समाचार में क्यों?
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (CSIR‑IIIM) 6-7 जून 2026 को भद्रवाह (Bhaderwah), जम्मू में चौथे लैवेंडर महोत्सव (Lavender Festival) की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन अरोमा मिशन (Aroma Mission) की "Purple Revolution" की सफलता का जश्न मनाता है, जिसने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लैवेंडर की खेती (lavender cultivation) के माध्यम से आजीविका को बदल दिया है।
पृष्ठभूमि
सुगंधित फसलों (aromatic crops) को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science & Technology) के अरोमा मिशन के तहत पर्पल रिवोल्यूशन (Purple Revolution) की शुरुआत हुई। CSIR‑IIIM के वैज्ञानिकों ने डोडा जिले (Doda district) के किसानों को कम मूल्य वाले मक्के (low‑value maize) से उच्च मूल्य वाले लैवेंडर (high‑value lavender) में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। समय के साथ 5,000 से अधिक किसानों ने लैवेंडर अपनाया, और पहाड़ी गांवों में आसवन इकाइयां (distillation units) स्थापित की गईं। भद्रवाह (Bhaderwah), जिसे कभी मक्के और विरल रोजगार (sparse employment) के लिए जाना जाता था, भारत की "लैवेंडर राजधानी (Lavender Capital)" के रूप में उभरा क्योंकि किसानों ने आवश्यक तेल (essential oil) और मूल्य वर्धित उत्पादों से काफी अधिक आय अर्जित की।
पर्पल रिवोल्यूशन के प्रमुख पहलू
- किसानों की भागीदारी: छोटे किसान और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (self‑help groups) सीमांत भूमि (marginal land) पर लैवेंडर की खेती करते हैं। CSIR वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण और इनपुट समर्थन (input support) ने गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री (quality planting material) और सर्वोत्तम प्रथाओं को सुनिश्चित किया है।
- प्रसंस्करण बुनियादी ढांचा (Processing infrastructure): पोर्टेबल और स्थिर आसवन इकाइयाँ (stationary distillation units) उत्पादकों को खेतों के करीब आवश्यक तेल निकालने की अनुमति देती हैं। यह तेल इत्र और कॉस्मेटिक (cosmetic) उद्योगों को बेचा जाता है, जबकि फूलों और अवशेषों (residue) का उपयोग शिल्प (crafts) और खाद (compost) के लिए किया जाता है।
- बाज़ार जुड़ाव और उद्यमिता (Market linkage and entrepreneurship): महोत्सव किसानों, स्टार्ट-अप्स और खरीदारों को एक साथ लाता है। यह साबुन, इत्र, चाय और अन्य लैवेंडर-आधारित उत्पादों को प्रदर्शित करता है, मूल्यवर्धन (value addition) और उद्यमिता (entrepreneurship) को प्रोत्साहित करता है। सरकारी एजेंसियां स्थिर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सहकारी समितियों (cooperatives) और विपणन चैनलों (marketing channels) का समर्थन करती हैं।
- सामाजिक-आर्थिक लाभ: लैवेंडर की खेती ने नौकरियां पैदा की हैं, पहाड़ियों से प्रवासन (migration) को धीमा किया है, महिलाओं को सशक्त बनाया है और आयातित सुगंधित तेलों (imported aromatic oils) पर निर्भरता को कम करके आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) में योगदान दिया है।
निष्कर्ष
पर्पल रिवोल्यूशन (Purple Revolution) यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक हस्तक्षेप (scientific interventions) और सामुदायिक भागीदारी (community participation) कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित कर सकती है। सुगंधित फसलों का विस्तार करके और एग्री-स्टार्ट-अप (agri‑start‑ups) को बढ़ावा देकर, भारत किसानों की आय बढ़ा सकता है, रोजगार पैदा कर सकता है और आवश्यक तेलों (essential oils) में एक विशिष्ट निर्यात उद्योग (niche export industry) का निर्माण कर सकता है。