चर्चा में क्यों?
हैदराबाद में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) के वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट बीज-कोटिंग तकनीक विकसित की है। यह नवाचार बीजों को कोट करने के लिए बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर (biodegradable polymer) का उपयोग करता है और हाल ही में इसे जलवायु-अनुकूल कृषि (climate-resilient agriculture) में एक सफलता के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों को अंकुरण (germination) में सुधार करने और पौधों को कीटों और सूखे से बचाने में मदद करना है। जून 2026 में इस तकनीक ने ध्यान आकर्षित किया जब राष्ट्रीय समाचार आउटलेट्स ने वर्षा-आधारित खेती (rain-fed farming) के लिए इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला।
पृष्ठभूमि
बीज फसल की उपज का आधार हैं। पारंपरिक बीज उपचार (Traditional seed treatments) अक्सर फंगल संक्रमण जैसी एक ही समस्या का समाधान करते हैं। ICAR-IIOR के शोधकर्ताओं ने माना कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और मिट्टी के क्षरण के लिए अधिक व्यापक समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने एक बायोपोलीमर-आधारित कोटिंग विकसित की जो प्रत्येक बीज के चारों ओर एक पतली परत बनाती है। यह परत लाभकारी सूक्ष्मजीवों (microorganisms), पोषक तत्वों और सुरक्षात्मक एजेंटों के लिए एक वितरण मंच (delivery platform) के रूप में कार्य करती है। सोयाबीन, मक्का और मूंगफली जैसी फसलों में फील्ड परीक्षणों में अनुपचारित बीजों की तुलना में उपज में 12% से 37% तक की वृद्धि देखी गई। यह तकनीक विशेष रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों (rain-fed areas) में उपयोगी है, जो भारत की कृषि योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा हैं।
यह कैसे काम करता है
- बायोपोलीमर परत (Biopolymer layer): एक बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर प्रत्येक बीज को घेरता है, एक सुरक्षात्मक सूक्ष्म-वातावरण (micro-environment) बनाता है जो नमी और तापमान को नियंत्रित करता है।
- इनपुट का वितरण (Delivery of inputs): कोटिंग लाभकारी रोगाणुओं, पोषक तत्वों और फसल-सुरक्षा रसायनों को सीधे बीज-मिट्टी इंटरफेस (seed-soil interface) तक ले जाती है। यह तेजी से अंकुरण और मजबूत जड़ वृद्धि का समर्थन करता है।
- अनुकूलन (Customisation): इस फॉर्मूले को अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जियों और बागवानी फसलों के लिए तैयार किया जा सकता है, जिससे यह विभिन्न कृषि प्रणालियों के लिए बहुमुखी बन जाता है।
- वर्षा-आधारित लचीलापन (Rain-fed resilience): पौधे की शुरुआती शक्ति (vigour) में सुधार करके, यह तकनीक पौधों को नमी के तनाव (moisture stress) और कीटों के हमलों से निपटने में मदद करती है, जो वर्षा-आधारित कृषि में आम हैं।
महत्व
- बेहतर उपज: क्षेत्र प्रदर्शनों (Field demonstrations) में मूंगफली और सोयाबीन में 30% तक उपज में वृद्धि की सूचना मिली। बेहतर पौधों की शक्ति से स्वस्थ पौधे और उच्च उत्पादकता प्राप्त होती है।
- जलवायु लचीलापन (Climate resilience): कोटिंग सूखे और कीटों से जोखिम कम करती है, जिससे किसानों को परिवर्तनशील मौसम में उत्पादन बनाए रखने में मदद मिलती है।
- सतत खेती (Sustainable farming): कीटनाशक या पोषक तत्वों के बार-बार उपयोग की आवश्यकता को कम करके, यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों (eco-friendly farming practices) का समर्थन करती है।
निष्कर्ष
स्मार्ट बीज कोटिंग तकनीक यह दर्शाती है कि बायोपोलीमर विज्ञान (biopolymer science) खेती को कैसे अधिक लचीला बना सकता है। सीधे बीज तक पोषक तत्वों और लाभकारी रोगाणुओं का पैकेज पहुंचाकर, यह एक साथ कई चुनौतियों का समाधान करता है। इसके व्यापक उपयोग से लाखों किसानों की उपज में सुधार हो सकता है और सतत कृषि (sustainable agriculture) में योगदान मिल सकता है।