चर्चा में क्यों?
भारत के राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन (National One Health Mission) की वैज्ञानिक संचालन समिति (Scientific Steering Committee) की पांचवीं बैठक में, अधिकारियों ने एकीकृत निगरानी (integrated surveillance) को मजबूत करने और उभरते रोगजनकों (emerging pathogens) का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial‑intelligence) सक्षम सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में प्रयोगशालाओं के नेटवर्क बनाने और मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को जोड़ने वाली प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (early‑warning systems) की स्थापना पर प्रगति की समीक्षा की गई।
पृष्ठभूमि
वन हेल्थ (One Health) एक ऐसा दृष्टिकोण है जो मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण की परस्पर संबद्धता (interconnectedness) को पहचानता है। अधिकांश उभरते संक्रामक रोग (emerging infectious diseases), जिनमें COVID-19 और इबोला शामिल हैं, जानवरों से उत्पन्न होते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए स्वास्थ्य, कृषि, वन्यजीव, वानिकी और जलवायु जैसे क्षेत्रों में सहयोग की आवश्यकता है।
ऐसा सहयोग बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा 2024 में राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन शुरू किया गया था। यह प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (Office of the Principal Scientific Adviser) द्वारा समर्थित है और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। इसका प्रशासन दो-स्तरीय (two‑tiered) है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति (Executive Committee) नीति और संसाधनों की देखरेख करती है, जबकि प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता वाली वैज्ञानिक संचालन समिति (Scientific Steering Committee) तकनीकी रणनीति का मार्गदर्शन करती है। फरवरी 2024 में, सरकार ने मिशन का संचालन करने के लिए नागपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वन हेल्थ (National Institute of One Health) की स्थापना को मंजूरी दी।
प्रमुख घटक (Key Components)
- एकीकृत निगरानी (Integrated surveillance): यह मिशन मनुष्यों, जानवरों और पर्यावरण में वायरस, बैक्टीरिया और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (antimicrobial resistance) की निगरानी के लिए उच्च-नियंत्रण प्रयोगशालाओं (high‑containment laboratories - BSL-3/4) और मेटाजीनोमिक्स/जीनोमिक्स हब (metagenomics/genomics hubs) का नेटवर्क बना रहा है। चिड़ियाघरों, पक्षी अभयारण्यों और पशु बाजारों में निगरानी शुरू हो गई है।
- प्रारंभिक चेतावनी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Early‑warning and AI): टीमें विविध डेटा सेटों का विश्लेषण करने और असामान्य बीमारी पैटर्न को चिह्नित करने के लिए AI-सक्षम टूल विकसित कर रही हैं। फ़ेडरेटेड डेटा प्लेटफ़ॉर्म (Federated data platforms) निजता बनाए रखते हुए मंत्रालयों और राज्यों में जानकारी साझा करने की अनुमति देंगे।
- क्षमता निर्माण और अनुसंधान (Capacity building and research): मिशन डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने, टीकों (vaccines) और उपचारों (therapeutics) में अनुसंधान का समर्थन करने और “प्लग-एंड-प्ले” (plug‑and‑play) वैक्सीन प्लेटफॉर्म विकसित करने की योजना बना रहा है जो नए रोगजनकों (pathogens) के अनुकूल हो सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम महामारी विज्ञान (epidemiology), पशु चिकित्सा विज्ञान (veterinary science) और पर्यावरण विज्ञान में कुशल कार्यबल का निर्माण करेंगे।
- सामुदायिक जुड़ाव (Community engagement): आउटरीच कार्यक्रम (Outreach programmes) सुरक्षित पशु-पालन प्रथाओं, वन्यजीव संरक्षण और निगरानी में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। जागरूकता अभियानों का उद्देश्य ज़ूनोटिक ट्रांसमिशन (zoonotic transmission) के जोखिम को कम करना है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ज़ूनोटिक रोगों और जलवायु-संचालित स्वास्थ्य जोखिमों (climate‑driven health risks) के बढ़ते खतरे के प्रति भारत की प्रतिक्रिया है। विविध क्षेत्रों को एक साथ लाकर, आधुनिक प्रयोगशालाओं में निवेश करके और डेटा साइंस का उपयोग करके, यह मिशन एक ऐसी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (early‑warning system) बनाना चाहता है जो प्रकोपों (outbreaks) को महामारी बनने से पहले रोक सके। इसकी सफलता के लिए निरंतर राजनीतिक समर्थन और मंत्रालयों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।