पर्यावरण

Psechrus ntu & phenshunyu: नागालैंड में नई मकड़ी प्रजातियां

Psechrus ntu & phenshunyu: नागालैंड में नई मकड़ी प्रजातियां

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India) के प्राणीशास्त्रियों (zoologists) ने नागालैंड में मकड़ी की दो नई प्रजातियों की खोज की है। स्थानीय गांवों के नाम पर Psechrus ntu और Psechrus phenshunyu नाम की ये प्रजातियां बड़ी चादर बुनने वाली मकड़ियों (large sheet-weaving spiders) के परिवार से संबंधित हैं। इन खोजों की घोषणा व्हिप बिच्छू (whip scorpions) पर एक संशोधित अध्ययन के साथ की गई थी।

पृष्ठभूमि

जीनस (genus) Psechrus में ऐसी मकड़ियां शामिल हैं जो अक्सर झरनों या नम वन वातावरण (damp forest environments) के पास बड़े क्षैतिज (horizontal) या थोड़े झुके हुए शीट वेब (sheet webs) बनाती हैं। इस अध्ययन से पहले, भारत में इस जीनस की मुट्ठी भर प्रजातियां थीं। कोलकाता में मुख्यालय वाला भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), देश की समृद्ध वनस्पतियों और जीवों (flora and fauna) का दस्तावेजीकरण करने के लिए नियमित रूप से जैव विविधता सर्वेक्षण (biodiversity surveys) आयोजित करता है। नई प्रजातियों की खोज से वैज्ञानिकों को पारिस्थितिक संबंधों (ecological relationships) को समझने में मदद मिलती है और संरक्षण योजना को सूचित किया जाता है।

मुख्य बिंदु

  • नई प्रजातियों के नाम: P. ntu और P. phenshunyu का नाम नागालैंड के Ntu और Phenshunyu गांवों के नाम पर रखा गया था। दोनों मकड़ियों के शरीर लम्बे (elongated) और पैर लंबे होते हैं। वे आर्द्र (humid), जंगली क्षेत्रों में बड़े शीट वेब बुनती हैं। शोधकर्ताओं ने पूर्वोत्तर भारत में पहली बार Psechrus himalayanus का भी दस्तावेजीकरण किया।
  • पारिस्थितिक अवलोकन (Ecological observations): अध्ययन में एक नर P. himalayanus को P. phenshunyu के साथ एक वेब साझा करते हुए एक दुर्लभ मामला दर्ज किया गया है, जो संभावित सामाजिक व्यवहार का सुझाव देता है। ये मकड़ियाँ कीड़ों का शिकार करती हैं और वन पारिस्थितिक तंत्र (forest ecosystems) में कीटों की आबादी को नियंत्रण करने में भूमिका निभाती हैं।
  • व्हिप स्कॉर्पियन का संशोधन: वैज्ञानिकों ने भारत में व्हिप बिच्छुओं (Thelyphonids) का एक वर्गीकरण संशोधन (taxonomic revision) भी पूरा किया। ये अरचिन्ड (arachnids) गैर-जहरीले (non-venomous) होते हैं और शिकारियों को रोकने के लिए सिरका जैसा एसिड (vinegar-like acid) छिड़कते हैं। संशोधन प्रजातियों की पहचान के लिए एक अद्यतन वर्गीकरण (updated classification) और कुंजी (keys) प्रदान करता है।

स्रोत

Times of India

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