विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Oleum Gas Leak: बोईसर घटना और सल्फ्यूरिक एसिड

Oleum Gas Leak: बोईसर घटना और सल्फ्यूरिक एसिड

चर्चा में क्यों?

2 मार्च 2026 को महाराष्ट्र के बोईसर (Boisar) में एक रासायनिक इकाई में ओलियम गैस (oleum gas) के एक बड़े रिसाव के कारण स्कूली छात्रों और कारखाने के कर्मचारियों सहित 2,600 से अधिक लोगों को निकालना पड़ा। इस घटना ने ओलियम के खतरनाक गुणों को ध्यान में लाया और सख्त औद्योगिक सुरक्षा उपायों (industrial safety measures) की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

पृष्ठभूमि

ओलियम सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄) में घुले सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO₃) का एक समाधान है। यह सल्फ्यूरिक एसिड के निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली संपर्क प्रक्रिया (contact process) के माध्यम से निर्मित होता है। भंग SO₃ की मात्रा के आधार पर, ओलियम रंगहीन से हल्के पीले रंग का होता है और इसे अक्सर "फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड" कहा जाता है क्योंकि यह हवा के संपर्क में आने पर तीखे SO₃ धुएं छोड़ता है।

गुण और अनुप्रयोग

  • अत्यधिक प्रतिक्रियाशील (Highly reactive): ओलियम में अतिरिक्त SO₃ होता है, जो इसे सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड की तुलना में अधिक प्रतिक्रियाशील बनाता है। यह आसानी से कार्बनिक पदार्थों को निर्जलित (dehydrates) करता है और पानी या दहनशील पदार्थों के संपर्क में आने पर दहन (combustion) का कारण बन सकता है।
  • औद्योगिक उपयोग: यह उच्च सांद्रता वाले सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन के लिए एक मध्यवर्ती (intermediate) के रूप में कार्य करता है और इसका उपयोग विस्फोटक, रंजक (dyes), डिटर्जेंट और फार्मास्यूटिकल्स के निर्माण में किया जाता है। इसकी उच्च चिपचिपाहट (viscosity) और निर्जलीकरण शक्ति इसे कुछ रासायनिक संश्लेषणों (chemical syntheses) में उपयोगी बनाती है।
  • खतरनाक प्रकृति: ओलियम अत्यधिक संक्षारक (corrosive) है और त्वचा और आंखों में गंभीर जलन पैदा कर सकता है। इसके धुएं को अंदर लेने से श्वसन मार्ग (respiratory tract) को नुकसान हो सकता है। हैंडलिंग के लिए विशेष उपकरण और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।

बोईसर गैस रिसाव की घटना

यह रिसाव मुंबई के पास बोईसर MIDC क्षेत्र में एक औद्योगिक इकाई में 2,500 लीटर के ओलीम टैंक से हुआ। तेज हवाओं ने लगभग 5 किमी के दायरे में घने सफेद धुएं को फैला दिया, जिससे अधिकारियों को स्कूली बच्चों और श्रमिकों को निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और रासायनिक विशेषज्ञों की टीमों ने लीक होने वाले टैंक का पता लगाया, धुएं को रोकने के लिए सैंडबैग (sandbags) तैनात किए और साइट में प्रवेश करने के लिए स्व-निहित श्वास उपकरण (self-contained breathing apparatus) का इस्तेमाल किया। तीन लोगों ने आंखों में मामूली जलन की सूचना दी, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं आई।

निष्कर्ष

ओलियम रासायनिक उद्योगों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी अत्यधिक प्रतिक्रियाशीलता और संक्षारकता (corrosiveness) कठोर सुरक्षा उपायों की मांग करती है। बोईसर की घटना खतरनाक पदार्थों से निपटने के दौरान उद्योगों को उचित भंडारण, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (emergency response systems) बनाए रखने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है।

स्रोत: The Hindu

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