चर्चा में क्यों?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विपणन का विनियमन) आदेश, 2001 (Aviation Turbine Fuel (Regulation of Marketing) Order, 2001) में संशोधन किया है, ताकि पारंपरिक जेट ईंधन (conventional jet fuel) के साथ सतत विमानन ईंधन (sustainable aviation fuel - SAF) का मिश्रण (blends) शामिल किया जा सके। 17 अप्रैल 2026 को अधिसूचित (Notified), यह प्रशासनिक परिवर्तन (administrative change) स्पष्ट करता है कि एविएशन टर्बाइन ईंधन में अब सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन (synthetic hydrocarbons) शामिल हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों (international standards) को पूरा करते हैं। यह कदम भारत के विमानन क्षेत्र (aviation sector) को वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों (global sustainability goals) के साथ जोड़ता है।
पृष्ठभूमि
सतत विमानन ईंधन (Sustainable aviation fuel) नवीकरणीय (renewable) या अपशिष्ट पदार्थों (waste materials) से बना एक तरल ईंधन (liquid fuel) है। जीवाश्म कच्चे तेल (fossil crude oil) से प्राप्त पारंपरिक जेट ईंधन के विपरीत, SAF का उत्पादन प्रयुक्त खाना पकाने के तेल (used cooking oils), कृषि और नगरपालिका कचरे (agricultural and municipal waste), शैवाल (algae), गैर-खाद्य फसलों (non-food crops) या कैप्चर किए गए कार्बन (captured carbon) से किया जा सकता है। जब इसे पारंपरिक ईंधन के साथ मिश्रित (blended) किया जाता है, तो SAF अपने जीवन चक्र (life cycle) में शुद्ध ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन (greenhouse-gas emissions) को 80 प्रतिशत तक कम कर देता है क्योंकि यह नए जीवाश्म कार्बन को छोड़ने के बजाय मौजूदा कार्बन को रीसायकल (recycles) करता है। इस ईंधन को यह सुनिश्चित करने के लिए ASTM और भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards - BIS) द्वारा निर्धारित कड़े मानकों (stringent standards) को पूरा करना होगा कि यह सुरक्षित है और मौजूदा विमानों तथा बुनियादी ढांचे (infrastructure) के अनुकूल है।
संशोधन के प्रमुख बिंदु
- विस्तारित परिभाषा (Expanded definition): एविएशन टर्बाइन ईंधन में अब जीवाश्म (fossil) और गैर-जीवाश्म (non-fossil) दोनों स्रोतों से उत्पादित हाइड्रोकार्बन का कोई भी मिश्रण शामिल है जो बीआईएस विनिर्देश (BIS specification) IS 17081 के अनुरूप है। यह कानूनी स्पष्टता (legal clarity) आपूर्तिकर्ताओं (suppliers) को अलग लाइसेंस के बिना SAF मिश्रणों के विपणन (market) की अनुमति देती है।
- प्रवर्तन प्रावधान (Enforcement provisions): संशोधन गुणवत्ता मानकों (quality standards) के अनुपालन (compliance) को सत्यापित करने के लिए विमानन ईंधन (aviation fuel) के नमूने (sampling) और निरीक्षण के लिए अद्यतन प्रावधानों (updated provisions) को पेश करता है। यह 2005 के उस खंड (clause) को भी निरस्त (repeals) करता है जिसमें मिलावट (adulteration) के लिए दंडात्मक कार्रवाई (punitive actions) निर्धारित की गई थी।
- राष्ट्रीय सम्मिश्रण लक्ष्य (National blending targets): भारत का लक्ष्य 2027 में 1 प्रतिशत SAF मिश्रण (blend) से शुरू करना है, जो 2028 में बढ़कर 2 प्रतिशत और 2030 तक 5 प्रतिशत हो जाएगा। ये लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय रुझानों (international trends) को दर्शाते हैं; यूरोपीय संघ (European Union) 2025 तक 2 प्रतिशत SAF मिश्रण (blend) अनिवार्य करता है और संयुक्त राज्य अमेरिका SAF उत्पादन के लिए कर प्रोत्साहन (tax incentives) का पीछा कर रहा है।
SAF क्यों महत्वपूर्ण है
- डीकार्बोनाइजिंग एविएशन (Decarbonising aviation): वैश्विक CO2 उत्सर्जन में विमानन की हिस्सेदारी (accounts) लगभग 2-3 प्रतिशत है। लंबी दूरी की उड़ानों (long-haul flights) के लिए इलेक्ट्रिक विमान (Electric planes) अभी व्यावसायिक व्यवहार्यता (commercial viability) से दूर हैं, इसलिए SAF का उपयोग करना वर्तमान में उत्सर्जन (emissions) में कटौती करने का सबसे व्यावहारिक (practical) तरीका है।
- घरेलू उद्योग के अवसर (Domestic industry opportunities): भारत अपने अधिकांश जेट ईंधन का आयात (imports) करता है। SAF उत्पादन विकसित करने से आयात निर्भरता (import dependence) कम हो सकती है, हरित रोजगार (green jobs) पैदा हो सकते हैं और अपशिष्ट पदार्थों (waste materials) का मूल्य (value) बढ़ सकता है।
- वैश्विक बाजारों के साथ संरेखण (Alignment with global markets): जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस (international airlines) SAF जनादेशों (mandates) को अपनाती हैं, भारतीय वाहकों (Indian carriers) को अनुपालक ईंधन (compliant fuel) तक पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है। नियमों में सामंजस्य (Harmonising regulations) व्यापार और यात्रा (trade and travel) को सुविधाजनक बनाएगा।
स्रोत: PIB