Economy

OSOP Initiative: भारतीय रेलवे, स्थानीय शिल्प और कारीगर

OSOP Initiative: भारतीय रेलवे, स्थानीय शिल्प और कारीगर

चर्चा में क्यों?

रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) ने बताया है कि 2,300 से अधिक 'एक स्टेशन एक उत्पाद' (One Station One Product - OSOP) आउटलेट अब भारत भर के 2,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर काम कर रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य स्टेशनों पर स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों (self‑help groups) के लिए समर्पित खुदरा स्थान प्रदान करना है, जिससे यात्रा केंद्रों को क्षेत्रीय शिल्प और उपज के बाज़ारों में बदल दिया जा सके।

पृष्ठभूमि

2022-23 के केंद्रीय बजट में घोषित, OSOP स्वदेशी उत्पादों को प्रदर्शित करके "वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local)" अभियान का समर्थन करने के लिए भारतीय रेलवे को प्रोत्साहित करता है। 19 स्टेशनों पर 15-दिवसीय सफल पायलट के बाद, इस योजना को देश भर में बढ़ाया गया। स्टॉल मामूली शुल्क पर रोटेशनल आधार (rotational basis) पर आवंटित किए जाते हैं और रेलवे डिवीजनों द्वारा राज्य एजेंसियों, स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के समन्वय में प्रबंधित किए जाते हैं।

प्रमुख पहलू

  • बाजार पहुंच (Market access): OSOP कारीगरों, बुनकरों, किसानों और महिला समूहों को लाखों यात्रियों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन्हें हथकरघा वस्त्र (handloom textiles), पेंटिंग, खिलौने और क्षेत्रीय व्यंजनों जैसे स्थानीय उत्पादों को बेचने के लिए एक मंच मिलता है।
  • सांस्कृतिक प्रदर्शन (Cultural showcase): प्रत्येक स्टेशन अपने क्षेत्र की पहचान को उजागर करता है। उदाहरणों में तमिलनाडु के तेनकासी जंक्शन (Tenkasi Junction) पर बेंत (cane) के उत्पाद, बिहार के पटना स्टेशन (Patna Station) पर मधुबनी पेंटिंग (Madhubani paintings) और राजस्थान के जयपुर जंक्शन (Jaipur Junction) पर सांगानेरी प्रिंट (Sanganeri prints) शामिल हैं।
  • समावेशी भागीदारी (Inclusive participation): स्वयं सहायता समूहों के कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। यह योजना दिव्यांगजन उद्यमियों (Divyangjan entrepreneurs) को भी समायोजित करती है और न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित करती है।
  • स्थायी आजीविका (Sustainable livelihoods): पारंपरिक शिल्पों को रेलवे बुनियादी ढांचे से जोड़कर, OSOP विरासत कौशल (heritage skills) को संरक्षित करते हुए सामुदायिक आय का समर्थन करता है। इस योजना की सफलता अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की पहल को प्रेरित कर सकती है।

निष्कर्ष

'एक स्टेशन एक उत्पाद' पहल यह प्रदर्शित करती है कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (public infrastructure) स्थानीय उद्यमों को कैसे बढ़ावा दे सकता है। जैसे-जैसे OSOP आउटलेट्स का नेटवर्क फैलता है, यह कारीगरों के लिए अवसर पैदा करता है और यात्रा में सांस्कृतिक समृद्धि (cultural richness) जोड़ता है। इन सूक्ष्म बाज़ारों (micro‑marketplaces) की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक अवधि और समर्थन की आवश्यकता होगी।

स्रोत

PIB

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