पर्यावरण

टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य (Tipeshwar Wildlife Sanctuary): अवैध रिसॉर्ट्स पर अदालती मामला

टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य (Tipeshwar Wildlife Sanctuary): अवैध रिसॉर्ट्स पर अदालती मामला

समाचार में क्यों?

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और वन विभाग (forest department) से उन आरोपों पर जवाब मांगा है कि रिसॉर्ट्स (resorts) और कृषि-पर्यटन (agro-tourism) परियोजनाएं उचित मंजूरी के बिना Tipeshwar Wildlife Sanctuary के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (eco-sensitive zone) के भीतर काम कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि व्यावसायिक गतिविधियां वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) को नुकसान पहुंचा रही हैं और संरक्षण मानदंडों (conservation norms) का उल्लंघन कर रही हैं।

पृष्ठभूमि

Tipeshwar Wildlife Sanctuary महाराष्ट्र के यवतमाल (Yavatmal) जिले में स्थित है और लगभग 149 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह गोदावरी नदी प्रणाली के भीतर वर्धा (Wardha) की सहायक नदी पेंगंगा (Penganga - Painganga) की सहायक नदियों द्वारा सिंचित हल्की पहाड़ियों और घाटियों की विशेषता है। अभयारण्य को 1997 में शुष्क पर्णपाती (dry deciduous) जंगलों और पड़ोसी तेलंगाना में Tadoba Andhari Tiger Reserve और Kawal Tiger Reserve के बीच पलायन करने वाले वन्यजीवों की रक्षा के लिए अधिसूचित किया गया था। जंगल के लगभग 60% हिस्से पर सागौन (teak) का प्रभुत्व है, जिसके बीच-बीच में सागौन बांस, लाल चंदन, महुआ और औषधीय पौधे (medicinal plants) हैं। तेंदुओं, स्लॉथ बियर, लकड़बग्घे (hyenas), गौर, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और पक्षियों की 182 प्रजातियों के साथ यहां 20 से अधिक बाघ दर्ज किए गए हैं।

चर्चा के बिंदु

  • अवैध रिसॉर्ट्स के आरोप: याची (Petitioners) आरोप लगाते हैं कि पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के अंदर निजी रिसॉर्ट्स और कृषि-पर्यटन केंद्र बिना मंजूरी के बनाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पेड़ कट गए हैं और जानवरों की आवाजाही में बाधा आ रही है। वे निर्माणों को हटाने और बफर ज़ोन (buffer zone) का सीमांकन (demarcate) करने के लिए अदालत के आदेश की मांग करते हैं।
  • पारिस्थितिक महत्व: अभयारण्य प्रमुख भंडारों के बीच जाने वाले बाघों के लिए एक गलियारे (corridor) के रूप में कार्य करता है। व्यवधान मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) को बढ़ा सकता है और आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को कम कर सकता है। इस क्षेत्र में सरीसृपों की 26 प्रजातियां और पौधों की 250 से अधिक प्रजातियां भी हैं।
  • सरकार की प्रतिक्रिया: वन अधिकारियों का दावा है कि पर्यटन का बुनियादी ढांचा कोर ज़ोन (core zone) के बाहर है और स्थानीय समुदायों के लिए जागरूकता और आजीविका बढ़ाने में मदद करता है। वे अदालत में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट जमा करने की योजना बना रहे हैं।
  • संरक्षण प्रयास: Tipeshwar वन्यजीव गलियारों के माध्यम से Kawal और Tadoba से जुड़ा हुआ है। स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और ग्रामीण अवैध शिकार की रिपोर्टिंग, पानी के छेद को संरक्षित करने और देशी प्रजातियों को रोपने के द्वारा संरक्षण में भाग लेते हैं।

स्रोत

Times of India.

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