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Sadhana Saptah: मिशन कर्मयोगी, क्षमता निर्माण और नागरिक केंद्रित शासन

Sadhana Saptah: मिशन कर्मयोगी, क्षमता निर्माण और नागरिक केंद्रित शासन

समाचार में क्यों?

सरकार ने Mission Karmayogi के हिस्से के रूप में 2 April से 8 April 2026 तक साधना सप्ताह (“Week of Practice”) शुरू किया। इस एक सप्ताह के कार्यक्रम ने सिविल सेवकों को नए कौशल से लैस करने और नागरिक-केंद्रित शासन (citizen-centric governance) को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और प्रशिक्षण संस्थानों को एक साथ लाया।

पृष्ठभूमि

Mission Karmayogi, जिसे औपचारिक रूप से National Programme for Civil Services Capacity Building के रूप में जाना जाता है, का अनावरण 2020 में भारत की नौकरशाही को नियम-आधारित (rule-based) संस्कृति से भूमिका-आधारित (role-based) संस्कृति में बदलने के लिए किया गया था। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म iGOT Karmayogi पर निरंतर सीखने के माध्यम से अधिकारियों में दक्षताओं (competencies) का निर्माण करना चाहता है। 2026 की शुरुआत तक इस प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत शिक्षार्थी थे और 8 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके थे।

साधना सप्ताह क्या है?

  • विषय (Themes): प्रत्येक दिन एक अलग "सूत्र" या मार्गदर्शक सिद्धांत पर केंद्रित था - प्रौद्योगिकी (डिजिटल उपकरणों का लाभ उठाना), परंपरा (भारत की प्रशासनिक विरासत से सीखना) और मूर्त परिणाम (Tangible Outcomes) (प्रशिक्षण को मापने योग्य परिणामों में बदलना)।
  • क्षमता-निर्माण पहल (Capacity-building initiatives): सप्ताह के दौरान, कई कार्यक्रमों को लॉन्च या हाइलाइट किया गया, जिसमें अधिकारियों को प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने के लिए Karmayogi Kshamata Connect, सामुदायिक जुड़ाव के लिए Rashtriya Jan Sewa Programme, प्रदर्शन ट्रैकिंग के लिए UNNATI Portal, और नए शामिल हुए रंगरूटों के साथ आउटरीच सत्र शामिल हैं।
  • मंत्रालय की भागीदारी: 100 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के सचिवों और क्षमता-निर्माण टीमों ने भाग लिया। उन्हें प्रमुख कार्यात्मक क्षेत्रों की पहचान करने, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने और अपेक्षित परिणामों को रेखांकित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
  • नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण: कार्यक्रम ने इस बात पर जोर दिया कि सभी प्रशिक्षणों को अंततः सेवा वितरण में सुधार करना चाहिए। तकनीकी कौशल के साथ-साथ सहानुभूति (empathy), संचार और सार्वजनिक परामर्श के पाठ्यक्रमों को प्रमुखता दी गई।

महत्व

  • मिशन संस्कृति को मजबूत करता है: प्रशिक्षण के लिए पूरे एक सप्ताह को समर्पित करके, सरकार ने संकेत दिया कि निरंतर सीखना सार्वजनिक सेवा का अभिन्न अंग है।
  • परिणामों पर ध्यान: मंत्रालयों को मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कहा गया था कि प्रशिक्षण से नीतियों, परियोजनाओं और सार्वजनिक बातचीत में कैसे सुधार होगा।
  • प्रौद्योगिकी और परंपरा का मिश्रण: इस कार्यक्रम ने आधुनिक ई-लर्निंग उपकरणों को भारत के प्रशासनिक इतिहास से लिए गए सबक के साथ संतुलित किया, जिसमें सत्यनिष्ठा और सार्वजनिक भावना (public spirit) जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया।

निष्कर्ष

साधना सप्ताह दर्शाता है कि कैसे Mission Karmayogi नारों से आगे बढ़कर व्यावहारिक कदम उठा रहा है। नागरिक-केंद्रित शासन के लिए आवश्यक कौशल और मानसिकता के साथ सिविल सेवकों को लैस करके, भारत एक उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार नौकरशाही के निर्माण का लक्ष्य रखता है।

स्रोत: Press Information Bureau

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