खबरों में क्यों?
कंबोडिया-थाईलैंड सीमा पर स्थित 11वीं सदी के प्रेह विहेयर (Preah Vihear) मंदिर को दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए सीमा संघर्ष के दौरान काफी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने इस स्थल को आगंतुकों के लिए बंद कर दिया है और मरम्मत की आवश्यकता का आकलन कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
प्रेह विहेयर मंदिर डांगरेक पर्वत (Dangrek Mountains) में 525 मीटर ऊंची चट्टान के ऊपर स्थित है। हिंदू भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर खमेर साम्राज्य (Khmer Empire) के स्वर्ण युग के दौरान बनाया गया था। लंबे रास्तों (causeways) से जुड़े अभयारण्यों की एक श्रृंखला माउंट मेरु (Mount Meru) का प्रतिनिधित्व करती है, जो देवताओं का पौराणिक निवास स्थान है। फ्रांसीसी औपनिवेशिक सर्वेक्षकों ने 1904 और 1907 के बीच खींचे गए मानचित्रों पर इस मंदिर को कंबोडिया के अंदर रखा था। थाईलैंड ने इस स्थान पर विवाद किया, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) ने 1962 में फैसला सुनाया कि यह मंदिर कंबोडिया का है। यूनेस्को ने 2008 में प्रेह विहेयर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया। इसके बावजूद, संप्रभुता संबंधी विवाद जारी रहे, जिसके कारण सीमा पर रुक-रुक कर झड़पें होती रहीं।
वर्तमान स्थिति
- क्षति की सीमा: 2025 में दो दौर की झड़पों में गोलियों के सैकड़ों निशान और दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर के कुछ हिस्सों को स्थिर नहीं किया गया तो वे ढह सकते हैं।
- स्थल बंद: अस्थिर संरचनाओं और क्षेत्र में बिना फटे हथियारों (unexploded ordnance) के कारण पर्यटन को निलंबित कर दिया गया है। स्मारक की सुरक्षा के लिए संरक्षण कार्यकर्ता और सैनिक घटनास्थल पर मौजूद हैं।
- पुनर्स्थापना योजना: कंबोडियाई अधिकारियों का अनुमान है कि मरम्मत में 20-30 साल लगेंगे। पहले चरण में पांच से दस वर्षों में नींव को स्थिर किया जाएगा, जिसके बाद पूरी बहाली होगी। बिना फटे हथियारों को हटाना एक बड़ी चुनौती है।
महत्व
- सांस्कृतिक विरासत: प्रेह विहेयर खमेर वास्तुकला और धार्मिक कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका संरक्षण कंबोडियाई पहचान और वैश्विक विरासत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- राजनीतिक तनाव: यह मंदिर कंबोडिया और थाईलैंड में राष्ट्रवादी भावनाओं का प्रतीक बना हुआ है। स्मारक की सुरक्षा के लिए सीमा विवादों का शांतिपूर्ण समाधान आवश्यक होगा।
- पर्यटन और अर्थव्यवस्था: यह मंदिर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है और संघर्ष की कीमत भी उजागर होती है।
स्रोत: MSN