विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Mission MITRA Gaganyaan: ISRO, एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान और उच्च ऊंचाई अनुरूप अध्ययन

Mission MITRA Gaganyaan: ISRO, एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान और उच्च ऊंचाई अनुरूप अध्ययन

चर्चा में क्यों?

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO और Indian Air Force’s Institute of Aerospace Medicine ने Mission MITRA (mental and physical Integrated Training for realistic Assessment) नामक एक अद्वितीय high-altitude analogue mission को पूरा किया। यह परीक्षण 2 और 9 अप्रैल 2026 के बीच लेह (Leh) में आयोजित किया गया था, जिसमें अंतरिक्ष के समान hypoxic, ठंडे और अलग-थलग (isolated) परिस्थितियों में चार Gaganyaan अंतरिक्ष यात्री-नामित (astronaut-designates) की मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति (resilience) का परीक्षण किया गया। समाचार आउटलेट्स ने मिशन के सफल समापन और भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (human spaceflight programme) के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

पृष्ठभूमि

भारत इस दशक के अंत में अपना पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, Gaganyaan लॉन्च करने की योजना बना रहा है। चालक दल (crew) की सुरक्षा और प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए, ISRO analogue अध्ययन आयोजित करता है जो पृथ्वी पर अंतरिक्ष-जैसे वातावरण का अनुकरण (simulate) करते हैं। Mission MITRA एक ऐसा ही अध्ययन था जिसे यह देखने के लिए डिज़ाइन किया गया था कि ऑक्सीजन और सुख-सुविधाओं से वंचित होने पर छोटी टीमें कैसे व्यवहार करती हैं और संवाद करती हैं। यह परीक्षण लेह के पास लगभग 3 500 मीटर की ऊंचाई पर एक high-altitude शिविर में आयोजित किया गया था, जहां हाइपोक्सिया (hypoxia), अत्यधिक ठंड और अलगाव (isolation) अंतरिक्ष यात्रा के कुछ तनावों की नकल करते हैं।

मिशन के मुख्य पहलू

  • प्रतिभागी और सेटिंग: चार Gaganyaan अंतरिक्ष यात्री-नामित एक केंद्रीय नियंत्रण स्टेशन से जुड़े दो अलग-थलग केबिनों में रहे। शिविर का निर्माण बेंगलुरु स्थित फर्म Protoplanet द्वारा किया गया था और यह सौर ऊर्जा (solar arrays) द्वारा संचालित था। तापमान शून्य से नीचे चला गया, और ऑक्सीजन का स्तर समुद्र के स्तर की तुलना में काफी कम था।
  • Simulated गतिविधियां: चालक दल ने simulated स्पेसवॉक किया, वैज्ञानिक उपकरणों का संचालन किया, मिशन नियंत्रण (mission control) के साथ संचार का अभ्यास किया और उपकरणों की मरम्मत जैसे मैनुअल कार्य किए। दैनिक दिनचर्या को शारीरिक और संज्ञानात्मक तनाव (cognitive stress) थोपने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • निगरानी और डेटा संग्रह: Institute of Aerospace Medicine के डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण संकेतों, संज्ञानात्मक प्रदर्शन, नींद के पैटर्न और टीम के इंटरैक्शन की निगरानी की। रिमोट सपोर्ट टीमों ने real-time समस्या समाधान और निर्णय लेने का अभ्यास किया।
  • मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्व: Mission MITRA से प्राप्त डेटा Gaganyaan और भविष्य के लंबी अवधि के मिशनों के लिए life-support systems, क्रू चयन मानदंड और प्रशिक्षण मॉड्यूल के डिजाइन में काम आएगा। अलगाव और हाइपोक्सिया मूड और सहयोग को कैसे प्रभावित करते हैं, इसकी अंतर्दृष्टि (Insights) इंजीनियरों को ऐसे आवास और कार्यक्रम की योजना बनाने में मदद करेगी जो चालक दल के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं।

यह क्यों मायने रखता है

यह मिशन मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान में भारत की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है। पृथ्वी पर यथार्थवादी तनावों (realistic stressors) के अधीन अंतरिक्ष यात्रियों को रखकर, ISRO अंतरिक्ष में मनुष्यों को लॉन्च करने से पहले अपनी प्रक्रियाओं को परिष्कृत कर सकता है और चुनौतियों का अनुमान लगा सकता है। यह प्रयोग अंतरिक्ष अन्वेषण (space exploration) के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण में Indian Air Force और निजी उद्योग की सहयोगी भूमिका को भी उजागर करता है।

स्रोत: ISRO, The Times of India, India Today

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