समाचार में क्यों?
एक संयुक्त समिति ने राजस्थान की चंद्रलोई नदी (Chandraloi River) में प्रतिबंधित कीटनाशक एल्ड्रिन (aldrin) का पता लगाया। यह जांच कोटा के पास मगरमच्छों (mugger crocodiles) की मौत के बाद हुई, और वन विभाग (Forest Department) ने रसायन के पाए जाने को स्वीकार किया लेकिन जिम्मेदारी से इनकार किया। National Green Tribunal का मामला अभी लंबित है।
पृष्ठभूमि
दिसंबर 2024 के दौरान नदी में चार मगरमच्छ मृत पाए गए थे। पहले भी प्रदूषण ने इस जल प्रणाली में मगरमच्छों को प्रभावित किया था।
National Green Tribunal ने 19 दिसंबर 2024 को स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया। इसने मौतों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाई।
समिति में केंद्रीय और राज्य प्रदूषण-नियंत्रण अधिकारी शामिल थे, और वन्यजीव अधिकारियों तथा Wildlife Institute of India के एक प्रतिनिधि ने भी भाग लिया।
सदस्यों ने 24 और 25 जनवरी 2025 को क्षेत्र का निरीक्षण किया, और उनके जल विश्लेषण में एल्ड्रिन, जो एक निषिद्ध ऑर्गेनोक्लोरिन कीटनाशक (organochlorine pesticide) है, पाया गया।
मगरमच्छ (mugger crocodile) क्या है?
मगर या मार्श मगरमच्छ का वैज्ञानिक नाम Crocodylus palustris है। यह भारत की तीन मूल मगरमच्छ प्रजातियों में से एक है।
- मगरमच्छ (mugger) मुख्य रूप से मीठे पानी की नदियों, झीलों और जलाशयों में रहता है, और खारे पानी का मगरमच्छ (saltwater crocodile) मुहाने, मैंग्रोव और तटीय जल का उपयोग करता है।
- घड़ियाल (gharial) नदी विशेषज्ञ है जिसका थूथन बहुत संकीर्ण होता है।
पहचान और व्यवहार
- जीवित मगरमच्छों में मगर (mugger) का थूथन सबसे चौड़ा होता है, और इसकी एक मजबूत पूंछ और आंशिक रूप से जालीदार पैर होते हैं।
- यह मीठे पानी के दलदल, नदियों, झीलों और कृत्रिम जलाशयों का उपयोग करता है, और जल निकाय सिकुड़ने पर यह जमीन पर यात्रा कर सकता है।
- मादाएं शुष्क मौसम के दौरान अंडे देने के लिए छेद खोदती हैं, और वयस्क मछलियां, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी खाते हैं।
यह प्रजाति दक्षिणी ईरान से होते हुए पाकिस्तान, भारत और नेपाल से लेकर श्रीलंका तक पाई जाती है। इसकी वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारत में है।
संरक्षण की स्थिति
- International Union for Conservation of Nature (IUCN) मगरमच्छ को Vulnerable के रूप में वर्गीकृत करता है।
- Convention on International Trade in Endangered Species (CITES) इसे Appendix I में रखता है।
- भारत इस प्रजाति को Wildlife Protection Act की Schedule I में सूचीबद्ध करता है।
CITES Appendix I आम तौर पर जंगली नमूनों के अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक व्यापार पर प्रतिबंध लगाता है। Schedule I भारतीय कानून के तहत सबसे मजबूत वन्यजीव सुरक्षा प्रदान करता है।
एल्ड्रिन (aldrin) क्या है?
एल्ड्रिन एक कृत्रिम ऑर्गेनोक्लोरिन कीटनाशक (organochlorine insecticide) है, और किसान कभी दीमक और मिट्टी के कीड़ों के खिलाफ इसका उपयोग करते थे।
ऑर्गेनोक्लोरिन बहुत धीरे-धीरे टूटते हैं, और पर्यावरण में प्रवेश करने के बाद एल्ड्रिन डायल्ड्रिन (dieldrin) में बदल सकता है।
- Persistance का अर्थ है कि रसायन लंबी अवधि तक बना रहता है; Bioaccumulation का अर्थ है कि यह एक जीव के अंदर जमा हो जाता है।
- Biomagnification का अर्थ है कि खाद्य श्रृंखला के साथ सांद्रता (concentrations) बढ़ जाती है।
शीर्ष शिकारियों (Top predators) को दूषित शिकार के माध्यम से उच्च खुराक मिल सकती है, और एल्ड्रिन मनुष्यों और वन्यजीवों के तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
एल्ड्रिन की कानूनी स्थिति
भारत एल्ड्रिन के निर्माण, आयात और उपयोग पर रोक लगाता है, और 1990 के दशक के दौरान इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित कर दिया गया था।
एल्ड्रिन मूल "Dirty Dozen" स्थायी जैविक प्रदूषकों (persistent organic pollutants) में भी शामिल था। Stockholm Convention इसे उन्मूलन (elimination) के लिए Annex A में रखता है।
जांच ने क्या स्थापित किया?
समिति ने स्थापित किया कि नदी के पानी में एल्ड्रिन मौजूद था। यह खोज अवैध उपयोग या पुराने संदूषण (contamination) के बारे में गंभीर सवाल उठाती है।
हालाँकि, फिश बायो-एस्से (fish bio-assay) परीक्षणों ने एकत्र किए गए पानी के नमूनों में उच्च जीवित रहने की दर दिखाई, और कई मगरमच्छ भी आवास में जीवित रहे।
कारण का अभी समाधान नहीं हुआ है। एल्ड्रिन का पता लगाना संदूषण साबित करता है। यह अकेले साबित नहीं करता है कि एल्ड्रिन ने हर मगरमच्छ की मौत का कारण बना, और जिम्मेदार स्रोत भी अज्ञात बना हुआ है।
वन विभाग ने तर्क दिया कि कीटनाशक नियंत्रण कृषि अधिकारियों का है, और इसने औद्योगिक प्रदूषण को प्रदूषण-नियंत्रण एजेंसियों की जिम्मेदारी के भीतर रखा।
कर्तव्यों का यह विभाजन समन्वित प्रतिक्रिया की जगह नहीं ले सकता है, और जांचकर्ताओं को अभी भी स्रोत का पता लगाने, नियमित निगरानी और वन्यजीव-स्वास्थ्य मूल्यांकन की आवश्यकता है।
मगरमच्छ उपयोगी पारिस्थितिक संकेतक (ecological indicators) क्यों हैं?
मगरमच्छ लंबे समय तक जीवित रहते हैं और उच्च खाद्य-श्रृंखला की स्थिति में होते हैं, और उनके ऊतक (tissues) समय के साथ जमा हुए लगातार संदूषण को दर्शा सकते हैं।
अचानक हुई मौतें पानी की गुणवत्ता या शिकार में बदलाव को उजागर कर सकती हैं। एक उचित जांच में विष विज्ञान (toxicology), पैथोलॉजी और जल परीक्षण शामिल होना चाहिए।
निष्कर्ष
चंद्रलोई का मामला एक गंभीर प्रदूषण-नियंत्रण अंतर को उजागर करता है, और एल्ड्रिन का पता चलने की पुष्टि हुई है, जबकि सटीक कारण जांच के अधीन है। प्रभावी कार्रवाई के लिए वन्यजीव, कृषि और प्रदूषण एजेंसियों के बीच सहयोग की आवश्यकता है।