चर्चा में क्यों?
मई 2026 में हालिया रिपोर्टों ने पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील (freshwater lake), लोकटक झील (Loktak Lake) पर गंभीर पारिस्थितिक और सामाजिक दबाव (ecological and social pressures) पर प्रकाश डाला। मणिपुर में जातीय हिंसा ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है, जिनमें से कई भोजन और आजीविका के लिए झील की ओर मुड़ गए हैं। मछली पकड़ने का यह बढ़ा हुआ दबाव, लंबे समय से चले आ रहे पर्यावरणीय मुद्दों के साथ, झील के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (fragile ecosystem) को खतरा पैदा कर रहा है।
पृष्ठभूमि
मणिपुर के मोइरांग बेसिन (Moirang basin) में स्थित लोकटक झील, लगभग 287 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें फुमदी (phumdis) नामक अद्वितीय तैरते हुए द्वीप शामिल हैं - जो मिट्टी और वनस्पति के मोटे आवरण हैं, और जो घरों तथा वन्यजीवों को सहारा देते हैं। फुमदी की मोटाई और मानवीय गतिविधि के आधार पर झील को जोन्स (zones) में बांटा गया है। यह दुनिया के एकमात्र तैरते हुए राष्ट्रीय उद्यान, कीबुल लामजाओ (Keibul Lamjao) का घर है, जो लुप्तप्राय संगाई हिरण (brow-antlered deer - Sangai) को आश्रय देता है। स्थानीय मैतेई (Meitei) और मछली पकड़ने वाले समुदाय भोजन, पानी, सिंचाई और पनबिजली (hydropower) के लिए झील पर निर्भर हैं।
झील के सामने आने वाले मुद्दे (Issues facing the lake)
- विस्थापित लोगों का आगमन: चल रहे जातीय संघर्ष (ethnic conflict) ने नए परिवारों को फुमदी पर बसने और झील में मछली पकड़ने के लिए प्रेरित किया है, जिससे स्थापित मछली पकड़ने वाले समुदायों द्वारा पारंपरिक रूप से प्रबंधित संसाधनों पर दबाव पड़ा है।
- पर्यावरणीय क्षरण (Environmental degradation): 1980 के दशक में इथाई बैराज (Ithai barrage) के निर्माण ने साल भर पानी के स्तर को बढ़ा दिया, जिससे फुमदी डूबने और पुनर्जीवित होने से रुक गए। इससे आवास की हानि, यूट्रोफिकेशन (eutrophication) और देशी मछली प्रजातियों में गिरावट आई है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभाव (Climate change impacts): बेमौसम भारी बारिश और ओलावृष्टि ने गाद (siltation) बढ़ा दी है और झील के आसपास के गांवों में पानी भर गया है। गर्म तापमान और बारिश के बदले हुए पैटर्न आर्द्रभूमि के नाजुक संतुलन के लिए खतरा हैं।
- रामसर मॉन्ट्रो रिकॉर्ड (Ramsar Montreux Record): इसकी बिगड़ती स्थिति के कारण, लोकटक झील को 1993 में खतरे वाली आर्द्रभूमियों के मॉन्ट्रो रिकॉर्ड में रखा गया था। संरक्षण के प्रयासों के बावजूद, प्रदूषण और अनियंत्रित विकास जारी है।
सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व (Cultural and ecological significance)
- यह झील 132 पौधों और 54 मछली प्रजातियों का समर्थन करती है और तापमान और वर्षा की चरम सीमाओं को कम करके स्थानीय जलवायु को नियंत्रित करती है।
- मणिपुर की दसवें हिस्से से अधिक आबादी अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से झील पर निर्भर है।
- मोइरांग के पास पारंपरिक त्यौहार, नृत्य और पवित्र स्थल मैतेई लोगों और झील के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
लोकटक झील का पारिस्थितिक पतन (ecological decline), सामाजिक संघर्ष और जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर, जैव विविधता और मानव कल्याण दोनों के लिए खतरा है। इस “मणिपुर की जीवन रेखा” (lifeline of Manipur) की सुरक्षा के लिए स्थायी प्रबंधन - जैसे मछली पकड़ने को विनियमित करना, फुमदी को बहाल करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना - आवश्यक है।