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SSBSK: एकीकृत देखभाल, डिजिटल ट्रैकिंग और प्रमुख विशेषताएँ

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समाचार में क्यों?

29 June 2026 को Ministry of Health and Family Welfare ने Samagra Shishu Bal Swasthya Karyakram (SSBSK) लॉन्च किया। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम घर-आधारित नवजात शिशु और छोटे बच्चों की देखभाल को एकीकृत करता है और डिजिटल ट्रैकिंग शुरू करता है ताकि तीन साल तक के प्रत्येक बच्चे को समय पर सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

पृष्ठभूमि

भारत में पहले दो कार्यक्रम चलते थे: Home-Based Newborn Care (HBNC) और Home-Based Young Child Care (HBYC)। इन योजनाओं ने घर के दौरे और बुनियादी स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान की लेकिन अलग-अलग संचालित हुईं। उच्च नवजात मृत्यु दर और कुपोषण ने देखभाल की एक निर्बाध निरंतरता (seamless continuum of care) की आवश्यकता का संकेत दिया। SSBSK, HBNC और HBYC का विलय करता है और शिशुओं तथा छोटे बच्चों के लिए जोखिम-स्तरीकृत अनुवर्ती कार्रवाई (risk-stratified follow-up) का परिचय देता है। यह माताओं के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास (early childhood development) और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन पर जोर देता है तथा Ayushman Bharat Health Account (ABHA) IDs और Baal-ABHA IDs से जुड़े डिजिटल उपकरणों का उपयोग करता है।

मुख्य विशेषताएं

  • जोखिम-स्तरीकृत घर के दौरे (Risk-stratified home visits): सभी नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह हफ्तों के दौरान छह घर के दौरे (home visits) मिलते हैं। समय से पहले (pre-term) पैदा हुए या कम वजन वाले बच्चों को 'जोखिम वाले' (at-risk) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और उन्हें पहले 42 दिनों में नौ दौरे तक मिलते हैं। दो महीने से 36 महीने तक, 'जोखिम वाले' बच्चों को अतिरिक्त आठ घर के दौरे मिलते हैं।
  • एकीकृत सेवा वितरण: Accredited social health activists (ASHAs), auxiliary nurse midwives (ANMs), community health officers (CHOs) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एक साथ काम करते हैं। वे टीकाकरण, पोषण परामर्श, विकास की निगरानी (growth monitoring) और विकासात्मक स्क्रीनिंग प्रदान करते हैं।
  • वेल-बेबी सत्र (Well-baby sessions) और Shishu Shivir: SSBSK विलेज हेल्थ, सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डेज़ (Village Health, Sanitation and Nutrition Days - VHSND) में मासिक "Well-Baby Sessions" और Ayushman Arogya Mandirs में मासिक Shishu Shivir शिविरों का परिचय देता है। इन सत्रों में प्रारंभिक शिक्षण गतिविधियां (early learning activities) और माता-पिता की शिक्षा शामिल है।
  • मातृ मानसिक स्वास्थ्य (Maternal mental health): प्रसवोत्तर अवसाद (Post-partum depression) की स्क्रीनिंग घर के दौरों में शामिल है। लक्षणों वाली माताओं को परामर्श और देखभाल के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में रेफर किया जाता है।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: बच्चे-वार (Child-wise) ट्रैकिंग और निर्णय-समर्थन एप्लिकेशन (decision-support applications) फ्रंटलाइन वर्कर्स को दौरे शेड्यूल करने, विकास मेट्रिक्स (growth metrics) रिकॉर्ड करने और उच्च जोखिम वाले मामलों को चिह्नित करने में मदद करते हैं। यह सिस्टम JANANI, U-WIN, Maternal, Perinatal and Child Death Surveillance and Response (MPCDSR) पोर्टल और Poshan Tracker जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत है।
  • मलिन बस्तियों (slums) और प्रवासियों पर ध्यान: यह कार्यक्रम मलिन बस्तियों और प्रवासी आबादी में शिशुओं के लिए शहरी घर-आधारित देखभाल (urban home-based care) को मजबूत करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे पीछे न छूटें।

महत्व

  • देखभाल की निरंतरता (Continuum of care): नवजात शिशु और छोटे बच्चों के कार्यक्रमों को एकीकृत करके, SSBSK यह सुनिश्चित करता है कि पोषण, स्वास्थ्य और विकास सेवाएं शैशवावस्था के बाद बंद न हों।
  • प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास: उत्तरदायी देखभाल (Responsive caregiving) और उम्र-उपयुक्त खेल को बढ़ावा दिया जाता है, यह पहचानते हुए कि पहले तीन वर्षों में मिलने वाला प्रोत्साहन (stimulation) मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है।
  • समय पर हस्तक्षेप (Timely interventions): जोखिम-स्तरीकृत दौरे और डिजिटल अलर्ट बीमारी, कुपोषण या विकासात्मक देरी को जल्दी पहचानने में मदद करते हैं, जिससे तत्काल रेफरल (prompt referral) की अनुमति मिलती है।
  • एकीकरण (Integration): कार्यक्रमों में डेटा को जोड़ने से दोहराव कम होता है और स्वास्थ्य कर्मियों तथा प्रशासकों के लिए बेहतर नियोजन का समर्थन मिलता है।

निष्कर्ष

Samagra Shishu Bal Swasthya Karyakram खंडित पहलों से हटकर एक समग्र, बाल-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। जोखिम-आधारित घर के दौरों, सामुदायिक सत्रों और डिजिटल उपकरणों के माध्यम से, इसका उद्देश्य भारत के सबसे कम उम्र के नागरिकों के लिए अस्तित्व (survival), पोषण और विकास परिणामों (development outcomes) में सुधार करना है। फ्रंटलाइन वर्कर्स का निरंतर प्रशिक्षण और सामुदायिक जुड़ाव इसकी सफलता की कुंजी होगी।

स्रोत: Press Information Bureau

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