Art and Culture

Masroor Rock-Cut Temples: हिमाचल विरासत, कांगड़ा और एलोरा

Masroor Rock-Cut Temples: हिमाचल विरासत, कांगड़ा और एलोरा

चर्चा में क्यों?

हिमाचल प्रदेश में मसरूर रॉक-कट मंदिर (Masroor rock‑cut temple) परिसर विरासत प्रेमियों और पर्यटकों का नए सिरे से ध्यान आकर्षित कर रहा है। अक्सर "हिमालय का एलोरा (Ellora of the Himalayas)" कहे जाने वाले इस स्थल पर प्रारंभिक मध्ययुगीन भारतीय रॉक-कट वास्तुकला (rock‑cut architecture) का प्रदर्शन होता है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO’s World Heritage list) में संभावित समावेशन के लिए हाइलाइट किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

ब्यास नदी (Beas River) के पास कांगड़ा घाटी (Kangra Valley) में स्थित, मसरूर परिसर को 8वीं शताब्दी के आसपास एक ही बलुआ पत्थर (sandstone) की चट्टान से उकेरा गया था। इसका मुख उत्तर-पूर्व में बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वतमाला (Dhauladhar range) की ओर है और यह मंदिर वास्तुकला की उत्तर भारतीय नागर शैली (North Indian Nagara style) का अनुसरण करता है। शिव को समर्पित मुख्य मंदिर, छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है, जो एक सममित चौकोर योजना (symmetric square plan) में है, जिसके सामने एक पवित्र कुंड (sacred pool) है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि इस स्थल की पहली रिपोर्ट 1913 में ब्रिटिश इंजीनियर हेनरी शटलवर्थ (Henry Shuttleworth) ने की थी और बाद में 1915 में पुरातत्वविद् हेरोल्ड हरग्रीव्स (Harold Hargreaves) द्वारा इसका सर्वेक्षण किया गया था।

कलात्मक विशेषताएं

  • एकाश्म डिजाइन (Monolithic design): पूरे परिसर को एक ही चट्टान से तराशा गया था, जिससे यह भारत के कुछ मुक्त-खड़े रॉक-कट मंदिर समूहों में से एक बन गया। प्रत्येक मंदिर में एक चौकोर आधार होता है जिसके ऊपर एक घुमावदार शिखर (curvilinear shikhara) होता है।
  • प्रतिमा विज्ञान (Iconography): नक्काशी में वैदिक और पौराणिक परंपराओं (Vedic and Puranic traditions) के देवताओं को दर्शाया गया है, जिनमें शिव, विष्णु और देवी के रूप शामिल हैं। कई नक्काशी भूकंपों से क्षतिग्रस्त हो गई थीं, फिर भी जीवित पैनल अभी भी जटिल कारीगरी दिखाते हैं।
  • अधूरे प्रवेश द्वार (Unfinished entrances): तीन प्रवेश द्वार—उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पश्चिम—पूरे हो चुके हैं, जबकि चौथे प्रवेश द्वार के साक्ष्य से पता चलता है कि परिसर कभी पूरा नहीं हुआ था।

महत्व

मसरूर पश्चिमी हिमालय में प्रारंभिक मध्ययुगीन मंदिर वास्तुकला का एक दुर्लभ उदाहरण है। कलात्मक शैलियों और साहसिक इंजीनियरिंग (bold engineering) का इसका मिश्रण उस काल की महानगरीय संस्कृति (cosmopolitan culture) को दर्शाता है। जीर्णोद्धार और संरक्षण (Restoration and conservation) के प्रयास जारी हैं। नाजुक नक्काशी और आसपास के पर्यावरण की रक्षा के लिए साइट पर पर्यटन का सावधानीपूर्वक प्रबंधन किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

मसरूर रॉक-कट मंदिर प्रारंभिक मध्यकालीन भारत की वास्तुकला और धार्मिक विरासत की एक झलक प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे रुचि बढ़ती है, स्थानीय अधिकारियों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) को आगंतुकों की पहुँच के साथ संरक्षण को संतुलित करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। बढ़ती जागरूकता मंदिर परिसर को वैश्विक विरासत सूचियों (global heritage lists) में शामिल करने में सहायता कर सकती है।

स्रोत

TOI

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