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Lower Kopili Project: असम जलविद्युत, स्वच्छ ऊर्जा और कोपिली नदी

Lower Kopili Project: असम जलविद्युत, स्वच्छ ऊर्जा और कोपिली नदी

चर्चा में क्यों?

13 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री ने मध्य असम में 120 मेगावाट (MW) की लोअर कोपिली जलविद्युत परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस रन-ऑफ-द-रिवर (run-of-river) योजना का उद्देश्य बिजली आपूर्ति में सुधार करना और क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

कोपिली नदी मेघालय की पहाड़ियों से निकलती है और ब्रह्मपुत्र में मिलने से पहले असम से होकर बहती है। यह असम में ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी तट की सबसे बड़ी सहायक नदी है और इसे लंबे समय से स्वच्छ बिजली (clean electricity) के संभावित स्रोत के रूप में देखा जाता रहा है। असम पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APGCL) ने अपनी पनबिजली क्षमता (hydropower capacity) के विस्तार के प्रयासों के तहत लोअर कोपिली परियोजना की योजना बनाई है। असम पावर सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम (Assam Power Sector Investment Programme) के तहत एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) के माध्यम से धन उपलब्ध कराया गया है। इसकी आधारशिला अक्टूबर 2021 में रखी गई थी।

परियोजना की विशेषताएं

  • यह परियोजना 120 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाली एक रन-ऑफ-द-रिवर योजना है, जिसमें प्रत्येक 30 मेगावाट की चार उत्पादन इकाइयों का उपयोग किया गया है। यह एक बड़ा जलाशय (reservoir) बनाए बिना नदी के प्रवाह का उपयोग करती है, जिससे व्यापक भूमि जलमग्नता (submergence) की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • पश्चिम कार्बी आंगलोंग (West Karbi Anglong) और दीमा हसाओ (Dima Hasao) जिलों में स्थित इस परियोजना में एक बांध (dam), एक बैराज (barrage), एक पावर हाउस (power house) और संबंधित ट्रांसमिशन लाइनें (transmission lines) शामिल हैं। निर्माण कार्य APGCL द्वारा केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की तकनीकी सहायता से किया जा रहा है।
  • विश्वसनीय बिजली पैदा करके, इस सुविधा से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (North-Eastern region) में ग्रिड स्थिरता (grid stability) में सुधार और औद्योगिक विकास एवं ग्रामीण विद्युतीकरण (rural electrification) को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

लाभ और चुनौतियां

  • यह परियोजना जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता को कम करके और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse-gas emissions) को कम करके भारत के स्वच्छ-ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देगी।
  • स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसरों और बुनियादी ढांचे (infrastructure) में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, वनों, वन्यजीवों और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता है, क्योंकि कोपिली बेसिन (Kopili basin) समृद्ध जैव विविधता (rich biodiversity) और स्वदेशी संस्कृतियों (indigenous cultures) की मेजबानी करता है।
  • रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएं मौसमी प्रवाह (seasonal flows) पर निर्भर करती हैं; इसलिए अधिकारियों को सूखे महीनों के दौरान उतार-चढ़ाव के लिए योजना बनानी चाहिए और जल का स्थायी उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए।

निष्कर्ष

लोअर कोपिली जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन असम की स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय विकास की खोज में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रभावी पर्यावरण सुरक्षा (environmental safeguards) और सामुदायिक भागीदारी (community engagement) इसके पूर्ण लाभों को प्राप्त करने की कुंजी होगी।

स्रोत: The Sentinel

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