पर्यावरण

Tholpetty Sanctuary: गौर स्थानांतरण, वायनाड और नीलगिरी रिज़र्व

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समाचार में क्यों?

11 May 2026 को केरल के कन्नूर जिले के रिहायशी इलाकों में घूम रहे एक जंगली gaur (Indian bison) को वन विभाग द्वारा बेहोश कर दूसरी जगह ले जाया गया। अधिकारियों ने पिनाराई (Pinarayi) में जानवर को पकड़ने के लिए डार्ट गन का इस्तेमाल किया और उसे सुरक्षित रूप से वायनाड के Tholpetty Wildlife Sanctuary पहुँचाया। इस बड़े जानवर द्वारा फसल और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के कारण निवासी कई दिनों से खौफ में जी रहे थे, इसलिए पुनर्वास से समुदाय को राहत मिली और जानवर की भलाई भी सुनिश्चित हुई।

पृष्ठभूमि

Tholpetty Wildlife Sanctuary, उत्तरी केरल में Wayanad Wildlife Sanctuary और Nilgiri Biosphere Reserve का हिस्सा है। मानन्थावाद्य (Mananthavady) शहर से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित यह अभयारण्य कर्नाटक की सीमा पर है और यहाँ नम पर्णपाती जंगलों तथा बागानों का मिश्रण है। यह हाथियों, बाघों, तेंदुओं, गौर, सांभर हिरणों और कई छोटे स्तनधारियों का घर है। Malabar grey hornbill, crested serpent eagle और 300 से अधिक अन्य पक्षियों को देखने के लिए बर्डवाचर्स यहाँ आते हैं। मानव प्रभाव को सीमित रखते हुए क्षेत्र की जैव विविधता को प्रदर्शित करने के लिए केरल सरकार नियंत्रित जीप सफारी और नेचर वॉक का आयोजन करती है।

मुख्य बिंदु

  • बचाव अभियान: Gaur अपने वन आवास से भटक कर पिनाराई, धर्मादम (Dharmadam) और आसपास के गाँवों में आ गया था। वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की एक टीम ने जानवर को ट्रैक किया और उसे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए वाहन पर लादने से पहले काबू करने के लिए ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट्स (tranquiliser darts) का उपयोग किया।
  • सुरक्षित रिहाई: Tholpetty ले जाए जाने के बाद, बेहोशी से उबरने तक gaur की निगरानी की गई और फिर उसे उपयुक्त आवास में छोड़ दिया गया। यह विधि संघर्ष से बचाती है और लोगों तथा वन्यजीवों दोनों को चोट लगने से रोकती है।
  • Biodiversity hotspot: Tholpetty बड़े Wayanad Wildlife Sanctuary का हिस्सा है, जो स्वयं Nilgiri Biosphere Reserve का एक घटक है। यह संरक्षित क्षेत्र बाघों, तेंदुओं, हाथियों, गौर, स्लोथ बीयर (sloth bears) और जंगली कुत्तों को आश्रय देता है। यह अद्वितीय वनस्पतियों का भी समर्थन करता है और केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु के वन क्षेत्रों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में कार्य करता है।
  • Eco‑tourism और संरक्षण: वन विभाग संरक्षण के साथ पर्यटन को संतुलित करने के लिए आगंतुक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। स्थानीय समुदाय सफारी के प्रबंधन में शामिल हैं, जिससे आय उत्पन्न होती है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलता है।

स्रोत

The Hindu

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