पर्यावरण

Sri Guru Tegh Bahadur Wildlife Sanctuary: पंजाब ईको-टूरिज्म और Leopard Safari

Sri Guru Tegh Bahadur Wildlife Sanctuary: पंजाब ईको-टूरिज्म और Leopard Safari

चर्चा में क्यों?

पंजाब वन विभाग (Punjab Forest Department) ने आनंदपुर साहिब के पास झज्जर-बचौली वन्यजीव अभयारण्य (Jhajjar–Bachauli Wildlife Sanctuary) के लिए ₹5.36 करोड़ की विकास योजना तैयार की है। जनवरी 2026 में, नौवें सिख गुरु को सम्मानित करने के लिए अभयारण्य का नाम बदलकर श्री गुरु तेग बहादुर वन्यजीव अभयारण्य (Sri Guru Tegh Bahadur Wildlife Sanctuary) कर दिया गया था। अधिकारियों का इरादा जैव विविधता (biodiversity) के संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म (eco-tourism) को बढ़ावा देने के लिए एक लेपर्ड सफारी (leopard safari) और नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर (nature interpretation centre) बनाने का है。

पृष्ठभूमि

1996 में स्थापित, यह अभयारण्य पंजाब के रूपनगर ज़िले के झज्जर, बचौली और लमलेहरी गाँवों को कवर करते हुए 289 एकड़ में फैला हुआ है। यह सतलज नदी (Sutlej River) के पास शिवालिक की तलहटी में स्थित है और इसमें बबूल, खैर, नीलगिरी, नीम और शीशम के बिखरे हुए पेड़ों के साथ शुष्क पर्णपाती जंगल (dry deciduous forest) शामिल हैं। यह क्षेत्र मौसमी वन्यजीवों की रक्षा के लिए अधिसूचित किया गया था जो नदी गलियारे के किनारे प्रवास करते हैं। जनवरी 2026 में, पंजाब स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने गुरु तेग बहादुर के नाम पर इसका नाम बदलने को मंजूरी दी。

प्रस्तावित विकास कार्य

  • लेपर्ड सफारी: बचाए गए या बंदी अवस्था में पाले गए (captive-bred) तेंदुओं को एक समर्पित बाड़े (fenced enclosure) में रखा जाएगा, जिससे आगंतुकों को जंगली आवासों को परेशान किए बिना वाहनों से उन्हें देखने की अनुमति मिलेगी।
  • नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर: योजनाओं में एक शैक्षिक सुविधा (educational facility) शामिल है जो वॉच टावर और एलिवेटेड ऑब्जर्वेशन डेक (elevated observation decks) के साथ स्थानीय पारिस्थितिकी (ecology), सिख विरासत और संरक्षण उपायों की जानकारी देगी।
  • पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढाँचा: यह परियोजना प्रदूषण को कम करने के लिए पैदल मार्ग, गज़ेबो (gazebos), सौर-ऊर्जा संचालित प्रकाश व्यवस्था, चेन-लिंक फेंसिंग और बैटरी चालित वाहनों का निर्माण करेगी। पहले चरण (2026-27) का परिव्यय लगभग ₹2 करोड़ है, जबकि शेष राशि अगले दो वर्षों में खर्च की जाएगी।
  • वनस्पतियाँ और जीव-जंतु: इस अभयारण्य में सांबर, काकड़ (barking deer), खरगोश, सियार, नीलगाय, नेवला, जंगली सुअर और कई सरीसृप प्रजातियाँ पाई जाती हैं। कभी-कभी तेंदुए पड़ोसी हिमाचल की पहाड़ियों से प्रवास कर यहाँ आते हैं। सूखे जंगल में पर्णपाती (deciduous) पेड़ और ऊँची घास हावी है।
  • सामुदायिक भागीदारी: अधिकारियों की योजना स्थानीय निवासियों को गाइड और कर्मचारियों के रूप में रोज़गार देने की है, जिससे आजीविका के विकल्प (livelihood options) पैदा होंगे और यह सुनिश्चित होगा कि पर्यटन से आस-पास के गाँवों को लाभ मिले।

निष्कर्ष

श्री गुरु तेग बहादुर वन्यजीव अभयारण्य का विकास पंजाब में टिकाऊ (sustainable) वन्यजीव पर्यटन की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक है। संरक्षण को शिक्षा और आजीविका के साथ जोड़कर, राज्य का लक्ष्य इको-टूरिज्म के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जो जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत दोनों का उत्सव मनाए。

स्रोत

HT

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