पर्यावरण

Lichen Moths: पूर्वी हिमालय, वायु गुणवत्ता और ZSI

Lichen Moths: पूर्वी हिमालय, वायु गुणवत्ता और ZSI

खबरों में क्यों?

ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के शोधकर्ताओं ने मार्च 2026 में लाइकेन पतंगों (lichen moths) की दो नई प्रजातियों का वर्णन किया। कॉलोसेरा होलोवेई (Caulocera hollowayi) और असुरा बक्सा (Asura buxa) नाम के इन कीड़ों को सिक्किम और पश्चिम बंगाल से एकत्र किया गया था। इनकी खोज पूर्वी हिमालय की अज्ञात जैव विविधता (biodiversity) और वायु-गुणवत्ता संकेतक (air-quality indicators) के रूप में लाइकेन के महत्व को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

लाइकेन पतंगे टाइगर मॉथ (tiger moth) परिवार एरिबिडी (Erebidae) के उप-परिवार लिथोसीने (Lithosiinae) से संबंधित हैं। इनकी इल्लियां (caterpillars) लाइकेन (शैवाल और कवक से बने सहजीवी जीव) खाती हैं, जो उन्हें वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील बनाता है क्योंकि लाइकेन केवल स्वच्छ वातावरण में ही पनपते हैं। वैज्ञानिक अक्सर लाइकेन और उनसे जुड़े कीड़ों का उपयोग वायु गुणवत्ता के जैविक मॉनिटर के रूप में करते हैं।

खोजों के बारे में

  • कॉलोसेरा होलोवेई (Caulocera hollowayi): यह पतंगा सिक्किम में नामची (Namchi) के पास गोलीटार (Golitar) से एकत्र किया गया था। यह चमकीले सफेद निशान और अद्वितीय पुरुष जननांगों (male genitalia) वाले पीले-भूरे रंग के पंखों की विशेषता है। प्रजाति का नाम ब्रिटिश लेपिडोप्टेरिस्ट (lepidopterist) जेरेमी होलोवे को पतंगा टैक्सोनॉमी में उनके योगदान के लिए सम्मानित करता है।
  • असुरा बक्सा (Asura buxa): पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिज़र्व (Buxa Tiger Reserve) के अंदर पानीझोरा (Panijhora) में पाए गए इस पतंगे के अग्र पंख भूरे रंग के होते हैं जिन पर काले धब्बे होते हैं और इसके पिछले पैरों पर स्केल्स (scales) के विशिष्ट गुच्छे होते हैं। प्रजाति का नाम बक्सा क्षेत्र को संदर्भित करता है जहां इसकी खोज की गई थी।
  • रूपात्मक अंतर (Morphological differences): शोधकर्ताओं ने सूक्ष्म संरचनाओं (microscopic structures) जैसे कि अंकस (uncus) और वाल्वा (valva) (पुरुष प्रजनन अंग के भाग), पंखों के पैटर्न और स्केल्स की व्यवस्था की जांच करके नई प्रजातियों को अलग किया। ये विशेषताएं बारीकी से संबंधित लाइकेन पतंगों को अलग करने में मदद करती हैं।
  • स्वच्छ हवा के संकेतक: चूंकि कैटरपिलर विशेष रूप से लाइकेन पर फ़ीड करते हैं, इन पतंगों की उपस्थिति वायु प्रदूषण के निम्न स्तर का सुझाव देती है। इसलिए इनकी खोज हिमालय में अपेक्षाकृत प्राचीन आवासों का संकेत देती है।
  • निरंतर सर्वेक्षण का महत्व: पूर्वी हिमालय एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है। नई खोजें आवास परिवर्तन और जलवायु वार्मिंग के कारण प्रजातियों के खो जाने से पहले उन्हें दस्तावेज करने के लिए व्यवस्थित सर्वेक्षणों की आवश्यकता पर जोर देती हैं।

लाइकेन हमें क्या बताते हैं?

लाइकेन सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। जब हवा की गुणवत्ता खराब होती है, तो लाइकेन गायब हो जाते हैं, साथ ही उन पर निर्भर कीड़े भी। इसलिए लाइकेन के वितरण की निगरानी करने से वैज्ञानिकों को पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र में प्रदूषण की प्रवृत्तियों का पता लगाने में मदद मिलती है।

स्रोत: India Today.

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