विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Sakura Science Programme: भारतीय छात्रों की जापान यात्रा और STEM फोकस

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ख़बरों में क्यों?

24 से 30 मई 2026 तक 56 भारतीय स्कूली छात्रों और चार पर्यवेक्षकों (supervisors) के एक समूह ने सकुरा विज्ञान विनिमय कार्यक्रम (Sakura Science Exchange Programme) के तहत जापान का दौरा किया। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा झंडी दिखाकर रवाना किए गए प्रतिनिधिमंडल ने जापान के उन्नत विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अनुभव करने के लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान सुविधाओं और सांस्कृतिक स्थलों का दौरा किया।

पृष्ठभूमि

सकुरा विज्ञान कार्यक्रम (Sakura Science Programme) जापान विज्ञान और प्रौद्योगिकी एजेंसी (JST) द्वारा 2014 में दुनिया भर के हाई-स्कूल के छात्रों को लघु अध्ययन यात्राओं के लिए जापान आमंत्रित करने के लिए शुरू किया गया था। भारत 2016 में इस कार्यक्रम में शामिल हुआ, और तब से सैकड़ों भारतीय छात्रों ने इसमें भाग लिया है। ये यात्राएँ भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) की पूरक हैं, जो कक्षा की दीवारों से परे समग्र और अनुभवात्मक शिक्षा (experiential learning) पर जोर देती है। चयनित छात्र अक्सर राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति (National Means‑cum‑Merit Scholarship) के प्राप्तकर्ता होते हैं।

2026 की यात्रा के मुख्य आकर्षण

  • विविध प्रतिनिधित्व (Diverse representation): देश भर में युवा प्रतिभाओं तक पहुँचने के कार्यक्रम के प्रयासों को दर्शाते हुए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 56 छात्र (24 लड़के और 32 लड़कियाँ) आए। उनके साथ चार शिक्षक व अधिकारी भी थे।
  • विज्ञान और संस्कृति का अनुभव: अपनी एक सप्ताह की यात्रा के दौरान छात्रों ने टोक्यो और अन्य शहरों में विश्वविद्यालयों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और विज्ञान संग्रहालयों का दौरा किया। उन्होंने पारंपरिक कलाओं, व्यंजनों और स्थानीय छात्रों के साथ बातचीत के माध्यम से जापानी संस्कृति का भी अनुभव किया।
  • NEP 2020 से जुड़ाव: यह कार्यक्रम व्यावहारिक शिक्षा (hands‑on learning), आलोचनात्मक सोच (critical thinking) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करके भारत के शिक्षा सुधारों के अनुरूप है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद से 670 से अधिक भारतीय छात्रों और 90 से अधिक पर्यवेक्षकों ने सकुरा एक्सचेंजों (Sakura exchanges) में भाग लिया है।
  • द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना: इस तरह के आदान-प्रदान न केवल छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं, बल्कि लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करते हुए भारत और जापान के बीच पुल भी बनाते हैं।

निष्कर्ष

जापान के विश्व स्तरीय अनुसंधान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) के लिए एक खिड़की खोलकर, सकुरा विज्ञान कार्यक्रम भारतीय छात्रों के बीच जिज्ञासा पैदा करता है और अंतर्राष्ट्रीय समझ (international understanding) को बढ़ावा देता है। इस तरह के आदान-प्रदान में निरंतर भागीदारी से विश्व स्तर पर जागरूक और तकनीकी रूप से कुशल (technologically skilled) पीढ़ी विकसित करने में मदद मिलेगी।

स्रोत

DD News

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