समाचार में क्यों?
युवा मामले और खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) ने मई 2026 में National Sports Governance Board Rules और National Sports Tribunal Rules को अधिसूचित किया। ये नियम National Sports Governance Bill, 2025 को क्रियान्वित करते हैं, जो भारत के खेल निकायों के लिए एक नया नियामक ढांचा स्थापित करते हैं और खेल विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित न्यायाधिकरण बनाते हैं।
पृष्ठभूमि
भारतीय खेलों की लंबे समय से अपारदर्शी प्रशासन, राजनीतिकरण और एथलीटों के अधिकारों की अपर्याप्त सुरक्षा के लिए आलोचना की जाती रही है। National Sports Governance Bill का उद्देश्य खेल निकायों को पेशेवर बनाना, एथलीट प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और घरेलू नियमों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। यह अलग-अलग ओलंपिक और पैरालंपिक समितियां बनाने का प्रस्ताव करता है, और इसके लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय खेल संघों में खिलाड़ियों (कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य) और महिलाओं (न्यूनतम 25 प्रतिशत) के लिए कोटा के साथ निर्वाचित कार्यकारी समितियां हों। यह विधेयक एक नैतिकता आयोग, एक एथलीट कल्याण आयोग और सख्त डोपिंग रोधी (anti-doping), मैच-फिक्सिंग रोधी और उत्पीड़न रोधी संहिताओं की भी परिकल्पना करता है।
National Sports Governance Board
- संरचना: बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और दो सदस्य शामिल होंगे। इसमें खेल प्रशासन, कानून और एथलीट कल्याण के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
- कार्य: यह राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता प्रदान करेगा, मान्यता प्राप्त संघों का एक रजिस्टर बनाए रखेगा, पात्रता मानदंड और शासन मानक तैयार करेगा, और नैतिकता संहिताओं के पालन की निगरानी करेगा। बोर्ड उन निकायों को निलंबित या गैर-मान्यता प्राप्त कर सकता है जो इन मानकों का उल्लंघन करते हैं।
- निगरानी और मार्गदर्शन: यह चयन परीक्षणों, लैंगिक समानता, एथलीट मुआवजे, डोपिंग रोधी उपायों और उत्पीड़न से सुरक्षा जैसे मामलों पर दिशा-निर्देश जारी करेगा। बोर्ड संघों में ऑडिट और जांच का आदेश दे सकता है और सुधारों को लागू करने में राज्य खेल बोर्डों की सहायता कर सकता है।
National Sports Tribunal
- उद्देश्य: ट्रिब्यूनल खेलों में चयन, पात्रता, डोपिंग, अनुबंध या अनुशासनात्मक कार्रवाई से उत्पन्न होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए एक तेज़, लागत प्रभावी मंच प्रदान करेगा।
- शक्तियां: इसके पास गवाहों को बुलाने, साक्ष्य मांगने और निर्णय जारी करने के लिए एक दीवानी अदालत (civil court) का अधिकार होगा। इसके निर्णयों के खिलाफ आम तौर पर Supreme Court में अपील की जा सकेगी, सिवाय उन मामलों के जो अंतर्राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा शासित होते हैं, जहाँ अपील खेल पंचाट न्यायालय (Court of Arbitration for Sport) में जा सकती है।
- सदस्यता: ट्रिब्यूनल में एक अध्यक्ष और खेल कानून और प्रशासन में विशेषज्ञता वाले कम से कम दो सदस्य शामिल होंगे। जटिलता के आधार पर मामलों की सुनवाई आम तौर पर एक या अधिक सदस्यों की पीठ द्वारा की जाएगी।
निष्कर्ष
National Sports Governance Board और Tribunal की स्थापना पारदर्शी, एथलीट-केंद्रित खेल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी सफलता राजनीतिक प्रभाव से स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, संघों में जवाबदेही लागू करने और एथलीटों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने पर निर्भर करेगी। यदि प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो सुधार भारतीय खेल को ऊपर उठा सकते हैं और इसके हितधारकों की रक्षा कर सकते हैं।