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NRAA: जंगली चावल संरक्षण, REWARD Programme और कृषि

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समाचार में क्यों? National Rainfed Area Authority (NRAA) को हाल ही में असम में जंगली चावल के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयासों और विश्व बैंक समर्थित REWARD कार्यक्रम के तहत बेहतर जलसंभर प्रबंधन (watershed management) पर परामर्श का नेतृत्व करने के लिए मान्यता दी गई है।

पृष्ठभूमि

NRAA की स्थापना 3 नवंबर 2006 को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक सलाहकार निकाय के रूप में की गई थी। इसे वर्षा सिंचित और शुष्क भूमि कृषि क्षेत्रों के सतत विकास पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए बनाया गया था, जो भारत के आधे से अधिक खेती वाले क्षेत्र को कवर करते हैं। प्राधिकरण एक दो-स्तरीय संरचना के माध्यम से कार्य करता है जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में एक गवर्निंग बोर्ड (ग्रामीण विकास मंत्री सह-अध्यक्ष के रूप में) और एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता वाली एक कार्यकारी समिति शामिल होती है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

जनादेश और कार्य

  • रणनीतिक योजना: NRAA वर्षा सिंचित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय रणनीतियाँ और परिप्रेक्ष्य योजनाएँ तैयार करता है और मंत्रालयों में योजनाओं के लिए सामान्य दिशानिर्देश विकसित करता है।
  • समन्वय: यह कृषि, बागवानी, पशुधन और जलसंभर प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रमों का समन्वय करता है ताकि संसाधनों का अभिसरण सुनिश्चित हो और दोहराव से बचा जा सके।
  • क्षेत्रों को प्राथमिकता देना: प्राधिकरण उन वर्षा सिंचित जिलों की पहचान करता है जिन्हें तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और एकीकृत जलसंभर विकास कार्यक्रमों को डिज़ाइन करता है जो फसलों, पशुधन और बागवानी को जोड़ते हैं।
  • कमियों को दूर करना: यह वर्षा सिंचित क्षेत्रों में इनपुट, ऋण, प्रौद्योगिकी प्रसार और बीमा कवरेज में कमी का आकलन करता है और कार्यान्वयन एजेंसियों को सलाह देता है।
  • क्षमता निर्माण और अनुसंधान: NRAA राज्य और जिला अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए योजनाएँ विकसित करता है, राष्ट्रीय और राज्य संस्थानों को मजबूत करता है, और वर्षा सिंचित कृषि के लिए अनुसंधान एजेंडा निर्धारित करता है।

हाल की पहल

जून 2026 में, NRAA ने REWARD कार्यक्रम के तहत बेहतर जलसंभर प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों को परिष्कृत करने के लिए एक राष्ट्रीय परामर्श बैठक का आयोजन किया। बैठक में भूमि संसाधन विभाग के अधिकारियों, विश्व बैंक के प्रतिनिधियों, कंसोर्टियम भागीदारों और कर्नाटक व ओडिशा के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया। जलसंभर परियोजनाओं के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन रिमोट-सेंसिंग डेटा, निर्णय-समर्थन प्रणाली (decision-support systems) और प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यक्रम में सामुदायिक भागीदारी, निजी क्षेत्र की भागीदारी और परियोजना के बाद स्थिरता उपायों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

निष्कर्ष

National Rainfed Area Authority वर्षा सिंचित कृषि के लिए भारत के ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करता है। नीति का मार्गदर्शन करके, कार्यक्रमों का समन्वय करके और वैज्ञानिक जलसंभर प्रबंधन को बढ़ावा देकर, इसका उद्देश्य अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में रहने वाले लाखों किसानों के लिए कृषि उत्पादकता, जल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन में सुधार करना है।

स्रोत: Press Information Bureau (2026)

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