चर्चा में क्यों?
दो दशकों से अधिक समय से, पूर्वी लद्दाख में मुध गांव (Mudh village) के निवासी रूडी शेलडक (ruddy shelduck) की रक्षा कर रहे हैं जो प्रजनन के लिए उनके उच्च ऊंचाई वाले आर्द्रभूमि (high-altitude wetlands) में आते हैं। उनके अनूठे संरक्षण प्रयासों ने प्रवासी पक्षियों के सामुदायिक प्रबंधन (community stewardship) के उदाहरण के रूप में ध्यान आकर्षित किया।
पृष्ठभूमि
रुडी शेलडक (Tadorna ferruginea), जिसे भारत में ब्राह्मणी बतख (Brahminy duck) के रूप में भी जाना जाता है, एक हल्के सिर और काले पूंछ वाले पंखों के साथ एक हड़ताली नारंगी-भूरा जलपक्षी (waterfowl) है। यह लगभग 58-70 सेमी लंबाई का होता है और इसके पंखों का फैलाव (wingspan) 110-135 सेमी होता है। यह प्रजाति मध्य एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में प्रजनन करती है और सर्दियों के दौरान हिमालय सहित दक्षिण एशिया में प्रवास (migrates) करती है। भारत में, इसके कुछ प्रजनन स्थलों में से एक लद्दाख के उच्च ऊंचाई वाले आर्द्रभूमि में है।
मुध गांव की पहल
2003 में, लद्दाख की यात्रा के दौरान, दलाई लामा ने मुध के ग्रामीणों से रूडी शेलडक की रक्षा की जिम्मेदारी लेने को कहा। जवाब में, 12 निवासियों ने पक्षियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए चा त्सोगस्पा (Cha Tsogspa - "पक्षी संघ") का गठन किया। हर साल जून और अगस्त के बीच, स्वयंसेवक (volunteers) शेलडक के परिवारों को मुध घाटी से सिंधु नदी तक ले जाते हैं। एक वयस्क पक्षी बत्तख के बच्चों का नेतृत्व करता है जबकि दूसरा पीछे की ओर जाता है, और ग्रामीण यह सुनिश्चित करते हैं कि वे सुरक्षित रूप से नदी तक पहुंचें।
चुनौतियां और परिणाम
- शिकारी नियंत्रण (Predator control): आवारा कुत्ते (Stray dogs) और प्रवासन मार्ग (migration route) के साथ अशांति चूजों (chicks) के लिए खतरा पैदा करती है। स्वयंसेवक क्षेत्र में गश्त करते हैं और इन जोखिमों को कम करने के लिए अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं।
- सामुदायिक सशक्तिकरण: इस पहल ने ग्रामीणों के बीच वन्यजीवों के बारे में जागरूकता को गहरा किया है और बौद्धों द्वारा पवित्र मानी जाने वाली प्रजाति की रक्षा करने में गर्व को बढ़ावा दिया है। एसोसिएशन पक्षियों के सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व पर जोर देकर सरकारी एजेंसियों के साथ संघर्षों का समाधान करता है।
- संरक्षण की स्थिति: रुडी शेलडक को IUCN रेड लिस्ट में "कम से कम चिंता (Least Concern)" के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन भारत में इसके प्रजनन स्थल सीमित हैं। सामुदायिक भागीदारी (Community involvement) यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि ये साइटें सुरक्षित रहें, जिससे आबादी में किसी भी गिरावट को रोका जा सके।
निष्कर्ष
मुध गांव की कहानी प्रदर्शित करती है कि कैसे स्थानीय समुदाय वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। व्यावहारिक प्रबंधन (practical stewardship) के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को जोड़कर, लद्दाख के ग्रामीणों ने एक ऐसा मॉडल बनाया है जिसका अनुकरण अन्य क्षेत्र प्रवासी प्रजातियों (migratory species) की रक्षा के लिए कर सकते हैं।
स्रोत: Down To Earth