चर्चा में क्यों?
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि वह 11 मई 2026 को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल होंगे। यह आयोजन स्वतंत्रता के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का सम्मान करेगा और लचीलेपन के प्रतीक (symbol of resilience) के रूप में इसकी भूमिका का जश्न मनाएगा।
पृष्ठभूमि
सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात के प्रभास पाटन (Prabhas Patan) में स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग (jyotirlinga) तीर्थों में से एक है और सदियों से एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रहा है। पूरे इतिहास में मंदिर को कई बार नष्ट किया गया और फिर से बनाया गया है।
मुख्य बिंदु
- ऐतिहासिक अभिलेखों में उल्लेख है कि अरब और तुर्क हमलावरों ने 10वीं और 18वीं शताब्दी के बीच सोमनाथ को कई बार लूटा था। इसके बावजूद, स्थानीय शासकों और भक्तों ने सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में देखते हुए बार-बार मंदिर का जीर्णोद्धार किया।
- भारत को आजादी मिलने के बाद, सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का नेतृत्व किया। मारू-गुर्जर (Maru-Gurjara) वास्तुकला शैली (architectural style) में बने नए मंदिर का उद्घाटन मई 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) ने किया था।
- यह मंदिर परिसर अरब सागर (Arabian Sea) के सामने है और वेरावल बंदरगाह (Veraval port) के पास स्थित है। किंवदंती के अनुसार, चंद्रमा के देवता सोम (Soma) अपनी चमक (brightness) वापस पाने के लिए यहां तपस्या (penance) की थी, जिससे मंदिर को अपना नाम मिला (सोमनाथ का अर्थ है "चंद्रमा के देवता" - lord of the moon)।
- सोमनाथ भारत के पाँच महत्वपूर्ण तटीय तीर्थों में से एक है, जिसमें द्वारका, रामेश्वरम, पुरी और श्रृंगेरी शामिल हैं। आगामी वर्षगांठ समारोह इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर करेगा।