चर्चा में क्यों?
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले (Chamba district) में वन अधिकारियों ने कालाटोप-खज्जियार (Kalatop-Khajjiar) और गामगुल (Gamgul) अभयारण्यों में 2,500 मीटर से ऊपर की ऊंचाई पर सांभर हिरण (sambar deer) की कैमरा-ट्रैप (camera-trap) छवियों की सूचना दी। यह दृश्य असामान्य है क्योंकि सांभर आमतौर पर कम ऊंचाई वाले जंगलों में पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि बेहतर आवास सुरक्षा (habitat protection) और अधिक ऊंचाई पर घनी वनस्पति के कारण जानवरों ने अपनी सीमा का विस्तार किया है।
पृष्ठभूमि
सांभर (रूसा एकरंगा - Rusa unicolor) भारत में हिरण की सबसे बड़ी प्रजाति है। यह भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) और दक्षिण पूर्व एशिया में पर्णपाती (deciduous) और सदाबहार जंगलों में निवास करता है। प्रजाति को IUCN रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत इसे सुरक्षा प्राप्त है।
निष्कर्ष और कारण
- उच्च ऊंचाई वाले रिकॉर्ड: वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप (Camera traps) ने 2,500 मीटर से ऊपर सांभर की छवियों को कैप्चर किया, जो यह दर्शाता है कि वे ठंडे क्षेत्रों (colder zones) में चले गए हैं जहां उन्हें शायद ही कभी देखा गया था।
- संभावित कारण: उच्च ऊंचाई पर घने ओक और देवदार के जंगल पर्याप्त भोजन प्रदान करते हैं और शिकारियों से बचाव करते हैं। कम मानवीय अशांति और अवैध शिकार भी हिरणों को ऊपर की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
- पारिस्थितिक भूमिका (Ecological role): प्राथमिक शाकाहारी जीवों के रूप में, सांभर हिरण बाघ, तेंदुए और जंगली कुत्तों के लिए शिकार की एक प्रमुख प्रजाति है। उनके रेंज का विस्तार (range expansion) हिमालय में शिकारी गतिकी (predator dynamics) को प्रभावित कर सकता है।
संरक्षण संबंधी चिंताएँ
हालांकि बढ़े हुए दृश्य सुधार का सुझाव देते हैं, सांभर की आबादी को अभी भी आवास के नुकसान (habitat loss), शिकार और सड़क दुर्घटनाओं से खतरा है। संरक्षणवादी अधिक ऊंचाई वाले जंगलों को निचली श्रेणियों (lower ranges) से जोड़ने के लिए निरंतर निगरानी (monitoring) और वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) के निर्माण की सलाह देते हैं।
स्रोत: The Tribune