लटका हुआ एक लंगोटी पहनते हैं, जिससे "लांजिया" (पूंछ जैसा) नाम पड़ा। महिलाएं कमर का खुरदरा कपड़ा पहनती हैं। वे लकड़ी के प्लग (wooden plugs) डालने के लिए अपने कान के लोब (ear lobes) को बड़ा करते हैं और अक्सर माथे पर एक ऊर्ध्वाधर रेखा (vertical line) गोदवाते (tattoo) हैं।
- सीढ़ीदार खेती (Terraced farming): जबकि वे स्थानांतरित खेती भी करते हैं, लांजिया सौरा खड़ी ढलानों पर धान उगाने के लिए परिष्कृत जल-प्रबंधन प्रणालियों (sophisticated water-management systems) के साथ पत्थर से बंधी छतों (stone-bounded terraces) के निर्माण में उत्कृष्ट हैं। वे मिट्टी के बर्तन बनाने, टोकरी बनाने और वनोपज (forest produce) इकट्ठा करने के माध्यम से अपनी आजीविका के पूरक हैं।
संस्कृति और मान्यताएँ (Culture and beliefs)
- जादुई-धार्मिक परंपराएं (Magico-religious traditions): समुदाय का धर्म देवी-देवताओं और पैतृक आत्माओं (ancestral spirits) के समूह पर केंद्रित है, जिन्हें सामूहिक रूप से सोनम (Sonnum) कहा जाता है। शमां (Shamans), पुरुष (कुडन - Kudan) और महिला (कुडन बाई - Kudan Bai) दोनों, मानव और अलौकिक लोकों (supernatural realms) के बीच मध्यस्थ (intermediaries) के रूप में कार्य करते हैं।
- इडिटल पेंटिंग (Idital paintings): औपचारिक दीवार पेंटिंग (Ceremonial wall paintings), जिन्हें इडिटल (idital) कहा जाता है, ब्रह्माण्ड संबंधी आकृतियों (cosmological figures) को चित्रित करती हैं और आत्माओं को प्रसन्न करने के लिए बनाई जाती हैं। इस कला रूप ने मान्यता प्राप्त कर ली है और अब इसे बिक्री के लिए कागज और कैनवास पर तैयार किया जाता है।
- संगीत और नृत्य (Music and dance): लांजिया सौरा समारोहों में सहज रूप से रचे गए गीत और पीतल के पाइप, झांझ, घंटा, छतरियों और मोर के पंखों के साथ किए जाने वाले नृत्य शामिल होते हैं। पुरुष अक्सर अपनी पगड़ी को सफेद क्रेन (crane) के पंखों से सजाते हैं।
- त्यौहार (Festivals): महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में बुरोय-ना-अदुर (Buroy-na-Adur), गनुगे-ना-अदुर (Ganugey-na-Adur) और टांकू-ना-अदुर (Tanku-na-Adur) शामिल हैं, जो कृषि चक्रों (agricultural cycles) को चिह्नित करते हैं या विशिष्ट देवताओं को प्रसन्न करते हैं।
समकालीन मुद्दे (Contemporary issues)
- सुभेद्यता (Vulnerability): पीवीटीजी (PVTG) के रूप में वर्गीकरण समुदाय की कम आबादी, अलगाव और आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के प्रति संवेदनशीलता को पहचानता है। विकास परियोजनाएं और वन भूमि का नुकसान पारंपरिक आजीविका के लिए खतरा है।
- विकास पहल (Development initiatives): सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और स्थायी आजीविका सहायता प्रदान करने के लिए पुट्टासिंग (Puttasing) और सेरंगा (Seranga) में लांजिया सौरा विकास एजेंसी (Lanjia Saora Development Agency) जैसी सूक्ष्म-परियोजनाएं स्थापित की हैं।
- संस्कृति का संरक्षण (Preservation of culture): भाषा, कला और रीति-रिवाजों के दस्तावेजीकरण के साथ-साथ हस्तशिल्प (handicrafts) के लिए इको-टूरिज्म और निष्पक्ष व्यापार, समुदाय की अनूठी विरासत को संरक्षित करने और जीवन स्तर में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।
स्रोत: The Hindu